By, Shrikant Pratyush
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महागठबंधन के नाम पर नौटंकी का दूसरा अध्याय प्रारंभः भाजपा

प्रतुल शाहदेव ने हेमंत सोरेन के घर विपक्षियों की बैठक को बताया नौटंकी पार्ट-2

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भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने बुधवार को नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन के आवास पर विपक्षी दलों की हुई बैठक को नौटंकी पार्ट-2 करार दिया।

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महागठबंधन के नाम पर नौटंकी का दूसरा अध्याय प्रारंभः भाजपा
सिटी पोस्ट लाइव, रांची: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने बुधवार को नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन के आवास पर विपक्षी दलों की हुई बैठक को नौटंकी पार्ट-2 करार दिया। शाहदेव ने कहा कि अब विपक्ष को गठबंधन से ‘महा’ शब्द हटा लेना चाहिए क्योंकि लोकसभा चुनाव में जनता ने झारखंड में इनका सूपड़ा ही साफ कर दिया है। यह गठबंधन हताश, निराश और जनता से खारिज किए गए नेताओं और दलों का समूह है। उन्होंने कहा कि जब इस गठबंधन के प्रमुख घटक दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के सुप्रीमो शिबू सोरेन ही चुनाव हार गए तो झामुमो के पास आगे कुछ कहने को नहीं बचता। झाविमो (झारखंड विकास मोर्चा) सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी लगातार पांचवीं बार चुनाव हारे। राजद टुकड़ों में बंट कर अस्तित्वविहीन हो गया है। कांग्रेस झारखंड में पूरे तरीके से अप्रासंगिक हो चुकी है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 7 सीटों पर लड़ी और 6 सीटों पर बड़े मार्जिन से हार गई। ऐसे भी लोकसभा चुनाव हारने के तुरंत बाद कांग्रेस और झामुमो ने एक-दूसरे पर वोट ट्रांसफर नहीं करवा पाने का सीधा आरोप लगाया था। उसके बाद फिर से ये दल साथ चुनाव लड़ने की कवायद का नाटक कर रहे हैं। प्रतुल ने कहा कि वैसे हेमंत सोरेन की बुलाई गई आज की बैठक को गठबंधन के नेताओं ने भी हल्के में लिया। इस बैठक में न तो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार पहुंचे और न ही बाबूलाल मरांडी ने ही शिरकत की। उन्होंने कहा कि विपक्ष के एक होकर लड़ने से भी भाजपा को कोई अंतर नहीं पड़ने वाला। भाजपा अपने सहयोगी दलों के साथ 65+ सीटों के लक्ष्य को पार करके रहेगी। उन्होंने कहाकि हेमंत का यह कहना हास्यास्पद है कि भाजपा जमीन के मुद्दे पर बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है। पूरे प्रदेश में सोरेन परिवार ने 33 डीडोंं के जरिए जब सीएनटी-एसपीटी कानून की धज्जियां उड़ाते हुए गरीब भोले-भाले आदिवासियों की करोड़ों की संपत्ति को कौड़ियों के मोल लिखवा लिया तो उस समय उन्हें यह क्यों नहीं याद आया था कि एक न एक दिन कानून के हाथ उन तक पहुंचेंगे ही। सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को दोहरे मापदंड नहीं अपनाने चाहिए।

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