By, Shrikant Pratyush
News 24X7 Hour

मंडल डैम का शिलान्यास भाजपा का महज चुनावी स्टंट : योगेन्द्र प्रताप

- sponsored -

0

झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) के प्रवक्ता योगेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि शब्दों की जादूगरी में निपुण भाजपा और प्रधानमंत्री मंडल डैम के नाम पर झारखंड की जनता व किसानों को दिग्भ्रमित कर रहे हैं।

Below Featured Image

-sponsored-

मंडल डैम का शिलान्यास भाजपा का महज चुनावी स्टंट : योगेन्द्र प्रताप

सिटी पोस्ट लाइव, रांची: झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) के प्रवक्ता योगेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि शब्दों की जादूगरी में निपुण भाजपा और प्रधानमंत्री मंडल डैम के नाम पर झारखंड की जनता व किसानों को दिग्भ्रमित कर रहे हैं। तीन राज्यों में भाजपा की करारी शिकस्त के बाद ये एक बार फिर किसानों के हमदर्द होने का झूठा राग अलाप रहे हैं। मंडल डैम के निर्माण से झारखंड को नफा-नुकसान की बात अभी छोड़ भी दी जाय तो अहम सवाल है कि प्रधानमंत्री व भाजपा को अगर वास्तव में किसानों व जनता की फिक्र थी तो साढ़ें चार वर्षो तक इन्होंने इसकी सुध क्यों नहीं ली ? चुनावी वर्ष होने के कारण एक बार फिर वे झारखंड की जनता की आंखों में धूल झोंकनें की नाकाम कोशिश प्रारंभ कर चुके हैं, इसलिए भाजपा के चुनावी स्टंट के अलावा यह और कुछ नहीं है। दूसरों को लेटलतीफी का उपदेश का पाठ पढ़ाने वाली भाजपा को पहले यह बतानी चाहिए कि अप्रैल 2017 में शिलान्यास होने वाले साहेबगंज गंगा पुल निर्माण कार्य में पौने दो साल बाद भी एक ईट तक क्यों नहीं जोड़ा जा सका। इसके लिए भाजपा सरकार समाज की गुनाहगार नहीं हैं क्या ? कितनी हास्यास्पद बात है कि अखबारों में किसानों की आय चार गुणी करने का सब्जबाग दिखाने वाली भाजपा के ही झारखंड के वरिष्ठ मंत्री सरयू राय को पत्र लिखकर किसानों के धान बिक्री की बोनस की ओर अपने ही दल के मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ठ कराना पड़ रहा है। वहीं पहले की योजनाओं में हेराफेरी की बात कहने वाले प्रधानमंत्री जी को पता होनी चाहिए कि उनके दल के ही झारखंड के एक विधायक खुलेआम मनरेगा में 59 प्रतिशत कमीशन प्रथा होने की बात सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं। पलामू की सभा में बच्चों को पढ़ाई, किसानों को सिंचाई, बुजुर्गो को दवाई सरीखे बात कहने वाले प्रधानमंत्री को शायद यह पता नहीं कि झारखंड में बच्चों की पढ़ाई नहीं बल्कि उनके स्कूलों को बंद किया जा रहा है, छात्रवृति में कटौती की जा रही है, पारा शिक्षकों को पीट-पीटकर सरकार मार रही है। किसानों को सिंचाई की बजाय वे आत्महत्या को मजबूर है। बुजुर्ग को दवाई तो सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। यहां रिम्स में 50 रूपये के अभाव में बच्चें मारे जा रहे हैं।

-sponsered-

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

-sponsored-

Leave A Reply

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More