By, Shrikant Pratyush
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खूंटी और तोरपा विस : सुशीला केरकेट्टा के अलावा अन्य किसी महिला ने कभी नहीं जीता चुनाव

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आजादी के बाद से अबतक खूंटी जिले में पड़ने वाले दो विधानसभा सीटों खूंटी और तोरपा (दोनों अजजा के लिए सुरक्षित) में 15 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, तो कांग्रेस की सुशीला केरकेट्टा (अब स्वर्गीय) को छोड़ किसी महिला ने विधानसभा का मुंह नहीं देखा।

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खूंटी और तोरपा विस : सुशीला केरकेट्टा के अलावा अन्य किसी महिला ने कभी नहीं जीता चुनाव

सिटी पोस्ट लाइव, खूंटी: आजादी के बाद से अबतक खूंटी जिले में पड़ने वाले दो विधानसभा सीटों खूंटी और तोरपा (दोनों अजजा के लिए सुरक्षित) में 15 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, तो कांग्रेस की सुशीला केरकेट्टा (अब स्वर्गीय) को छोड़ किसी महिला ने विधानसभा का मुंह नहीं देखा। भाजपा ने इन दोनों सीटों पर अबतक किसी महिला को टिकट ही नहीं दिया। तोरपा सीट से किसी महिला उम्मीदवार ने जीत का स्वाद नहीं चखा है। अबतक हुए 15 विधानसभा चुनावों में कांग्रेस सात बार, भाजपा पांच बार और झारखंड पार्टी तीन बार खूंटी सीट पर विजय पताका फहरा चुकी है। कांग्रेस के टी मुचीराय मुंडा और उनके बेटे सूबे के वर्तमान ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा चार बार खूंटी सीट को भाजपा की झोली में डाल चुके हैं। उन्होंने 1999, 2004, 209 और 2014 में जीत हासिल की थी। नीलकंठ सिंह मुंडा के पिता टी मुची राय मुंडा ने 1967, 1969 और 1972 में जीत की हैट्रिक लगायी थी।

वैसे तो प्रारंभिक दौर में खूंटी और तोरपा को झारखंड पार्टी का गढ़ माना जाता था। झापा ने 1952, 1957 और 1962 में खूंटी और तोरपा सीट से जीत हासिल की थी। 1952 में झापा के लुकस मुंडा, 1957 में वीर सिंह मुंडा और 1962 में फूलचंद कच्छप ने जीत हासिल की थी। तोरपा से पार्टी के संस्थापक मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा 1952, 1957 और 1962 में विधायक चुने गये थे। 1962 में प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के कहने पर जयपाल सिंह मुंडा ने झापा का कांग्रेस पार्टी में विलय कर दिया। 1967 में तोरपा सीट से जयपाल सिंह मुंडा ने कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की, लेकिन खूंटी सीट पर उसे हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस के टी मुचीराय मुंडा ने झापा के फूलचंद कच्छप को 8213 वोटों से पराजित कर दिया। उसके बाद मुंडा ने जीत की हैट्रिक लगायी।

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इमरजेंसी के बाद 1977 में हुए विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी के खुदिया पाहन को पहली बार विधानसभा पहुंचने का मौका मिला, लेकिन 1980 में जनता पार्टी के टूट जाने से एकबार फिर कांग्रेस को मौका मिला और उसके उम्मीदवार सामू पाहन ने भाजपा के हाथीराम मुंडा को 4585 मतों से परास्त कर दिया। 1985 और 1990 और 1995 में क्षेत्र की प्रख्यात शिक्षाविद और बिरसा कॉलेज की प्रिंसिपल सुशीला केरेकेट्टा पर कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की, लेकिन 1999 से 2014 तक हुए चार विधानसभा चुनावों में भाजपा के नीलकंठ सिंह मुंडा लगातार विपक्षियों को पटखनी देते आये हैं। इन तीन राजनीतिक दलों के अलावा झामुमो सहित किसी अन्य ने आजतक खूंटी सीट से जीत का मुंह नहीं देखा है। खूंटी जिले में पड़ने वाली तोरपा विधानसभा सीट पर अबतक छह बार झारखंड पार्टी का, पांच बार कांग्रेस का और दो-दो बार भाजपा व झामुमो का कब्जा रहा है।

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