By, Shrikant Pratyush
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सीएम नीतीश कुमार से मिले हैं प्रशांत किशोर, दो घंटे तक चली है मुलाकात

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अपने बयानों की वजह से अपनी हीं पार्टी के नेताओं का निशाना बने जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने बिहार के सीएम सह जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार से मुलाकात की है और खबर है कि इन दोनों नेताओं की मुलाकात लंबी चली है तकरीबन दो घंटे तक प्रशांत किशोर और नीतीश कुमार की मुलाकात हुई है।

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सीएम नीतीश कुमार से मिले हैं प्रशांत किशोर, दो घंटे तक चली है मुलाकात

सिटी पोस्ट लाइवः अपने बयानों की वजह से अपनी हीं पार्टी के नेताओं का निशाना बने जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने बिहार के सीएम सह जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार से मुलाकात की है और खबर है कि इन दोनों नेताओं की मुलाकात लंबी चली है तकरीबन दो घंटे तक प्रशांत किशोर और नीतीश कुमार की मुलाकात हुई है। आपको बता दें कि ‘पीके’ के कुछ बयानों से पार्टी के कुछ नेता उनसे बेहद नाराज हैं और लगातार उनपर हमलावर हैं और खासकर आरसीपी सिंह और नीरज कुमार जैसे नेता जिनके बारे मेें यह माना जाता रहा है कि बिना नीतीश कुमार की मर्जी के कुछ भी नहीं बोलते इस लिहाज से यह माना जा सकता है कि सीएम नीतीश कुमार भी ‘पीके’ से नाराज हों और वे उनकी नाराजगी दूर करने पहुंचे हो। हांलाकि जिस तरह से प्रशांत किशोर के बयान के बाद पार्टी के कुछ नेताओं तल्ख तेवर अपनाया उससे साफ है कि ‘पीके’ को लेकर उनके मन में पहले से हीं कोई तल्खी रही है और यह तल्खी बयानों के बाद इजहार का बहाना बनी हो। यानि संभव है कि ‘पीके’ को लेकर जेडीयू नेताओं के मन में पहले से जो तल्खी रही है इस बयान ने सीधा हमला का मौका जेडीयू के उन नेताओं को दे दिया जो उनसे पहले से खार खाये बैठे थे।

प्रशांत किशोर ने पहले यह बयान दिया कि उन्होंने पीएम और सीएम बनाने में मदद की है और अब युवाओं को सांसद-विधायक, सरपंच और मुखिया बनाएंगे। इस बयान को ‘पीके’ का बड़बोलापन समझा गया और उन पर हमले शुरू हो गये जबकि प्रशांत किशोर ने युवाओं को संभवत यह बताने की कोशिश की बतौर रणनीतिकार पीएम-और सीएम बनाने में उनकी भूमिका रही है और चूकी युवाओं को राजनीति में लाने का टास्क उनको मिला है तो अपनी इसी भूमिका को निभाते हुए अपना टास्क पूरा करेंगे और युवाओं के वाजिब संघर्ष को राजनीति में उनकी हिस्सेदारी का इनाम मिलेगा लेकिन ‘पीके’ के इस बयान पर जेडीयू नाराज हुआ और बेहद नाराज हुआ। उसके बाद प्रशांत किशोर ने एक इंटरव्यू में यह बयान दे दिया कि नीतीश कुमार ने जब महागठबंधन छोड़ा तो उन्हें बीजेपी के साथ न जाकर चुनाव में जाना चाहिए था और ताजा जनादेश लेना चाहिए था। इस बयान के बाद तो प्रशांत किशोर को लेकर पार्टी में पहले से जो कथित गुटबाजी रही है वो चरम पर आ गया और कह सकते हैं कि ‘पीके’ से खार खाए नेताओं को मौका मिल गया। आरसीपी सिंह ने बयान दिया और नीरज कुमार तो बिल्कुल हमलावर रहे।

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जाहिर है प्रशांत किशोर को भी यह समझ आ गया कि अपने बयान से उन्होंने पार्टी में अपनी स्वीकार्यता पर ग्रहण लगा लिया है और उन नेताओं को हमले करने का मौका दे दिया है जो उनके कद को छोटा करना चाहते हैं या फिर चाहते हैं कि पार्टी में उनकी भूमिका सीमित रहे। जाहिर है प्रशांत किशोर सीएम नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे हैं और कोशिश उनकी नाराजगी दूर करने की की होगी। अगर इस मुलाकात के बाद भी प्रशांत किशोर पर जेडीयू नेताओं का हमला जारी रहता है तो तय मानिए कि नीतीश कुमार भी नाराज हैं और हमला उनके इशारे पर हीं हो रहा है हांलाकि प्रशांत किशोर के जिस बयान के बाद बवाल मचा है वो बयान एक बार पहले भी दे चुके हैं। आईआईटी के एक कार्यक्रम में प्रशांत किशोर पहले भी कह चुके हैं कि नीतीश कुमार को दुबारा जनादेश लेना चाहिए था। जाहिर है पहले बवाल नहीं हुआ और अब इतना बवाल कुछ तो इशारा करता है।

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