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मुकेश सहनी-ओवैशी बने महागठबंधन के लिए बड़ी चुनौती.

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सिटी पोस्ट लाइव :बिहार में हाल में हुए बिहार विधान सभा की तीन सीटों के लिए हुए उप चुनाव के नतीजे ने महागठबंधन की चिंता बढ़ा दी है.RJD ने मोकामा सीट तो बचा लिया लेकिन इसकी वजह अनंत सिंह थे.महागठबंधन को जिस गोपालगंज सीट को जीत लेना चाहिए, वह हार गई.यहाँ हार की वजह भी ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम रहा.तीन उप-चुनावों के नतीजों से साफ़ है कि ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम और वीआईपी पार्टी अपने वोटरों को लामबंद करने में सफल होती जा रही है. बिहार में अपनी ताकत का एहसास महागठबंधन को कराने में मुकेश सहनी सफल होते दिख रहे हैं.

अगर मुकेश साहनी की ताकत को महागठबंधन द्वारा हल्के में नहीं लिया गया होता तो शायद आज निषादों के ज्यादातर वोट महागठबंधन की झोली में जरूर गिरे होते. वीआईपी पार्टी को कुढ़नी उपचुनाव में लगभग 10000 वोट मिले हैं उसमें से वोट का एक हिस्सा महागठबंधन के पाले में जरूर जा सकता था. मुकेश सहनी ओवैसी की पार्टी के उम्मीदवारों की ओर से कांटे के वोटों को जोड़ा जाए तो महागठबंधन के प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित हो गई होती .कुढ़नी उपचुनाव में ओवैसी की पार्टी ने उतने ही वोट प्राप्त किए जितने वोटों के अंतर से महागठबंधन को पराजय का सामना करना पड़ा.कुढ़नी में हुए उपचुनाव के कांटे की टक्कर में जदयू के मनोज कुशवाहा भाजपा के प्रत्याशी केदार प्रसाद गुप्ता से 3632 मतों से पराजित हो गए. भाजपा प्रत्याशी को कुल 76653 वोट मिले जबकि जदयू प्रत्याशी को 73008 वोट ही मिल सके. भाजपा और जदयू में जीत का अंतर 3645 मतों का रहा.

जदयू और खासकर नीतीश कुमार की यह एक बड़ी हार के रूप में देखा जा रहा है. महागठबंधन सरकार जब से सत्ता में आई है तब से तीनों उपचुनाव में दो भाजपा और एक राजद ने जीता है.राजद ने जिस मोकामा सीट को जीता है उसका श्रेय महागठबंधन से ज्यादा अनंत सिंह को जाता है. इन सभी नतीजों से एक बात साफ़ है बिहार की सियासत में मुकेश- ओवैसी फैक्टर महागठबंधन के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है.

मुकेश सहनी और ओवैशी की पार्टियाँ महागठबंधन के लिए जी का जंजाल बन गई है. खासकर मुस्लिम और निषाद के वोटों को जिस तरीके से ओवैसी की पार्टी और मुकेश साहनी गोलबंद करने में सफल रहे हैं ,वो भले खुद नहीं जीत पायें लेकिन महागठबंधन की राह मुश्किल जरुर बना सकती हैं.जाहिर है यहीं वजह है कि मुकेश सहनी कुढ़नी चुनाव में हार के वावजूद भी खुश दिखाई दे रहे हैं.वो एक हजार किलो लड्डू आज बांटते नजर आये. महागठबंधन की समस्या ये है कि JDU के साथ आ जाने के बाद उसके पास सहयोगी दलों कांग्रेस, बाम दल और हम पार्टी को भी देने के लिए पर्याप्त सीटें नहीं हैं.ऐसे में महागठबंधन मुकेश सहनी और ओवैशी की पार्टी से कैसे गठबंधन कर पायेगा?

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