By, Shrikant Pratyush
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उपेंद्र कुशवाहा के बुरे दिन का हुआ आगाज, RLSP के कई नेता भाजपा और जदयू में जाने को आतुर

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उपेंद्र कुशवाहा का यह फैसला खुद उनकी पार्टी के दमदार विधायक और नेताओं को रास नहीं आ रहा है। एनडीए से अलग होने की घोषणा होने के तुरन्त बाद से रालोसपा में बड़ी टूट के आसार बन गए हैं। पूर्व मंत्री सह रालोसपा के उपाध्यक्ष भगवान सिंह कुशवाहा, रालोसपा के विधायक सुधांशु शेखर ने जदयू में जाने का इशारा कर दिया है।

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उपेंद्र कुशवाहा के बुरे दिन का हुआ आगाज, RLSP के कई नेता भाजपा और जदयू में जाने को आतुर

सिटी पोस्ट लाइव “विशेष” : उपेंद्र कुशवाहा ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। लेकिन अभी उनके इस्तीफे को स्वीकारा नहीं गया है। दिल्ली में मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए से भी अपनी पार्टी रालोसपा के अलग होने की घोषणा कर दी है। लेकिन विडंबना देखिए कि उपेंद्र कुशवाहा का यह फैसला खुद उनकी पार्टी के दमदार विधायक और नेताओं को रास नहीं आ रहा है। एनडीए से अलग होने की घोषणा होने के तुरन्त बाद से रालोसपा में बड़ी टूट के आसार बन गए हैं। पूर्व मंत्री सह रालोसपा के उपाध्यक्ष भगवान सिंह कुशवाहा, रालोसपा के विधायक सुधांशु शेखर ने जदयू में जाने का इशारा कर दिया है। दोनों नेता ने इस बात की घोषणा भी कर दी है। यही नहीं,रालोसपा के विधायक ललन पासवान भी पार्टी छोड़ने की कतार में हैं। बताया जा रहा है कि ललन पासवान बीजेपी के संपर्क में हैं और कभी भी रालोसपा का साथ छोड़ सकते हैं।

आपको बताना बेहद लाजिमी है कि कुछ दिन पहले रालोसपा ने जदयू पर यह आरोप लगाया था कि नीतीश कुमार रालोसपा को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। अब सच्चाई जो हो लेकिन इन दोनों नेताओं ने जदयू में शामिल होने का एलान कर दिया है। हांलांकि इस मामले पर जदयू का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से प्रभावित होकर ये नेता जदयू में आ रहे हैं। अभी रालोसपा के कई और नेता उपेंद्र कुशवाहा के एनडीए से निकलने की वजह से खफा हैं लेकिन वे खुलकर अभी अपनी नाराजगी नहीं जता रहे हैं। अगर रालोसपा के भीतर इसी तरह घमाशान मचा रहा, तो आने वाले समय में उपेंद्र कुशवाहा रालोसपा में अकेले नजर आएंगे। उपेंद्र कुशवाहा के एनडीए छोड़ने से किसी पार्टी को अपार खुशी नहीं है।

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वैसे अब वे जहां जाएंगे, उन्हें पिछली कतार में ही खड़ा होना होगा। महागठबंधन के साथ उपेंद्र कुशवाहा जाएंगे, यह तय माना जा रहा है। लेकिन महागठबंधन में पहले से विभिन्य धरा की पार्टियां ताल ठोंक रही हैं। वैसे में, महागठबंधन उपेंद्र कुशवाहा को सर आंखों पर बिठाने की जगह जूठन चाटने के लिए विवश करेगा। उपेंद्र कुशवाहा ने समझ-बूझकर बड़ी राजनीतिक भूल की है। वैसे 2019 लोकसभा चुनाव में अभी समय है। आगे यह देखना सबसे अधिक अहम है कि रालोसपा के और कितने प्रभावशाली नेता पार्टी छोड़कर ईधर से उधर होते हैं। अभी मोटे तौर पर हम यही कहेंगे कि अति राजनीतिक महत्वाकांक्षा में उपेंद्र कुशवाहा ने खुद से अपनी राजनीतिक कब्र खोद ली है। महागठबंधन में इनका सत्कार होता है, या इन्हें दुत्कार का सामना करना पड़ता है। आगे इसपर सभी की नजर टिकी रहेगी।

पीटीएन न्यूज मीडिया ग्रुप के सीनियर एडिटर मुकेश कुमार सिंह की “विशेष” रिपोर्ट

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