By, Shrikant Pratyush
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बाबूलाल ने मंत्रिमंडल विस्तार में देरी तक हेमंत सोरेन पर कसा तंज

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झारखंड विकास मोर्चा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने पार्टी के भारतीय जनता पार्टी में विलय के सवालों पर अब तक पत्ता नहीं खोला है। अपने पैतृक गांव तिसरी में पत्रकारों से बातचीत में बाबूलाल मरांडी ने झाविमो के भाजपा में विलय की चर्चा पर कुछ भी साफ-साफ बोलने से इंकार कर दिया, वहीं मंत्रिमंडल विस्तार में हो रहे विलंब पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें दिल्ली की बार-बार दौड़ लगाने के बजाय, मंत्रिमंडल गठन कर विकास के कामकाज पर ध्यान देना चाहिए।

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बाबूलाल ने मंत्रिमंडल विस्तार में देरी तक हेमंत सोरेन पर कसा तंज

सिटी पोस्ट लाइव, रांची: झारखंड विकास मोर्चा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने पार्टी के भारतीय जनता पार्टी में विलय के सवालों पर अब तक पत्ता नहीं खोला है। अपने पैतृक गांव तिसरी में पत्रकारों से बातचीत में बाबूलाल मरांडी ने झाविमो के भाजपा में विलय की चर्चा पर कुछ भी साफ-साफ बोलने से इंकार कर दिया, वहीं मंत्रिमंडल विस्तार में हो रहे विलंब पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें दिल्ली की बार-बार दौड़ लगाने के बजाय, मंत्रिमंडल गठन कर विकास के कामकाज पर ध्यान देना चाहिए। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि उन्होंने कभी भी भाजपा में विलय की बात नहीं की है, लोग अटकल लगा रहे है, भविष्यवाणी कर रहे है,इस पर वे कुछ नहीं कर सकते है, लोग कुछ सोचते है, तो उस पर अंकुष लगाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक परिस्थितियों पर सभी अपने-अपने तरीके से अनुमान लगाने के लिए स्वतंत्र है।

हेमंत सोरेन सरकार को पार्टी के तीन विधायकों के साथ समर्थन देने वाले झारखंड विकास मोर्चा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि नयी सरकार गठन के करीब एक महीने का समय बीतने वाला है और यह चर्चा है कि अब 26 जनवरी के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि जनता ने पांच वर्ष यानी 60महीनों के लिए सरकार को चुना है, इसमें से एक महीना गुजर गया है, बाकि के तीन-चार महीने चुनाव में ही निकल जाता है, विधानसभा चुनाव के पहले लोकसभा का चुनाव भी होगा, इस तरह करीब दस महीने का समय ऐसे ही निकल जाएगा और सरकार के पास काम करने के लिए सिर्फ 50 महीने बचेगा।  उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के रूप में भी उन्हें भी काम करने का मौका मिला है, लेकिन अपने 28 महीने के पूरे कार्यकाल में वे केवल 14 बार दिल्ली गये, वह भी बैठकों में हिस्सा लेने गये, लेकिन हेमंत सोरेन 21दिनों के कार्यकाल में ही पांच बार दिल्ली जा चुके है और दस दिन दिल्ली गुजार चुके है। केंद्रीय नेताओं को भी यह समझना चाहिए कि जब उन्हें मुख्यमंत्री चुना है, तो मंत्रिमंडल गठन और काम करने के लिए छूट देनी चाहिए।

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