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26 जनवरी को रिहा होगें आनंद मोहन, CM ने दिए संकेत.

महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर CM नीतीश कुमार बोले- चिंता मत करिए, हम लगे हुए हैं जी.

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सिटी पोस्ट लाइव : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ने बाहुबली नेता आनंद मोहन की रिहाई के संकेत दिये हैं.पटना के मिलर हाई स्कूल में महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि समारोह में CM नीतीश कुमार ने इस बात का साफ़ संकेत दे दिया.राजपूत नेताओं और प्रतिनिधियों की मांग पर उन्होंने मंच से कहा- ये सब की चिंता मत करो. आप लोगों को मालूम नहीं है, राजनीति वो जो भी करें. जब उनकी गिरफ्तारी हुई, जॉर्ज साहब के साथ हमलोग सब उनसे मिलने जेल में गए थे. ये सब चिंता मत करिए. हम लगे हुए हैं जी. अब ई सब बात काहे के लिए करते रहते हैं.

2020 में इसी महाराणा प्रताप पुण्यतिथि के कार्यक्रम में क्षत्रिय समाज के लोगों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आनन्द मोहन की रिहाई की मांग की थी. CM नीतीश कुमार ने भी लोगों को आश्वासन दिया था कि वो कोशिश करेंगे. एक बार फिर उन्होंने रिहाई के संकेत दिए हैं.आजीवन उम्र कैद की सजा पाए कैदी जिनका जेल जीवन के दौरान बेहतर आचरण होता है, उसे परिहार का लाभ दिया जाता है. यह वैसे बंदी होते हैं जो जेल में 14 साल की सजा पूरी कर लेते हैं. इसके बाद 6 साल के जेल जीवन का लाभ जोड़ते हुए उसे 20 साल की सजा पूरी कर लेना मान लिया जाता है. इसके बाद जांच प्रक्रिया पूरी कराते हुए समय-समय पर उन्हें मुक्त किया जाता रहा है.

बेहतर आचरण वाले कैदियों की निगरानी कराने के बाद जेलों के अधीक्षक, प्रोबेशन पदाधिकारी, एसपी, गृह क्षेत्र के थानाध्यक्ष की रिपोर्ट जेल आईजी को भेजी जाती है. इसे राज्य दंडादेश परिहार परिषद की बैठक में रखा जाता है. इसकी अमूमन छह माह में बैठक होती है. इसमें राज्य के सभी प्रमुख सक्षम अधिकारी बैठते हैं.इनमें गृह सचिव, जेल आईजी भी शामिल होते हैं। उक्त परिषद की बैठक में ऐसे कैदियों के नामों पर विचार किया जाता है. उनसे संबंधित भेजी गई रिपोर्ट के बारे में यह देखा जाता है कि जिसके नामों का प्रस्ताव लाया गया है, क्या वह सही पात्र हैं. उनकी पात्रता मानक के अनुरूप होने पर उन्हें रिहा करने का आदेश जेलों को दिया जाता है.

सूत्रों के अनुसार इसबार 26 जनवरी को आनंद मोहन को जेल से रिहा किया जा सकता है.सूत्रों के अनुसार इसकी तैयारी हो चुकी है केवल औपचारिक घोषणा होना भर बाकी है.आनंद मोहन एक जमाने में सबसे कदावर राजपूत नेता के रूप में उभरे थे.लेकिन मुजफ्फरपुर डीएम कृष्णैया के हत्या के मामले में उन्हें जेल जाना पड़ा.उनके बेटे तेजस्वी यादव की पार्टी के विधायक हैं और पत्नी पूर्व सांसद हैं.

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