By, Shrikant Pratyush
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कल्याण सिंह की राह पर हैं सीएम योगी? ‘राम मंदिर पर 24 घंटे में फैसले की बात कह दी है

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क्या उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी के हीं एक पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की राह पर चल रहे हैं? मामला राम मंदिर से जुड़ा है और यह सवाल इसलिए है क्योंकि राम मंदिर को लेकर सीएम योगी ने बड़ा बयान दे दिया है बयान शायद इतना बड़ा है कि बयान पर राजनीतिक बवाल तय है। सीएम योगी ने कहा कि अगर अयोध्या विवाद का मामला कोर्ट उन्हें सौंप दे तो 24 घंटे में इसका निपटारा कर देंगे।

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कल्याण सिंह की राह पर हैं सीएम योगी? ‘राम मंदिर पर 24 घंटे में फैसले की बात कह दी है

सिटी पोस्ट लाइवः क्या उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी के हीं एक पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की राह पर चल रहे हैं? मामला राम मंदिर से जुड़ा है और यह सवाल इसलिए है क्योंकि राम मंदिर को लेकर सीएम योगी ने बड़ा बयान दे दिया है बयान शायद इतना बड़ा है कि बयान पर राजनीतिक बवाल तय है। सीएम योगी ने कहा कि अगर अयोध्या विवाद का मामला कोर्ट उन्हें सौंप दे तो 24 घंटे में इसका निपटारा कर देंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर पर जनता के सब्र का बांध कभी भी टूट सकता है। वे बोले जनता का राम मंदिर पर धैर्य तेजी से खत्म हो रहा है। अगर सुप्रीम कोर्ट इस विवाद पर जल्द फैसला सुनाने में असमर्थ है तो कोर्ट यह मामला हमें सौंप दे, हम इस मामले को 24 घंटे में सुलझा लेगें।

चैनल के कार्यक्रम के दौरान उनसे सवाल किया गया क्या वे राम मंदिर का मुद्दा बातचीत से सुलझाएंगे या फिर किसी और तरीके से, तो इस पर वे बोले कि पहले कोर्ट को इस मुद्दे को हमें सौंपने दीजिए। वे बोले कि मैं कोर्ट से यह अपील करता हूं कि इसे जल्द से जल्द निपटा दे। सीएम योगी के इस बयान के बाद यह सवाल बेहद अहम हो गया है कि क्या वो भी यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह की राह पर चल रहे हैं बावरी विध्वंस में जिनकी भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। 1991 में अपने दम पर यूपी में सरकार बना ली. कल्याण सिंह यूपी में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बने. सीबीआई में दायर आरोप पत्र के मुताबिक मुख्यमंत्री बनने के ठीक बाद कल्याण सिंह ने अपने सहयोगियों के साथ अयोध्या का दौरा किया और राम मंदिर का निर्माण करने के लिए शपथ ली.

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कल्याण सिंह सरकार के एक साल भी नहीं गुजरे थे कि 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में कारसेवकों ने विवादित ढांचा गिरा दिया. जबकि उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में शपथ पत्र देकर कहा था कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में, वह मस्जिद को कोई नुकसान नहीं होने देंगे. इसके बावजूद 6 दिसंबर 1992 को वही प्रशासन जो मुलायम के दौर में कारसेवकों के साथ सख्ती बरता था, मूकदर्शक बन तमाशा देख रहा था.सरेआम बाबरी मस्जिद विध्वंस कर दी गई. इसके लिए कल्याण सिंह को जिम्मेदार माना गया. कल्याण सिंह ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 6 दिसंबर, 1992 को ही मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया.

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