By, Shrikant Pratyush
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जार्ज फर्नांडिस: सादगी के आड़े कभी नहीं आया प्रोटोकाॅल, खुद धोए कपड़े, 24 घंटे किया काम

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समता पार्टी के संस्थापक और भारत के पूर्व रक्षा मंत्री जार्ज फर्नाडीस का निधन हो गया। आज सुबह जैसे हीं उनके निधन की खबर आयी पूरा राजनीति जगत शोक में डूब गया। लंबे वक्त से बीमार चल रहे जार्ज फर्नाडीस के निधन के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दुख जताया। बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने उनके निधन को अपनी व्यक्तिगत क्षति बताया। जार्ज फर्नाडीस का राजनीति जीवन बेहद सादगी भरा रहा है।

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जार्ज फर्नांडिस: सादगी के आड़े कभी नहीं आया प्रोटोकाॅल, खुद धोए कपड़े, 24 घंटे किया काम

सिटी पोस्ट लाइवः समता पार्टी के संस्थापक और भारत के पूर्व रक्षा मंत्री जार्ज फर्नाडीस का निधन हो गया। आज सुबह जैसे हीं उनके निधन की खबर आयी पूरा राजनीति जगत शोक में डूब गया। लंबे वक्त से बीमार चल रहे जार्ज फर्नाडीस के निधन के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दुख जताया। बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने उनके निधन को अपनी व्यक्तिगत क्षति बताया। जार्ज फर्नाडीस का राजनीति जीवन बेहद सादगी भरा रहा है। उनके बारे में कई बातें मशहूर रही हैं, उनकी राजनीतिक जीवन की किताब के ज्यादातर पन्नों पर उनकी सादगी की कहानियां दर्ज हैं। चार जोड़ी कुर्ता पायजामा में अपने राजनीतिक जीवन का सफर तय करने वाले जार्ज फर्नाडीस ने कभी प्रोटोकाॅल को अपनी सादगी के आड़े नहीं दिया और जब प्रोटोकाॅल सादगी के आड़े आती तो जार्ज फर्नाडीस ने उसे बार-बार तोड़ा। उनकी सादगी के दोस्त और दुश्मन सब कायल रहे है इसलिए चाहे वो उनके राजनीतिक दोस्त हो या राजनीतिक दुश्मन हो उनके बीच वे जार्ज साहब के नाम से हीं मशहूर रहे।

उनके बारे में यह किस्सा भी बड़ा आम है कि जार्ज साहब कभी अकेले खाना नहीं खाते थे चाहे वो दो लोगों के बीच हों या फिर 200 लोगों के साथ. वो सभी को साथ लेकर ही खाना खाते थे. उन्होंने बताया कि मंत्री रहते हुए भी जार्ज साहब फ्लाइट की बजाए रेल की यात्रा को तव्वजो देते थे और अपने सारे काम खुद करते थे. उनके पास जो बैग होता था उसमें दो-चार जोड़ी कुर्ता-पायजामा हुआ करता था जिसे वो बारी-बारी से धोकर पहनते थे. जब महाराष्ट्र के लातुर में प्राकृतिक आपदा आई थी तो जार्ज साहब ने बिना आराम किए लगातार 24 घंटे तक काम किया था. वो हमेशा से लोगों को जोड़न में विश्वास रखते थे और प्रोटोकॉल जैसे शब्दों को कभी नहीं मानते थे.

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