By, Shrikant Pratyush
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BJP को क्यों नहीं भा रहा है JDU का PU सिकंदर, नीतीश कु. की जीत से आहत बीजेपी नेता

पीयू में जेडीयू की जीत पर बीजेपी ने खड़े किए सवाल, कहा क्यों पीके मिले पीयू के वीसी से ?

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बीजेपी ने अध्यक्ष पद पर जेडीयू उम्मीदवार की जीत के पीछे खेल देख रही है. BJP नेताओं ने प्रशांत किशोर की भूमिका को लेकर्सवल उठाते हुए कहा है कि राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों को छात्र संघ चुनाव से दूर रहना चाहिए था.

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BJP को क्यों नहीं भा रहा है JDU का PU सिकंदर, नीतीश कु. की जीत से आहत बीजेपी नेता

सिटी पोस्ट लाइव:  पटना यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव में जेडीयू  के प्रत्याशी की जीत को लेकर विपक्ष तो सवाल उठा ही रहा है अब बीजेपी भी चुनाव की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रही है. बीजेपी ने अध्यक्ष पद पर जेडीयू उम्मीदवार की जीत के पीछे खेल देख रही है. BJP नेताओं ने प्रशांत किशोर की भूमिका को लेकर्सवल उठाते हुए कहा है कि राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों को छात्र संघ चुनाव से दूर रहना चाहिए था.

बीजेपी विधायक अरुण कुमार सिन्हा का कहना है कि प्रशांत किशोर की वीसी के साथ मुलाकात को लेकर जेडीयू  प्रत्याशी की जीत संदेह के घेरे में है. इस जीत को लेकर शंका पैदा हो रही है.पीयू छात्र संघ चुनाव के पहले आचार संहिता लगने के बाद जदयू नेता प्रशांत किशोर ने पीयू के वीसी से कैंपस में मुलाकात की थी. इस मुलाकात को लेकर बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल से राज्यपाल से मिलकर इसकी शिकायत भी की थी.बीजेपी ने छात्र संघ के चुनाव में सरकारी सिस्टम का बेजा इस्तेमाल किये जाने का आरोप लगा दिया था. जबतक ये आरोप विपक्ष लगा रहा था, बात समझ में आ रही थी.लेकिन ये जीत जेडीयू के सहयोगी दल बीजेपी क्यों नहीं पचा पा रही है, ये बात लोगों की समझ में नहीं आ रही.

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विपक्ष का कहना है कि बीजेपी-जेडीयू के बीच की यह लड़ाई दिखावे के लिए है. दोनों ने मिलकर आपस में लड़ने का हाई-वोल्टेज ड्रामा किया और अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की. इस लड़ाई की वजह से मतदाता बीजेपी-जेडीयू के पक्ष में गोलबंद हो गए और महागठबंधन पूरी तरह से मैदान से बाहर हो गया. इस जीत के पीछे का खेल और राजनीति जो भी हो, जेडीयू के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का कद बहुत बढ़ गया है.

प्रशांत किशोर अपनी पहली चुनावी लड़ाई जीतकर ये साबित करने में सफल हुए हैं कि वो केवल दुसरे दलों के लिए चुनावी रणनीति ही नहीं बना सकते हैं बल्कि अपने दल की जीत सुनिश्चित करने में भी वो कामयाब हो सकते हैं. अब प्रशांत किशोर की बड़ी परीक्षा लोक सभा चुनाव में होना है. ये चुनाव तो लोक सभा का है लेकिन यहीं चनाव बिहार की सत्ता का सेमी फाइनल मैच भी है. इसी चुनाव की सफलता और बिफलाता पर जेडीयू से लेकर नीतीश कुमार और प्रशांत किशोर का राजनीतिक भविष्य निर्भर करेगा.

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