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निकाय चुनाव के लिए 29 दिसंबर है लक्ष्मण रेखा.

लेकिन सरकार आरक्षण को लेकर क्या कर रही, नहीं मिल रही जानकारी, चल रहा है अभी मंथन.

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सिटी पोस्ट लाइव : नगर निकाय चुनाव को लेकर बिहार सरकार की मुश्किल बढ़ गई है. आरक्षण पर पटना हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब बिहार सरकार सर्वोच्च न्यायालय जाने की तैयारी में है. जबकि चुनाव आयोग नए नोटिफिकेशन की तैयारी में जुटा है. निकाय चुनाव की पूरी पक्रिया दिसंबर तक पूरी तरह से संपन्न कराना है, ऐसे में बीच का रास्ता निकालने पर मंथन चल रहा है.साल 2017 में पहले चरण का निकाय चुनाव 21 मई जबकि दूसरे चरण का 4 जून को कराया गया था.29 जून से पहले प्रक्रिया पूरी हो गई थी. अब चुनाव को लेकर निर्धारित समय से काफी विलंब हो रहा है. ऐसे में 29 दिसंबर 2022 तक हर हाल में नगर निकाय का चुनाव संपन्न करा लेना है.

अगर चुनाव समय से नहीं कराया गया तो सरकार के लिए मुश्किल होगी. पटना हाई कोर्ट ने आरक्षण के मामले को लेकर सुनवाई के दौरान आयोग से कहा है कि चुनाव समय से कराना है. साथ ही आरक्षण के मुद्दे में भी जो सर्वोच्च न्यायालय का फैसला है, उसका पूरी तरह से पालन भी करना है.पटना हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील शशि भूषण कुमार मंगलम का कहना है कि उन्होंने आरक्षण के मामले में याचिकाकर्ता की तरफ से न्यायालय को अवगत कराया था कि बिहार में निकाय चुनाव में आरक्षण के मुद्दे को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की अनदेखी की जा रही है. ऐसे आधार पर ही हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया, जिसके बाद कोर्ट ने चुनाव को स्थगित कर दिया। अब चुनाव को लेकर फिर से तैयारी की जा रही है.

बिहार में निकाय चुनाव को लेकर नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया, चुनाव की डेट निश्चित हो गई. मतदान की डेट फाइनल होते ही प्रत्याशी चुनाव मैदान में पूरी से सक्रिय हो गए. लाखों रुपए के प्रचार प्रसार सामग्री के साथ पूरी तैयारी में लगे हैं. चुनाव को लेकर तैयारी की जा रही है. फिर से नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा. लेकिन सरकार आरक्षण के मुद्दे को लेकर क्या कर रही है, इसकी कोई जानकारी नहीं मिल रही है. फिलहाल सरकार ने कहा है कि वह पटना हाई कोर्ट के फैसले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय जाएगी.

आरक्षण का मुद्दा लेकर कुछ प्रत्याशी सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गए और वहां से मामला पटना हाईकोर्ट आ गया. पटना हाईकोर्ट में एक साथ कई लोगों ने याचिका लगाई और आरक्षण के मामले को आधार बनाते हुए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के आधार पर चुनाव कराने की मांग की. पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए इस मामले में फैसला सुनाया, फैसले में चुनाव को स्थगित करते हुए आरक्षण के मामले को लेकर निर्देश दिया गया.

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