By, Shrikant Pratyush
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कांग्रेस का इंदिरा प्लान, इंदिरा के साथ प्रियंका की तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल

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1977 में कांग्रेस पार्टी सत्ता से बाहर थी और तब बिहार के बेलची गांव में 11 दलितों के नरसंहार के बाद इंदिरा गांधी पीड़ितों से मिलने पहुंची थीं. वह दौरा काफी मुश्किलों से भरा था. तब बाढ़ आई थी पर उसकी परवाह किए बगैर इंदिरा गांधी हाथी पर सवार होकर पीड़ितों से मिलने पहुंची थीं.

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कांग्रेस का इंदिरा प्लान, इंदिरा के साथ प्रियंका की तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल

सिटी पोस्ट लाइव :   लोकसभा चुनाव में हार के बाद से ही कांग्रेस पार्टी गहरे निराशा और हताशा के भंवर में फंसी है. लेकिन अचानक प्रियंका गांधी बहुत सक्रीय हो गई हैं.ऐसा लगता है कि जनता का भरोसा फिर से जीतकर प्रियंका कांग्रेस पार्टी की कमान अपने हाथों में लेना चाहती हैं.प्रियंका सोनभद्र नरसंहार पीड़ितों से मिलने पहुँच गयीं.प्रियंका के सोनभद्र दौरे की खबर के साथ सोशल मीडिया पर एक तस्वीर खूब वायरल हो रही है.यह तस्वीर प्रियंका की नहीं, बल्कि उनकी दादी इंदिरा की बिहार के बेलची दौरे की है.42 साल पहले 11 दलितों के नरसंहार के बाद इंदिरा गांधी पीड़ितों से मिलने गई थीं.कांग्रेस नेता और उनके समर्थक इंदिरा गांधी की इस तस्वीर को जमकर शेयर कर रहे हैं.

दरअसल,प्रियंका और इंदिरा की तस्वीर में एक चीज बड़ी कॉमन है, जो कांग्रेसियों में एक उम्मीद बांध रही है. लोकसभा चुनाव में करारी हार और राहुल के इस्तीफे के बाद कांग्रेस 42 साल पुराने हताशा के पलों से गुजर रही है. तब इमर्जेंसी के बाद जनता पार्टी की आंधी ने इंदिरा को सत्ता से उखाड़ फेंका था और कांग्रेस 154 सीटों पर जा सिमटी थी. इंदिरा अपनी सीट तक नहीं बचाई पाई थीं. बेलची दौरे के बाद इंदिरा कांग्रेस को दोबारा खड़ा करने में कामयाब रही थीं. प्रियंका के तेवरों से भी कांग्रेसियों को इस चमत्कार की उम्मीद दिख रही है.

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1977 में कांग्रेस पार्टी सत्ता से बाहर थी और तब बिहार के बेलची गांव में 11 दलितों के नरसंहार के बाद इंदिरा गांधी पीड़ितों से मिलने पहुंची थीं. वह दौरा काफी मुश्किलों से भरा था. तब बाढ़ आई थी पर उसकी परवाह किए बगैर इंदिरा गांधी हाथी पर सवार होकर पीड़ितों से मिलने पहुंची थीं. ठीक उसी तर्ज पर  सोनभद्र में 10 लोगों के नरसंहार की खबर आई तो कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी पीड़ित परिवारों से मुलाकात करने पहुँच गईं  वाराणसी से मिर्जापुर पहुंचते ही शुक्रवार को उन्हें धारा 144 की बात बताते हुए प्रशासन ने सोनभद्र जाने से रोक दिया. 24 घंटे तक वह मिर्जापुर के चुनार गेस्ट हाउस पर डटी रहीं. रातभर उनके साथ बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का जमावड़ा रहा. कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, बड़े नेताओं और प्रवक्ता समेत देशभर के कार्यकर्ताओं ने एकजुटता जाहिर की. कई शहरों में सरकार और प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए.

सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त सपोर्ट मिला. उनकी तस्वीर को इंदिरा गांधी की तस्वीर के साथ शेयर किया जा रहा है. एक तस्वीर में जमीन पर इंदिरा गांधी बैठी दिखती हैं तो दूसरी तस्वीर प्रियंका की है जो पीड़ितों से मिलने की मांग के लिए उनके धरने पर बैठी हैं.प्रियंका के इस राजनीतिक सक्रियता से कांग्रेस समर्थकों में एक नयी जान आ गई है.कांग्रेसियों को उम्मीद है कि  जिस तरह से इंदिरा गांधी बेलची की यात्रा के बाद फिर से सत्ता में लौटी थीं उसी तरह से सोनभद्र की उनकी यात्रा उनके सत्ता में लौटने का मार्ग प्रशस्त करेगी.

सोनभद्र की यात्रा से भले कांग्रेस का अभी सत्ता में वापसी का रास्ता प्रशस्त न हो लेकिन प्रियंका के कांग्रेस के राष्ट्रिय अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुँचने का रास्ता जरुर साफ़ करेगा. कांग्रेसी अब प्रियंका की तरफ बड़ी उम्मीद के साथ देख रहे हैं और उन्हें राहुल गांधी की जगह कांग्रेस की बागडोर सौंपने की मांग भी शुरू हो चुकी है.

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