By, Shrikant Pratyush
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नीतीश कुमार को छोड़ बिहार में BJP कर रही है चुनाव लड़ने की तैयारी?

क्या नीतीश कुमार देंगे भाजपा को मुख्यमंत्री बनाने का मौक़ा?

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बीजेपी और जेडीयू के नेताओं की तरफ़ से जिस तरह की बयानबाज़ी लगातार हो रही है यह कहना बहुत मुश्किल हो गया है कि बिहार में भाजपा और जदयू का गठबंधन कब तक चलेगा? मगर एक बात तय है कि अगर संजय पासवान के बयान को बीजेपी अपना आधिकारिक बयान मान लेती है या फिर ऐसी ही चुप्पी साधे रखती है तो मान लेना चाहिए कि बीजेपी अब बिहार में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है.माइनस नीतीश सरकार बना पायेगी बीजेपी??

नीतीश कुमार को छोड़ बिहार में BJP कर रही है चुनाव लड़ने की तैयारी?

सिटी पोस्ट लाइव : उत्तर-प्रदेश और झारखण्ड में अपनी सरकार बनाने के बाद अब बीजेपी बिहार में किसी कीमत पर अपनी सरकार बनाना चाहती है. यानी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जगह अपना सीएम देखना चाहती है. मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर JDU-BJP के बीच घमाशान तो सियासी ख़ेमे में हलचल मची है.सरकार में सहयोगी भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ नेता संजय पासवान ने सोमवार को यह बयान देकर कि “नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने का एक मौक़ा भाजपा को देना चाहिए.”, गठबंधन के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य पासवान के इस बयान को JDU  उनका निजी विचार बता रहा है जबकि विपक्षी पार्टीने  इसी बहाने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला तेज कर दिया है.पासवान का यह बयान उस वक़्त आया है जब बीजेपी की ओर से बिहार में एनआरसी लाने की मांग ज़ोर पकड़ रही है.जेडीयू एनआरसी के मुद्दे पर अपने सहयोगी बीजेपी की राय से सहमत नहीं है. JDU के नेता श्याम रजक का कहना है कि बिहार में कोई घुसपैठी नहीं है इसलिए यहाँ एनआरसी की दरकार नहीं है. अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए नीतीश कुमार को NDA के चेहरे के रूप में प्रमोट करने में पहले से ही जुटी हुई है. जेडीयू के इसी अभियान के बाद बीजेपी की तरफ से सीएम पद की मांग तेज कर दी गई है. संजय पासवान के बाद बीजेपी के वरिष्ठ नेता सीपी ठाकुर का ये कहना है कि बिहार में मोदी के चेहरे पर बीजेपी चुनाव लड़ेगी और चुनाव बाद फैसला होगा कि मुख्यमंत्री कौन होगा, बहुत मायने रखता है.

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दरअसल, संजय पासवान का कहना है कि नीतीश कुमार बीजेपी के कोर इश्यूज़ राम मंदिर, ट्रिपल तलाक़, अनुच्छेद 370 और एनआरसी को लेकर अलग विचार रखते हैं. इतनी सारी असहमतियों के वावजूद भी अगर वोट बीजेपी  और नरेंद्र मोदी के नाम पर ही मिल रहे हैं, तो क्यों नहीं नीतीश जी को बीजेपी को एक मौका अपना मुख्यमंत्री बनाने का देना चाहिए. संजय पासवान आगे कहते हैं “ अब जब हमलोग अपने सदस्यता अभियान को लेकर लोगों के बीच जा रहे हैं तो लोग पूछ रहे हैं कि बीजेपी का मुख्यमंत्री कब बनेगा? लोगों ने नीतीश कुमार को देख लिया. और हम भी राजनीति करने आए हैं, कोई लोकोपकार नहीं कर रहे हैं. हमें पता है कि वोट नरेंद्र मोदी के नाम पर मिले हैं तो हम क्यों नहीं चाहेंगे कि बिहार में भी एक बार अपनी सरकार बनाएं.

अभी तक बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए कोई चेहरा सामने नहीं दिखता. ना ही गठबंधन में पार्टी की ओर से इसकी कभी मांग की गई.पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बनाने की बात छिड़ी है. लेकिन, बीजेपी के पास मुख्यमंत्री पद का चेहरा कौन है? क्या ये भी तय कर लिया गया है?संजय कहते हैं, “हमारे पास चेहरों की कमी नहीं है. अभी जो हमारे डिप्टी सीएम सुशील मोदी हैं, वे क्या कम हैं! हमारे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय जी भी हैं, जिनके पास नेतृत्व का अनुभव भी है. हमारे यही दोनों चेहरे काफ़ी हैं.”

