By, Shrikant Pratyush
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बदल गए हैं तेजस्वी, शुरू कर दी है नए तेवर-बिंदास अंदाज में राजनीति

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21 अगस्त को तेजस्वी यादव ने बिहार की राजनीति में दोबारा वापसी की है तब से एक बार भी उन्होंने सीएम नीतीश कुमार के लिए आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग नहीं किया है. लोकसभा चुनाव के दौरान ‘पलटू चाचा और चाचा 420’ शब्द तो उनका तकिया कलाम हो गया था. हर सभा में सीएम नीतीश को आरजेडी से अलग होने के लिए कोसते रहते थे. वे अगर सवाल भी करते हैं तो आदरणीय नीतीश जी, माननीय नीतीश जी, मुख्यमंत्री नीतीश जी जैसे संबोधन करते हैं.

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बदल गए हैं तेजस्वी, शुरू कर दी है नए तेवर-बिंदास अंदाज में राजनीति

सिटी पोस्ट लाइव : तेजस्वी यादव  के तेवर बदल गए हैं. राजनीति का नदाज बदल गया है. विरोधियों पर हमले का तरीका बदल गया है. सिटी पोस्ट लाइव से खास बातचीत में आरजेडी के राष्ट्रिय महासचिव शिवानन्द तिवारी ने स्वीकार किया था कि विपक्ष के लिए नीतीश कुमार ही एकमात्र उम्मीद हैं. उनके खिलाफ तेजस्वी यादव को या फिर विपक्ष को आपतिजनक शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए. शिवानन्द तिवारी के इस विचार का असर अब तेजस्वी यादव के बयान पर भी दिखने लगा है. विपक्ष में होने के नाते वो सरकार पर हमले तो कर रहे हैं लेकिन आपत्तिजनक भाषा (Offensive language) का इस्तेमाल कर रहे हैं.

जब से सक्रिय राजनीति में तेजस्वी यादव दोबारा सक्रीय हुए हैं  तब से ही उनके तेवर बदले हुए हैं. वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमलावर हैं लेकिन वो उनके लिए आपतिजनक शब्दों का प्रयोग नहीं कर रहे हैं. पीएम मोदी (PM Modi) के प्रति जन-मानस के बदलते मिजाज और बदल रही राजनीति के बीच उन्होंने अपनी रणनीति (Strategy) भी बदल ली है.21 अगस्त को तेजस्वी यादव ने बिहार की राजनीति में दोबारा वापसी की है तब से एक बार भी उन्होंने सीएम नीतीश कुमार के लिए आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग नहीं किया है. वरना लोकसभा चुनाव के दौरान उनका कोई भी स्पीच उठाकर देख लें तो ‘पलटू चाचा और चाचा 420’ शब्द तो उनका तकिया कलाम हो गया था. हर सभा में सीएम नीतीश को आरजेडी से अलग होने के लिए कोसते रहते थे. वे अगर सवाल भी करते हैं तो आदरणीय नीतीश जी, माननीय नीतीश जी, मुख्यमंत्री नीतीश जी जैसे संबोधन करते हैं. जाहिर है अब वे राजनीतिक संभावनाओं को ऐसी भाषा का प्रयोग करने से बच रहे हैं.

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तेजस्वी यादव  अब पीएम मोदी पर भी सीधे निशाना नहीं साधते हैं. वे मुद्दों को जरूर उठा रहे हैं, लेकिन बचते-बचाते. धारा 370 के मुद्दे पर भी उन्होंने कुछ खास नहीं कहा. हालांकि इसे खत्म करने की प्रक्रिया पर सवाल जरूर उठाए. उन्होंने ट्रिपल तलाक कानून बनने के मसले पर भी ज्यादा कुछ नहीं बोला. इसमें भी खास बात ये रही कि पीएम मोदी को एक बार भी टारगेट नहीं किया.  जाहिर है तेजस्वी को अपने वोट बैंक (मुस्लिम वोट) की फिक्र तो है, लेकिन वे जनमानस के मिजाज को भी ताड़ गए हैं.

बीते 3 सितंबर को पटना में जब अति पिछड़ा प्रकोष्ठ की बैठक हुई तो तय किया गया कि पंचायत से लेकर प्रदेशस्तर तक अति-पिछड़ों को 60 फीसदी भागीदारी दी जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि नया बिहार बनाना है तो सभी अतिपिछड़ों को एकजुट होकर राष्ट्रीय जनता दल के झंडे के नीचे काम करना होगा. गौरतलब है कि पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी तेजस्वी यादव पर एक खास जाति (यादव जाति) के लोगों के बीच घिरे रहने का आरोप लगा चुके हैं. उन्होंने कहा था कि तेजस्वी यादव एक ही जाति के लोगों से घिरे रहते हैं और दूसरी जातियों के लोग उनका  मुंह ताकते रहते हैं लेकिन  लालू ऐसा नहीं करते थे. जाहिर है तेजस्वी यादव ने अपनी सियासी रणनीति भी बदल ली है.

तेजस्वी यादव के हाल के वक्तव्यों, उनके ट्वीट्स और अन्य संबोधनों पर नजर डालें तो आप साफ पता चलता है कि अब वो किसी पर व्यक्तिगत हमला करने से बच रहे हैं.. बीते दिनों मॉब लिंचिंग, बढ़ते अपराध और बिहार में बीजेपी-जेडीयू के बीच बढ़ रही तकरारके मुद्दे तो उन्होंने उठाए हैं, लेकिन संयमित भाषा का इस्तेमाल किया है. जाहिर है वे अब ऐसी परिस्थिति कतई नहीं लाना चाहते हैं जिससे उनकी निगेटिव इमेज बन जाए.

21 अगस्त को पटना वापसी के बाद 23 अगस्त को तेजस्वी यादव ने अपने निर्वाचन क्षेत्र राघोपुर का दौरा किया. इस क्षेत्र के लिए उन्होंने सदस्यता अभियान की शुरुआत की.उन्होंने  कहा कि 50 लाख लोगों को पार्टी का सदस्य बनाने का टारगेट है. उन्होंने यह भी बताया कि पर्ची से सदस्य बनाने के साथ ही पार्टी ऑनलाइन सदस्यता अभियान भी चला रही है और युवाओं को जोड़ने पर जोर दे रही है. जाहिर है तेजस्वी यादव अब अपनी उस रणनीति पर चल रहे हैं जिसमें आरजेडी को एक बार फिर खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं, वह भी जमीनी स्तर पर.

लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद पहली बार बिहार महागठबंधन की बैठक पटना में 27 अगस्त को हुई. पूर्व मुख्‍यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर आयोजित इस बैठक में बिहार महागठबंधन में शामिल सभी दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे. खास बात ये रही की तेजस्वी को अनुभवहीन बताने वाले जीतन राम मांझी भी साथ दिखे.  इसमें कई ज्‍वलंत मुद्दों पर विमर्श हुआ और साथ-साथ चलने की बात हुई. जाहिर है तेजस्वी की वापसी के बाद महागठबंधन दलों का फिर एक मंच पर आना ही तेजस्वी की उपलब्धि मानी जा रही है.महागठबंधन के नेताओं का मनोबल बढ़ा है .

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