By, Shrikant Pratyush
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देशरत्न को भूल गया देश, उन्हें सम्मान दिलाने के लिए परिजन करेंगे आंदोलन

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देश के नेता देश के वैसे महापुरुषों को भूल चुके हैं जिनकी जाति चुनाव में कोई ख़ास मायने नहीं रखती. यानी जिस महापुरुष के नाम पर उसकी जाती का वोट नहीं मिलता है.

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देशरत्न को भूल गया देश, उन्हें सम्मान दिलाने के लिए परिजन करेगें आंदोलन

सिटी पोस्ट लाइव : देश के नेता देश के वैसे महापुरुषों को भूल चुके हैं जिनकी जाति चुनाव में कोई ख़ास मायने नहीं रखती. यानी जिस महापुरुष के नाम पर उसकी जाती का वोट नहीं मिलता है, नेता उसे याद करना या फिर उसे सामान देना जरुरी नहीं समझते. ऐसे ही एक देश के महापुरुष हैं अपने संविधान निर्माता और देश के प्रथम राष्ट्रपति (First president)  डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद. आज सरकारें और राजनीतिक दल के नेता उन्हें भुला चुके हैं.अब राजेंद्र प्रसाद को उचित सम्मान दिलाने के लिए उनके परिजनों को आंदोलन का सहारा लेना पड़ रहा है.देशरत्न डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद (Dr Rajendra Prasad) को उचित सम्मान दिलवाने के लिए अब उनके परिजनों ने सड़क पर उतरने की तैयारी कर ली है.

देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद का परिवार उनकी पहचान को अमिट रखने के लिए आंदोलन करने की बात कह रहा है.डॉ राजेंद्र प्रसाद की पोती तारा सिन्हा ने कहा कि देश के पहले राष्ट्रपति के नाम अब तक न तो एक भी राष्ट्रीय दिवस घोषित किया गया है और न ही कोई राष्ट्रीय कार्यक्रम तक ही किया जाता है. तारा सिन्हा ने कहा कि तीन दिसंबर को उनकी जयंती मनाई जाती है और इस दिन को हमलोगों ने मेधा दिवस के रूप में मनाए जाने की मांग की थी और इसके लिए केंद्र सरकार को चिट्ठी भी लिखी थी. उन्होंने बताया कि इसके जवाब में केंद्र सरकार के Ministry of culture ने जो पत्र भेजा है उसके तहत 2034 में राजेंद्र प्रसाद की 150 वीं जयंती से पहले कोई कार्यकम तय नहीं है.

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केंद्र सरकार की इस बेरूखी को परिवार ने देश के पहले राष्ट्रपति का अपमान करार दिया और आज तक उन्हें उचित सम्मान नहीं दिए जाने का आरोप लगाया. तारा सिन्हा का आरोप है कि एक बेहतर समाधि तक उनके नाम नहीं है. इतना ही नहीं अब इतिहास बदलने की भी कोशिश हो रही है.परिजनों का आरोप है कि जब सरकार कांग्रेस की थी तब भी देशरत्न के साथ अच्छा सलूक नहीं किया गया और जब आज जब बीजेपी की है, तब भी मरणोपरांत उन्हें सम्मान नहीं मिल रहा है. परिवारवालों का कहना है कि राजेंद्र प्रसाद की स्मृतियां उनके संग्रहालय में हैं जो आज भी उनकी कार्य कुशलता और प्रतिभा का प्रमाण देती हैं. जो दक्षता उनमें थी उनका दुनिया लोहा मान चुका है.

बहरहाल वशिष्ठ नारायण सिंह की कथित उपेक्षा पर घिरी बिहार सरकार के बाद डॉ राजेंद्र प्रसाद का परिवार अगर आंदोलन के लिए सड़क पर उतरता है तो अपनी धरोहरों, प्रतिभाओं और महापुरुषों की कद्र करने और सम्मान देने का दावा करने वाली  सरकारें और महापुरुषों को सम्मान देने का ढोंग करनेवाले नेता ही बेनकाब होगें.

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