By, Shrikant Pratyush
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बिहार के बीमार स्वास्थ्य महकमें से मंत्री जी की तौबा, अब नहीं बनना चाहते स्वास्थ्य मंत्री!

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बिहार जैसा राज्य जिसे बिमारू कहा जाता रहा है और लगातार पिछड़ेपन से उबरने के लिए जद्दोजहद में जुटा हो वहां स्वास्थ्य महकमे की जिम्मेवारी संभालना वाकई चुनौतीपूर्ण है।

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बिहार के बीमार स्वास्थ्य महकमें से मंत्री जी की तौबा, अब नहीं बनना चाहते स्वास्थ्य मंत्री!

सिटी पोस्ट लाइव : बिहार जैसा राज्य जिसे बिमारू कहा जाता रहा है और लगातार पिछड़ेपन से उबरने के लिए जद्दोजहद में जुटा हो वहां स्वास्थ्य महकमे की जिम्मेवारी संभालना वाकई चुनौतीपूर्ण है। बिमारू राज्य के बिमारू सिस्टम से पार पाने में अच्छे अच्छों की हालत खराब हो जाती है। जो लोग सिस्टम के दुरूस्त होने का दावा करते हैं या फिर दुरूस्त कर देने का दावा करते हैं उनके लिए यह काम कितना मुश्किल होता है या फिर बीमार सिस्टम के आगे वे कितने बेबस होते हैं इसकी वानगी कभी न कभी तो दिख हीं जाती है। स्वास्थ्य वाले महकमें के मंत्री जी आज एक अस्पताल का उद्घाटन करने पहुंचे थे।

चेहरे पर मुस्कान के साथ मंत्री जी बतिया रहे थे तो उसी मुस्कुराहट के साथ अपना दर्द भी उड़ेल दिया। अस्पताल के उद्घाटन के लिए पहुंचे मंत्री जी से उनकी आवभगत में लगे लोगों ने मजाक में कहा आप तो स्वास्थ्य विभाग संभालते हैं स्वास्थ्य विभाग का मंत्री तो आधा डाॅक्टर हो जाता है। मंत्री जी मुस्कुराते हैं फिर कोई कहता है अभी तो 6-8 महीना बचा है तब तक तो आप पूरे डाॅक्टर हो जाएंगे, सरकार बनी तो फिर मंत्री बनेंगे तब मंत्री जी का दर्द बाहर आ जाता है। मंत्री जी कहते हैं न अब इ वाला विभाग नहीं संभालेंगे। कभी न, गलती से भी न।

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समझना आसान है कि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था कितनी बीमार है। कारनामे भी तो बड़े बड़े हैं इस बिमारू सिस्टम के। जो सिस्टम देश के जाने माने गणितज्ञ को एम्बुलेंस तक न दे सके। जिस सिस्टम में सैंकड़ों बच्चों की जिंदगियां लील ली हो भला आसान है क्या उस सिस्टम को संभालना। सबकुछ राम भरोसे हैं मंत्री जी भी बस झेल रहें है हम और आप हीं नहीं इस सिस्टम से मंत्री जी भी हार गये हैं।

हांलाकि मंत्री जी ने अपनी तरफ से पूरा प्रयास किया कि विभाग और अपनी छवि दुरूस्त की जाए। स्पेशल सेल भी खोला गया ताकि जरूरतमंदों की मदद की जा सके। करीबी लोग कहते हैं कि जो गुहार लेकर आया उसके इलाज की व्यवस्था की जाती है। शिकायत पर मंत्री जी का पारा भी गरम होता है और शिकायत सुनने का संयम और उसपर कार्रवाई का साहस भी रखते हैं लेकिन फिर भी लगता है इ विभाग ने मंत्री जी को कुछ ज्यादा हीं टेंशन दिया है।

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