By, Shrikant Pratyush
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जाप कार्यकर्ताओं का दूसरे दिन भी भूख हड़ताल जारी, 5 सूत्री मांगों को लेकर अड़े रहे

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जन अधिकार पार्टी के कार्यकर्ताओं का 5 सूत्री मांगों को लेकर 48 घंटे का भूख हड़ताल जारी है. इसी क्रम में जाप कार्यकर्ताओं ने शहर के गेवाल बिगहा मोहल्ला स्थित पार्टी कार्यालय के समीप दूसरे दिन भी भूख हड़ताल जारी रखा. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की.

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सिटी पोस्ट लाइव: जन अधिकार पार्टी के कार्यकर्ताओं का 5 सूत्री मांगों को लेकर 48 घंटे का भूख हड़ताल जारी है. इसी क्रम में जाप कार्यकर्ताओं ने शहर के गेवाल बिगहा मोहल्ला स्थित पार्टी कार्यालय के समीप दूसरे दिन भी भूख हड़ताल जारी रखा. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की. कार्यक्रम में शामिल जन अधिकार पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजीव कुमार कन्हैया ने कहा कि, पूरे देश में लगातार महंगाई बढ़ रही है. आम लोगों का हाल बेहाल है. फिर भी सरकार मूकदर्शक बनी हुई है.

जन अधिकार पार्टी के कार्यकर्ता लगातार जनता की मांगों को सरकार के समक्ष रखने का काम कर रहे हैं. लेकिन, गूंगी-बहरी सरकार कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है. उन्होंने कहा कि, बड़े ही दुख का विषय है कि जिन नेताओं ने चुनाव के समय जनता से जो वादा किया था, वे उसे पूरा नहीं कर पाए और उन वादों को भूल गए. आज पूरा उत्तर बिहार बाढ़ की चपेट में है. लोगों के समक्ष रहने और खाने की समस्या उत्पन्न हो गई है. हम सरकार से मांग करते हैं वैसे जरूरतमंद लोगों को हरसंभव मदद पहुंचाई जाए.

साथ ही मांग की कि, सरकार महंगाई पर रोक लगाए. सरकारी संस्थानों का निजीकरण रोका जाए. साथ ही जनता के सेवक राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव को अविलंब रिहा किया जाए. अगर सरकार हमारी मांगों को पूरा नहीं करती है तो मजबूरन पूरे बिहार में सड़कों पर उग्र आंदोलन किया जाएगा. वहीं, जन अधिकार पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष टीका खान ने कहा कि पूरे बिहार में 5 सूत्री मांगों को लेकर कार्यकर्ता भूख हड़ताल पर बैठे हैं. ये सारे मुद्दे काफी गंभीर हैं.

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अंतरर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत कम होने के बावजूद लोग एक सौ रुपये प्रति लीटर डीजल और पेट्रोल खरीदने पर मजबूर हैं. आखिर यह कैसी व्यवस्था है? पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से अन्य खाद्य सामग्री की भी कीमत बढ़ गई है. लोगों के समक्ष खाने की समस्या उत्पन्न हो गई है. कोरोना के कारण आमदनी का स्रोत खत्म हो गया है. भारत को कृषि आधारित देश किया कहा जाता है. किसानों को अन्नदाता कहा जाता है और आज वही अन्नदाता धारना पर बैठा हुआ है. उसको कोई सुनने वाला नहीं है.

देश का शासक आराम फरमा रहा है. उसे जनता से कोई लेना-देना नहीं है. कोरोना और बाढ़ में जिस व्यक्ति ने सबसे ज्यादा लोगों की सेवा की, उसे एक साजिश के तहत मुकदमा दर्ज कराकर सलाखों के पीछे भेज दिया गया. इन तमाम मुद्दों को लेकर जन अधिकार पार्टी के कार्यकर्ता भूख हड़ताल पर बैठे हैं. इस मौके पर जन अधिकार छात्र युवा परिषद के जिलाध्यक्ष ओम यादव, सुमित कुमार सहित अन्य कई लोग उपस्थित थे.

                                                                                                                                    गया से जितेन्द्र कुमार की रिपोर्ट

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