By, Shrikant Pratyush
News 24X7 Hour

सीएम नीतीश कुमार पहुंचे मुजफ्फरपुर,लोगों ने लगाए नारे,कहा-वापस जाओ

- sponsored -

0

बिहार के सीएम नीतीश कुमार उन मासुमों का हाल जानने 17 दिन बाद मुजफ्फरपुर पहुंचे जो इन्सेफेलाईटिस से जूझ रहे हैं.उन्हें जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा है.लोग आक्रोशित हैं. एईएस से 130 से अधिक बच्चों की मौत के बाद अस्पताल पहुंचे नीतीश के विरोध में लोगों ने नारेबाजी की और नीतीश कुमार वापस जाओ के नारे भी लगाए.

Below Featured Image

-sponsored-

सीएम नीतीश कुमार पहुंचे मुजफ्फरपुर,लोगों ने लगाए नारे,कहा–वापस जाओ

सिटी पोस्ट लाइव- बिहार के सीएम नीतीश कुमार उन मासुमों का हाल जानने 17 दिन बाद मुजफ्फरपुर पहुंचे जो इन्सेफेलाईटिस से जूझ रहे हैं. यहाँ उन्हें जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा है. लोग आक्रोशित हैं. एईएस से 130 से अधिक बच्चों की मौत के बाद अस्पताल पहुंचे नीतीश के विरोध में लोगों ने नारेबाजी की और नीतीश कुमार वापस जाओ के नारे भी लगाए. लोगों का साफ़ कहना है कि इतने बच्चों के मरने के बाद सीएम नीतीश कुमार की आज आँख खुली है. सूबे के मुखिया इतने दिनों से क्या कर रहे थें. क्या उनका दायित्व नहीं बनता है कि यहाँ की व्यवस्था के बारे में अस्पताल में आकर जायजा लें. इन सारी बातों को लेकर  सीएम नीतीश कुमार का जमकर लोग विरोध कर रहे हैं.

बता दें कि बच्चों की मौत के सत्रह दिन बाद मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी मंगलवार को यहां स्थिति का जायजा लेने पहुंचे हैं. सीएम नीतीश मुजफ्फरपुर के SKMCH अस्‍पताल पहुंचकर मृत बच्‍चों के माता-पिता से मिल रहे हैं और इंसेफेलाइटिस पीड़ित बच्‍चों का भी हालचाल पूछ रहे हैं. हालांकि सीएम के दौरे को लेकर पहले से ही विरोध की आशंका थी जिसको लेकर SKMCH अस्पताल में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे बावजूद इसके लोगों ने परिसर के बाहर जमकर नारेबाजी की. सूबे के मुखिया नीतीश कुमार को अस्पताल आने के दौरान कई बीमार बच्चों को भी प्रवेश से रोका गया जिससे उनका आक्रोश और  बढ़ गया. लोग सीएम के देर से आने के साथ-साथ अस्पताल में सुविधाओं के अभाव को लेकर भी खासे नाराज हैं और अस्पताल में कुव्यवस्था होने की बात कह रहे हैं.

Also Read

-sponsored-

सीएम के आगमन को लेकर पूरे अस्पताल परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है. बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बल और बिहार पुलिस के जवान लगाए गए हैं. आपको बता दें कि इस बुखार से पीड़ीत- पीड़ितों का हाल जानने के लिए बिहार के स्वास्थ्य मंत्री भी 14 दिन बाद अस्पताल गये थें. जिससे सरकार पर कई सवाल खड़े हो गये हैं. लेकिन जिस प्रकार से इन मासूमों के मामले में सरकार ने निष्क्रियता दिखाई है वह कहीं न कहीं हमें सोंचने पर मजबूर करता है. इस प्रकार के सवाल उठना भी लाजमी है कि क्या हमलोग एक ऐसी सरकार को चुनकर भेजते हैं जो संवेदनहीन है. मौतों के बाद भी बच्चों का हाल लेने नहीं पहुँचती है.                                                       जे.पी.चंद्रा की रिपोर्ट

-sponsered-

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

-sponsored-

Leave A Reply

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More