By, Shrikant Pratyush
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कन्हैया कुमार को लेकर महागठबंधन में घमाशान, कांग्रेस किसका दे रही है साथ.

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कन्हैया कुमार को लेकर महागठबंधन में घमाशान, कांग्रेस किसका दे रही है साथ.

सिटी पोस्ट लाइव : महागठबंधन में कन्हैया कुमार को लेकर घमाशान मच गया है. कांग्रेस पार्टी कन्हैया कुमार के हर कार्यक्रमों में भाग ले रही है और पप्पू यादव जैसे नेता कन्हैया कुमार को तेजस्वी यादव से बड़ा नेता बता रहे हैं.RJD को कन्हैया कुमार के पक्ष में यह गोलबंदी RJD को रास नहीं आ रहा. लालू यादव की बड़ी बेटी मिसा भारती ने कन्हैया कुमार को तेजस्वी यादव से बड़ा नेता बताये जाने पर कड़ा एतराज जताया है. RJD नेता शिवानन्द तिवारी का कहना है कि तेजस्वी विकल्प के रूप में तैयार हुए नेता हैं. बिहार में नीतीश कुमार के विकल्प के रूप में तेजस्वी चेहरे हो सकते है. कन्हैया अच्छा बोलते है पर विकल्प का चेहरा नहीं हो सकते.

दरअसल, बिहार में इन दिनों महागठबंधन (Grand Alliance) के भीतर कई मोर्चो पर घमसान मचा हुआ है. एक तरफ मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर आपस मे तकरार जारी है तो दूसरी तरफ कोर्डिनेशन कमिटी बनाने को लेकर पार्टियां एक दूसरे पर हमलावर हैं. आरजेडी (RJD) ने पहले से ही तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) को गठबंधन के नेता घोषित कर रखा है. इन सबके बीच सीपीआई नेता कन्हैया कुमार (CPI leader Kanhaiya Kumar) की बिहार में हो रही ताबड़तोड़ जनसभाओं  में कांग्रेस की मौजूदगी को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं.

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दरअसल कन्हैया की हर सभा में कांग्रेस नेता न सिर्फ शामिल हो रहे हैं बल्कि सभाओं को सफल बनाने के लिए भीड़ जुटाने में भी लगे हैं. कांग्रेस नेता शकील अहमद खान कन्हैया की हर सभा में मौजूद रहे हैं. कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा का कहना है कि NRC और NPR के मुद्दे पर कांग्रेस का स्टैंड साफ है. इसका हर मोर्चे पर विरोध करना है और इस मुद्दे पर कांग्रेस कन्हैया के साथ है. कांग्रेस नेता ने यह भी साफ किया कि कन्हैया आगामी 27 फरवरी को पटना के गांधी मैदान में बड़ी रैली करने वाले हैं और इसमें कांग्रेस बढ़-चढ़कर हिस्सा लेगी.

कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा ने रैली के समर्थन करते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओ को किसी सभा मे जाने से किसी को रोका नहीं गया है. कन्हैया की रैली का कांग्रेस को निमंत्रण भी मिला है.हालांकि तेजस्वी के मुकाबले कन्हैया को खड़ा करने की बात से मुकरते हुए मदन मोहन झा ने कहा कि किसी को काउंटर के लिए किसी की मदद नहीं कर रहे. कन्हैया NRC के विरोध में सभा कर रहे इसलिए शामिल हो रहे हैं.

बहरहाल जानकार ये भी बताते हैं कि कांग्रेस ने इसबार लोकसभा से सीख लेते हुए विधानसभा से पहले मोहरे चलने शुरू कर दिये हैं. पिछली बार लोकसभा में सीट बंटवारे में कांग्रेस को फजीहत उठानी पड़ी थी.11 सीट पर बात हो जाने के बाद भी 9 सीटों पर ही समझौता करना पड़ा था जिसके कारण पार्टी के अंदर ही बगावत शुरू हो गए थे. जाहिर है सीट बंटवारे से पहले कांग्रेस तेजस्वी के चेहरे के बहाने दबाव बनाना चाहती है ताकि सीट बंटवारे में ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल कर सके.

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