By, Shrikant Pratyush
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राजद के ऑफर पर जेडीयू का जवाब-‘डूब रही राजद की भईंसिया, अब नहीं बचाएंगे’

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लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद जब एनडीए की प्रचंड जीत हुई तो न सिर्फ बीजेपी बल्कि उसके सहयोगी दलों की हैसियत भी बढ़ गयी। बीजेपी के साथ-साथ बीजेपी के सहयोगी दलों ने भी अप्रत्याशित सफलता हासिल की।

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राजद के ऑफर पर जेडीयू का जवाब-‘डूब रही राजद की भईंसिया, अब नहीं बचाएंगे’

सिटी पोस्ट लाइवः लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद जब एनडीए की प्रचंड जीत हुई तो न सिर्फ बीजेपी बल्कि उसके सहयोगी दलों की हैसियत भी बढ़ गयी। बीजेपी के साथ-साथ बीजेपी के सहयोगी दलों ने भी अप्रत्याशित सफलता हासिल की। 2014 में 2 सीटें जीतने वाली जेडीयू 2019 में 17 में 16 सीटें जीत गयी। हैसियत बढ़ी तो जाहिर है उम्मीद रही होगी कि केन्द्र की सत्ता में हिस्सेदारी भी इसी हैसियत के आधार पर मिलेगी लेकिन बीजेपी ने साफ कहा कि सांकेतिक हिस्सेदारी देंगे, यानि जेडीयू का सिर्फ एक सांसद हीं मंत्री हो सकता है।

नीतीश कुमार बीजेपी के इस रवैये पर नाराज हुए और सरकार में शामिल होने से इंकार कर दिया। इसके बाद बिहार की राजनीति उफनने लगी। जेडीयू-बीजेपी के बीच रिश्ते रोज तल्ख होने लगे। दूरियां बढ़ते देख महागठबंधन ने भी मौके को भुनाने के लिए नीतीश कुमार को महागठबंधन में आने का ऑफर दे दिया। फिर गिरिराज सिंह ने इस आग में घी डाल दिया। इफ्तार के बहाने नीतीश कुमार पर तंज कसा और दिखावा नहीं करने की नसीहत दी। इसके बाद जेडीयू खुलकर बीजेपी और नीतीश कुमार पर हमलावर हो गयी।

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जेडीयू और बीजेपी के बीच की इस राजनीतिक जंग से महागठबंधन खेमे में हलचल तेज हुई और नीतीश कुमार को ऑफर मिलने लगा। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भी ऑफर दिया है। राबड़ी के इस ऑफर पर जेडीयू की प्रतिक्रिया आयी है। जेडीयू प्रवक्ता डॉ. अजय आलोक ने ट्वीट किया है-‘कुछ नाम से हमारे नेता को ये लोग बुलाते थे शायद? याद आया कि नहीं और आज वोट की चोट क्या लगी तो चाचा यादव आने लगे!! बुला रहे हैं, भाई लोग आप हीं बताए अब जब भैंस पानी में चली गयी तो हम क्यों निकाले?’

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