By, Shrikant Pratyush
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मोहन भागवत का बयान आरजेडी के लिए कुरामिन, नीतीश के लिए मुसीबत

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क्या बिहार में महागठबंधन और आरजेडी को अब संघ प्रमुख मोहन भागवत का हीं सहारा है सवाल और सवाल का संदर्भ बिहार में नीतीश कुमार के एनडीए छोड़ने और महागठबंधन के ऑफर स्वीकारने के कयासों और अटकलों से जुड़ा है। आरजेडी और महागठबंधन के तमाम नेता लगातार यह कहते रहे कि नीतीश कुमार महागठबध्ांन के सशक्त चेहरे हो सकते हैं

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मोहन भागवत के बयान से जिदां हो गयी हैं आरजेडी की उम्मीदें! नीतीश की पार्टी नाराज है’

सिटी पोस्ट लाइवः क्या बिहार में महागठबंधन और आरजेडी को अब संघ प्रमुख मोहन भागवत का हीं सहारा है सवाल और सवाल का संदर्भ बिहार में नीतीश कुमार के एनडीए छोड़ने और महागठबंधन के ऑफर स्वीकारने के कयासों और अटकलों से जुड़ा है। आरजेडी और महागठबंधन के तमाम नेता लगातार यह कहते रहे कि नीतीश कुमार महागठबध्ांन के सशक्त चेहरे हो सकते हैं और उनके आने से महागठबध्ांन मजबूत होगा उन्हें एनडीए छोड़कर महागठबंधन में आना चाहिए। नीतीश को यह ऑफर लगातार इसलिए मिल रहा था क्योंकि एक के बाद एक कई ऐसे मौके आए जब यह लगा कि बीजेपी और जेडीयू के बीच की दोस्ती समझिए बस अब टूट हीं गयी। कभी गिरिराज सिंह जेडीयू के लिए विलेन बन जाते तो कभी धारा 370, तीन तलाक। बीजेपी की ओर से गिरिराज सिंह के अलावा सच्चिदानंद राय भी वो नेता रहे जिनके बयानों ने आग में घी का काम किया बावजूद इसके दोस्ती बनी रही हां गर्माहट जरूर बढ़ी, तनातनी भी हुई लेकिन दोस्ती टूटी नहीं।

समय समय पर बीजेपी और जेडीयू के बीच जो तनातनी बढ़ती रही है उसने आरजेडी को यह भरोसा दे दिया नीतीश कुमार अब पाले में आ सकते हैं और यह सबसे मुफीद वक्त है क्योंकि दोस्ती तो टूटनी तय है। इसलिए वे लगातार नीतीश कुमार को ऑफर पर ऑफर देते रहे। शिवानंद तिवारी ने तो एक कदम बढ़कर यह कह दिया कि नीतीश एकमात्र वो चेहरा हैं जो पीएम मोदी से लड़ सकते हैं इसलिए वो अगर महागठबंधन में आते हैं तो विपक्षी कुनबा पूरी तरह मजबूत हो जाएगा और पीएम मोदी के खिलाफ लड़ाई आसान हो जाएगी। फिर भी जेडीयू बीजेपी की दोस्ती आज भी अपनी जगह कायम है।

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तीन तलाक और धारा 370 पर जेडीयू ने तेवर नरम कर लिया तो आरजेडी की रही सही उम्मीद भी चली गयी। नीतीश कुमार को बार-बार ऑफर देने वाली आरजेडी निराश हीं हो चली थी कि नीतीश अब पाले में नहीं आने वाले कोशिश बेकार है तभी संघ प्रमुख मोहन भागवत का आरक्षण वाला बयान आ गया है। बयान देकर कम से कम मोहन भागवत ने आरजेडी की उम्मीदें एक बार फिर जिंदा कर दी है। मोहन भागवत के बयान पर आरजेडी और जेडीयू के सुर एक हैं दोनो मुखर होकर इस बयान का विरोध कर रही है। भागवत के बयान ने आरजेडी को संभवतः यह भरोसा दे दिया है कि नीतीश शायद अब पाला बदलेंगे लेकिन फिलहाल यह कोई नहीं जानता कि नीतीश कुमार क्या करने वाले हैं। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कोई सरप्राइज देने वाले हैं या नहीं लेकिन यह स्पष्ट है कि मोहन भागवत के बयान से आरजेडी को यह भरोसा हो चला है कि जेडीयू बीजेपी की दोस्ती की खटास इस बयान से बढ़ेगी दूसरी तरफ शिवानंद तिवारी ने यह कहकर नीतीश का कद और बढ़ा दिया है कि पीएम मोदी के खिलाफ लड़ाई के लिए नीतीश से बेहतर कोई दूसरा नेता नहीं है।

फिलहाल भागवत के बयान से आरजेडी भी नाराज है और जेडीयू भी। सरकार में मंत्री और जेडीयू नेता श्याम रजक सड़क पर खून बहने की बात कर चूके हैं तो दूसरी तरफ केसी त्यागी तल्ख अंदाज में कह चुके हैं कि आरक्षण बहस और समीक्षा का विषय नहीं है। इन बयानों के मतलब और मायने धीरे-धीरे समझ आने लगेगें और उनके प्रभाव भी क्योंकि 2020 में बिहार में विधानसभा चुनाव है और जो कुछ हो रहा है उससे यह साफ लग रहा है कि सब चुनाव की तैयारी है।

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