लेकिन, जदयू ने तो अपना चेहरा पहले ही चुन लिया है. नीतीश कुमार को. क्या भाजपा उन्हें इस बार पूरी तरह ख़ारिज करने का मन बना चुकी है? संजय कहते हैं, “मुझे नहीं पता किस ने नीतीश कुमार को अपना चेहरा चुना है. हालांकि नए पोस्टरों में ऐसा ज़रूर दिख रहा है. वो किसने लगाया, नहीं लगाया, इस पर हम कोई बात नहीं कहेंगे. लेकिन सच यही है कि पिछले लोकसभा चुनाव में हमें वोट नरेंद्र मोदी के नाम पर मिले हैं. हमारे चेहरा नरेंद्र मोदी ही हैं और रहेंगे. “

जेडीयू का पहला नारा बना “अबकी बार नीतीश कुमार”, फिर बना “बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है.” और इस बार नया नारा है, “क्यों करें विचार, ठीके तो हैं नीतीश कुमार”.जब इस नारे को लेकर विपक्ष ने निशाना साधना शुरू किया तो एक और न्य नारा आ गया- ” क्यों करें विचार, जब हैं ही नीतीश कुमार”. गौरतलब है कि जेडीयू हर बार विधानसभा चुनाव के पहले एक नया नारा लेकर आती है जिसका चेहरा होते हैं नीतीश कुमार.इस बार भी चेहरा नीतीश कुमार ही हैं. लेकिन जदयू के लिए मुश्किल ये है कि सरकार में गठबंधन की सहयोगी पार्टी बीजेपी अब चेहरा बदलने की मांग कर रही है.

संजय के इस बयान को जदयू किस तरह देखती है और गठबंधन के भविष्य को लेकर पार्टी का क्या कहना है? जेडीयू के प्रवक्ता राजीव रंजन कहते हैं, “संजय पासवान के बयान की उनकी पार्टी में कोई अहमियत नहीं है. यह बीजेपी का आधिकारिक बयान नहीं है. और हमें पता है कि संजय पासवान का राजनीतिक रिकार्ड कैसा रहा है, वे कहां थे और अभी कहां हैं. ऐसा बयान देकर वे अपनी राजनीति चमकाना चाहते हैं. उसपर हम कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे.”जेडीयू के महासचिव केसी त्यागी कहते हैं- “अभी हम इसपर कोई प्रतिक्रिया देना ज़रूरी नहीं समझते. क्योंकि वो बीजेपी की तरफ़ से अधिकृत नहीं हैं और जैसा कि बीजेपी में होता चला आया है जब तक उनके शीर्ष नेतृत्व यानी अमित शाह और नरेंद्र मोदी की तरफ़ से कुछ नहीं कहा जाता, तबतक उसे आधिकारिक नहीं माना जा सकता. जहां तक बात संजय पासवान के बयान की है तो उन्होंने गठबंधन धर्म को तोड़ने का काम किया है. हमनें बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से मांग की है कि ऐसे ग़ैर-दोस्ताना बयान के लिए उनपर कार्रवाई की जाए. आज तक बीजेपी  के शीर्ष नेतृत्व को लेकर जेडीयू का एक कार्यकर्ता ऐसा कभी नहीं बोला.”

संजय पासवान के बयान को भले जदयू यह कहकर ख़ारिज कर दे कि ये उनका निजी बयान है, मगर विपक्ष को इससे नीतीश कुमार पर हमला करने का मौक़ा मिल गया है.पासवान का बयान आने के तुरंत बाद प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट किया और लिखा है कि ” क्या CM भाजपाईयों की बात का खंडन करने का माद्दा रखते है?”क्या यह सच नहीं है कि आदरणीय नीतीश जी ने मोदी जी के नाम पर वोट माँगकर अपना घोषणा पत्र जारी किए बिना ही BJP के घोषणा पत्र पर 16 MP बना लिए? क्या यह यथार्थ नहीं है कि हरेक बिल पर वो BJP का समर्थन कर रहे है? फिर वो अलग कैसे?

गौरतलब है कि बीते दिनों में बीजेपी और जेडीयू के नेताओं की तरफ़ से जिस तरह की बयानबाज़ी हुई है यह कहना बहुत मुश्किल हो गया है कि बिहार में भाजपा और जदयू का गठबंधन कब तक चलेगा? मगर एक बात तय है कि अगर संजय पासवान के बयान को बीजेपी अपना आधिकारिक बयान मान लेती है या फिर ऐसी ही चुप्पी साधे रखती है तो मान लेना चाहिए कि बीजेपी अब बिहार में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है.

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