By, Shrikant Pratyush
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कांग्रेस ने कुशवाहा को महागठबंधन में शामिल होने का फिर भेजा बुलावा, लेकिन रख दी शर्त

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कांग्रेस की ओर से एकबार फिर रालोसपा के सुप्रीमो उपेन्द्र कुशवाहा को महागठबंधन में आने का प्रस्ताव मिला है. लेकिन इस प्रस्ताव के साथ बिहार कांग्रेस ने कुशवाहा के सामने बड़ी शर्त रख दी है. कांग्रेस का कहना है कि महागठबंधन में आने पर कुशवाहा का स्वागत है, लेकिन उन्हें मालूम होना चाहिए कि महागठबंधन की ओर से बिहार में मुख्यमंत्री पद की कोई वैकेंसी नहीं है.

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कांग्रेस ने कुशवाहा को महागठबंधन में शामिल होने का फिर भेजा बुलावा, लेकिन रख दी शर्त

सिटी पोस्ट लाइव : कांग्रेस की ओर से एकबार फिर रालोसपा के सुप्रीमो उपेन्द्र कुशवाहा को महागठबंधन में आने का प्रस्ताव मिला है. लेकिन इस प्रस्ताव के साथ बिहार कांग्रेस ने कुशवाहा के सामने बड़ी शर्त रख दी है. कांग्रेस का कहना है कि महागठबंधन में आने पर कुशवाहा का स्वागत है, लेकिन उन्हें मालूम होना चाहिए कि महागठबंधन की ओर से बिहार में मुख्यमंत्री पद की कोई वैकेंसी नहीं है. कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष कौकब कादरी ने गुरुवार को सासाराम में कहा कि अगर उपेंद्र कुशवाहा एनडीए के द्वंद से निकल कर महागठबंधन में आते हैं, तो उनका स्वागत है. लेकिन उन्हें हमारे यहां सहयोगी के रूप में काम करना होगा. क्योंकि आरजेडी बिहार में महागठबंधन का मजबूत स्तंभ है. ऐसे में कुशवाहा को सीएम पद के लिए सवाल नहीं उठाना चाहिए.

बता दें पिछले कुछ महीनों से रालोसपा एनडीए से खासा नाराज चल रही है. जिसका सबसे बड़ा कारण है बिहार के मुख्यमंत्री  नीतीश कुमार. सीटों के बंटवारे को लेकर जहां जंग है वहीं उपेन्द्र कुशवाहा को अगला मुख्यमंत्री बनाने की भी तैयारी रालोसपा पार्टी की है. ये बात तब ही साफ़ हो गई थी जब पार्टी ने लोकसभा की सभी सीटों पर चुनाव की तैयारी शुरू करने का ऐलान कर दिया था. जिससे ये साफ़ हो गया था कि कुशवाहा अपना रथ विधानसभा के लिए तैयार कर रहे हैं. इस बीच नीतीश कुमार से अंदरूनी खटपट नीच वाले बयान ने साफ़ जाहिर कर दिया. फिर क्या था सियासत गर्म हो गई.

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वहीँ कांग्रेस पहले भी कुशवाहा को अपनी पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव पेश कर चुकी है. लेकिन इस बार प्रस्ताव के साथ शर्त भी दी गई है. कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष कौकब कादरी ने कहा कि जिस प्रकार से उपेंद्र कुशवाहा को बीजेपी और नीतीश कुमार प्रताड़ित कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें जल्द से जल्द NDA छोड़ने का निर्णय लेना चाहिए. कौकब कादरी की माने तो कांग्रेस के पास आने के बाद ही कुशवाहा के लिए कुछ किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि NDA छोड़ कर आने पर कुशवाहा की हमारे यहां सहयोगी की भूमिका होगी. कादरी ने अपील की है कि रालोसपा के लोग उनके साथ आए और सब मिलकर भाजपा और नीतीश को निपटा दें.

गौरतलब है गुरुवार को मोतिहारी में पार्टी के खुल्ला अधिवेशन में उपेन्द्र कुशवाहा अपना फैसला सुनाने वाले थे. उनकी पार्टी से लेकर प्रदेश से लेकर देश के नेताओं की नजर उपेन्द्र कुशवाहा पर टिकी थी. उपेन्द्र कुशवाहा NDA छोड़ने का और महागठबंधन में जाने का एलान करेगें या नहीं, सबकी नजर इसी बात पर टिकी थी. कयास लगाए जा रहे थे कि कुशवाहा महागठबंधन में जाने का ऐलान करेंगे. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं कुछ नहीं किया. लेकिन सीधे अपना फैसला सुनाने की बजाय सबसे पहले उपेन्द्र कुशवाहा ने केंद्र की बीजेपी सरकार और बिहार सरकार पर जमकर निशाना साधा. बल्कि अब NDA को छोड़ने का फैसला राहुल गाँधी  से मिलने के बाद ही लेंगे. उन्हें पता है कि nda से नाता तोड़ने के साथ कई नेता उनसे नाता तोड़ देंगे. वहीं मन के मुताबिक लोकसभा की सीटें भी नहीं मिली तो पार्टी में किरकिरी अलग से होगी. इसलिए कुशवाहा फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं.

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