By, Shrikant Pratyush
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वोटों की गिनती शुरू, बेगूसराय सीट पर आगे चल रहे हैं बीजेपी उम्मीदवार गिरिराज सिंह

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2019 के लोकसभा चुनाव के मतगणना का कार्य शुरू हो चुका है। वोटों की गिनती शुरू होने के साथ हीं शुरूआती रूझान सामने आने लगे हैं। शुरूआती रूझानो में बेगूसराय सीट से बीजेपी उम्मीदवार गिरिराज सिंह आगे चल रहे हैं वहीं सीपीआई उम्मीदवार कन्हैया कुमार पीछे चल रहे हैं।

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वोटों की गिनती शुरू, बेगूसराय सीट पर आगे चल रहे हैं बीजेपी उम्मीदवार गिरिराज सिंह

सिटी पोस्ट लाइवः 2019 के लोकसभा चुनाव के मतगणना का कार्य शुरू हो चुका है। वोटों की गिनती शुरू होने के साथ हीं शुरूआती रूझान सामने आने लगे हैं। शुरूआती रूझानो में बेगूसराय सीट से बीजेपी उम्मीदवार गिरिराज सिंह आगे चल रहे हैं वहीं सीपीआई उम्मीदवार कन्हैया कुमार पीछे चल रहे हैं। बेगूसराय सीट पर लड़ाई त्रिकोणीय रही है। यहां मुकाबला बीजेपी उम्मीदवार गिरिराज सिंह, राजद उम्मीदवार तनवीर हसन और सीपीआई उम्मीदवार कन्हैया कुमार के बीच हुआ है। शुरूआत से हीं माना जा रहा था कि यहां लड़ाई इन तीनों उम्मीदवारों के बीच कांटे की हुई है। इस सीट पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई है। हांलाकि गिरिराज सिंह शुरूआती रूझानों में जरूर आगे चल रहे हैं लेकिन तस्वीर साफ होने में थोड़ा वक्त लग सकता है। शुरूआती रूझानों के बाद भी यह कहना मुश्किल है कि यह सीट कौन जीत रहा है।

मतगणना से पहले कन्हैया कुमार ने लोगों से की थी यह अपील

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लोकसभा चुनाव की मतगणनना शुरू हो चुकी है लेकिन इसके पहले सभी पार्टियों ने अपनी-अपनी जीत का दावा किया है। परन्तु इन सब के बीच बिहार के बेगूसराय से सीपीआई उम्मीदवार कन्हैया कुमार ने अपने फेसबुक पर चुनाव परिणाम को लेकर एक पोस्ट किया है. उन्होंने समाज की स्थिती पर लिखते हुए लोगों को सावधान किया है और कहा है कि जीत और हार कल किसी की हो लेकिन आने वाले समय में समाज में नफ़रत की हर हाल में हार हो. जेएनयू छात्र नेता एवं सीपीआई प्रत्याशी कन्हैया कुमार ने कहा कि जिस तरह से पिछले पांच वर्षों के दौरान देश में लोकतंत्र कमजोर किया गया गया है उससे हमें सावधान रहना होगा.

समाज को नफरत की आग में झोकने की कोशिश की गई है.कन्हैया कुमार ने अपने पोस्ट में आगे लिखा है कि नेताओं के चक्कर में आपस में लड़ने वालों को ठंडे दिमाग़ से सोचने की ज़रूरत है कि ऐसा करने से किनका फ़ायदा होता है और किनका नुकसान. असहमति को अपराध या अपमान मानने की मानसिकता न केवल लोकतंत्र को कमज़ोर बनाती है, बल्कि रिश्तों में भी ज़हर घोलती है. कन्हैया ने आगे लिखा कि लोकतांत्रिक होने का मतलब है असहमति को सम्मान देना और यह बात चुनाव या राजनीति से आगे जाती है.

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