By, Shrikant Pratyush
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प्रदेश अध्यक्ष का पद जाने पर खेमा बदल लेते हैं बिहार के कांग्रेसी, लंबी है नामों की फेहरिस्त

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बिहार कांग्रेस का एक इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है। जिन कांग्रेसी नेताओं को बिहार कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जाता है पद जाने के बाद उनकी पार्टी भी बदलती रही है यानि प्रदेश अध्यक्ष पद से हटने या हटाए जाने के बाद वे दूसरे दलों का रूख करते हैं दूसरी पार्टी के हो जाते हैं। ऐसे नेताओं की फेहरिस्त बहुत लंबी है। बिहार के पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र से लेकर अशोक चैधरी और रामजतन सिन्हा का नाम इस फेहरिस्त में शामिल हैं। रामजतन सिन्हा बिहार सरकार में मंत्री भी रहे हैं और उन्हें कट्टर कांग्रेसी माना जाता रहा है और बिहार कांग्रेस में उनकी एक साख रही है लेकिन अब वे जदयू में शामिल हो रहे हैं

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प्रदेश अध्यक्ष का पद जाने पर खेमा बदल लेते हैं बिहार के कांग्रेसी, लंबी है नामों की फेहरिस्त

सिटी पोस्ट लाइवः बिहार कांग्रेस का एक इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है। जिन कांग्रेसी नेताओं को बिहार कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जाता है पद जाने के बाद उनकी पार्टी भी बदलती रही है यानि प्रदेश अध्यक्ष पद से हटने या हटाए जाने के बाद वे दूसरे दलों का रूख करते हैं दूसरी पार्टी के हो जाते हैं। ऐसे नेताओं की फेहरिस्त बहुत लंबी है। बिहार के पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र से लेकर अशोक चैधरी और रामजतन सिन्हा का नाम इस फेहरिस्त में शामिल हैं। रामजतन सिन्हा बिहार सरकार में मंत्री भी रहे हैं और उन्हें कट्टर कांग्रेसी माना जाता रहा है और बिहार कांग्रेस में उनकी एक साख रही है लेकिन अब वे जदयू में शामिल हो रहे हैं उन्होंने साफ किया था कि उन्होंने कांग्रेस को नहीं छोड़ा बल्कि कांग्रेस ने उन्हें छोड़ दिया इसलिए वे जदयू में शामिल होंगे। 12 फरवरी को जदयू द्वारा आयोजित मिलन समारोह में वे जदयू की सदस्यता ग्रहण करेंगे। रामजतन सिन्हा के जदयू में जाने की खबर के साथ हीं बिहार कांग्रेस के इतिहास से जुड़ी हुई यह दिलचस्प कहानी भी सामने आ गयी है कि बिहार कांग्रेस के जिन नेताओं को अध्यक्ष बनाया गया है ज्यादातर नेता ने पद जाने के बाद दूसरी पार्टी ज्वाईन की है।

पुराने कांग्रेसी रहे हैं कैसर रू सौम्य और सरल दिखने वाले चैधरी महबूब अली कैसर का नाम भी अध्यक्ष होने के बाद पार्टी का त्याग करने वालों में शुमार हो चुका है. कैसर पुराने कांग्रेसी रहे हैं. उनके पिता चैधरी सलाउद्दीन की गिनती 1980 के दशक में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में होती थी. पिता की विरासत संभालते हुए कैसर राज्य सरकार में मंत्री भी बने. बाद में उन्हें प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी गयी. 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और लोजपा में शामिल हो गये. लोजपा ने उन्हें खगड़िया लोकसभा से उम्मीदवार बनाया और उन्हें जीत हासिल हुई.जदयू में शामिल हुए अशोक चैधरी कांग्रेस का दलित चेहरा माने जाने वाले अशोक चैधरी भी पार्टी का दामन छोड़ चुके हैं. पूर्व मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज महावीर चैधरी के बेटे अशोक चैधरी लंबे समय तक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे. हाल के दिनों में उन्हें जब पद से हटाया गया तो कुछ दिनों बाद वे जदयू में शामिल हो गये. अध्यक्ष पद संभालने के साथ वह महागठबंधन सरकार में शिक्षा मंत्री भी थे. पूर्व मुख्यमंत्री डॉ जगन्नाथ मिश्र और पूर्व केंद्रीय मंत्री तारिक अनवर भी ऐसे प्रदेश अध्यक्ष हैं जिन्होंने बाद के दिनों में दूसरे दल की सदस्यता ग्रहण कर ली.

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डॉ मिश्र ने 1990 के दशक में बिहार से कांग्रेस की सत्ता छिन जाने के बाद दूसरी पार्टी का रुख कर लिया था. तारिक अनवर भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद को सुशोभित कर चुके हैं. वह पार्टी छोड़ राकांपा में चले गये. वहीं से राज्यसभा भी पहुंचे. हाल ही वह राकांपा छोड़ कांग्रेस में वापस हो चुके हैं. तो रामजनतन सिन्हा के जदयू में शामिल होनंे के बाद बिहार कांग्रेस से जुड़ी हुई यह दिलचस्प कहानी फिर याद आ गयी प्रदेश अध्यक्ष रहे रामजतन सिन्हा भी कांग्रेस के नहीं रह सके और अध्यक्ष पद को सुशोभित कर चुके दूसरे कांग्रेसियों की राह पर चलते हुए उन्होंने भी जदयू में जाना तय कर लिया। कहते हैं इतिहास खुद को दुहराता है और रामजतन सिन्हा के मामले ने भी इतिहास ने खुद को दुहराया है।

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