By, Shrikant Pratyush
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राष्ट्रवाद और विकास की हुई जीत, “अहंकारी” और सवर्ण विरोधी का सूपड़ा हुआ साफ : लवली आनंद

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कांग्रेस में रहती हुई, महागठबन्धन का बैंड बजाने वाली पूर्व सांसद लवली आनंद आज 26 मई को पटना के स्थानीय होटल में संवाददाताओं रूबरू हुईं ।

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राष्ट्रवाद और विकास की हुई जीत,”अहंकारी” और सवर्ण विरोधी का सूपड़ा हुआ साफ : लवली आनंद

सिटी पोस्ट लाइव : कांग्रेस में रहती हुई, महागठबन्धन का बैंड बजाने वाली पूर्व सांसद लवली आनंद आज 26 मई को पटना के स्थानीय होटल में संवाददाताओं रूबरू हुईं। संवाददाताओं से बात करती हुई पूर्व सांसद श्रीमती लवली आनन्द ने एनडीए की प्रचंड जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बधाई दी और बिहार की जनता का भी आभार प्रकट किया। आगे उन्होंने कहा कि बिहार आंदोलन और बदलाव की धरती रही है। सन 42, सन 57और सन 74 के आंदोलन इसके गवाह हैंं। आज एक बार फिर बिहार ने यह साबित कर दिया। हमने लोगों से एक ‘सशक्त भारत और विकसित बिहार‘ के लिए वोट माँगा था। परिणाम यह बताने के लिए काफी है कि लोग मोदी जी के हाथों देश को सुरक्षित मानते हैं।

हमने पूर्व में ही यह घोषणा किया था कि 23 मई को महगठबण्धन के शूरमाओं के अहंकार को जनता चकनाचूर करेगी। जो पूर्णतया सच साबित हुआ। धनपशुओं को धूल चटाने के लिए बिहार की महान जनता को बहुत -बहुत आभार और साधुवाद। यह अहंकार और भ्रष्ट आचरण की हार और स्थायित्व और विकास की जीत है। नौसिखियों का घमंड, सीटों की छीना-झपटी और टिकट के खरीद-फरोख्त, हार के मुख्य कारणों में हैं। अकेले महागठबंधन की 40 सीटों पर टिकट की बिक्री में 400 करोड़ से ज्यादा के काले कारोबार हुए।

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‘सवर्ण आरक्षण’ का एक तरफा विरोध भी महागठबंधन की पराजय का मुख्य कारण बना। कांग्रेस ने अपने लाखों कार्यकर्ताओं के पुरुषार्थ पर नहीं एक ‘पॉलीटिकल ब्रोकर’ की दलाली पर ज्यादा भरोसा जताया। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल के कहे अनुसार हम कांग्रेस में ‘फ्रंट फुट’ की राजनीति करने आए थे,’बैक फुट’ की नहीं। अगर कांग्रेस को एक ही सीट जीतनी थी तो फिर नौसिखिया और आसमानी नेताओं के सामने घुटने टेकने की क्या जरूरत है थी? कांग्रेस अगर स्वतंत्र रूप से अकेले लड़ने का जोखिम उठाती तो आने वाले कल में वह बिहार में एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरती। जाहिर तौर पर कांग्रेस ने यह स्वर्णिम मौका खो दिया।

2020 के बिहार विधानसभा का चुनाव परिणाम भी इससे अलग नहीं होंगे। लोग अराजकता और भ्रष्टाचार की जगह स्थायित्व और विकास को वोट देना पसंद करेंगे। बिहार की जनता 90 के दशक के खौफनाक और अंधदौर में लौटना नहीं चाहती है। लवली आनंद ने पत्रकारों को विशेष जानकारी देते हुए कहा कि “संपूर्ण क्रांति पखवाड़ा” 16 जून को फ्रेंड्स ऑफ आनंद पूर्व सांसद आनंद मोहन जी की ससम्मान रिहाई को लेकर बिहार के सहरसा जिला मुख्यालय स्थित एमएलटी कॉलेज ग्राउंड में 1 लाख लोगों के साथ ‘शांतिमय प्रदर्शन’ करेगा।

आगामी 2 अक्टूबर 2019 को फ्रेंड्स ऑफ आनंद,गांधी जयंती के पावन मौके पर सीटों की खरीद-फरोख्त और राजनीति में धनबल के खिलाफ रविंद्र भवन पटना से सत्याग्रह का आगाज करेगा। उसी दिन आनंद मोहन जी विरचित पुस्तक ‘गांधी’ का लोकार्पण भी होना तय है।एक घण्टे से ज्यादा चले इस संवाददाता सम्मेलन में फ्रेंड्स ऑफ आनन्द के प्रदेश प्रवक्ता पवन राठौर, वरीय नेता दीपक कुमार सिंह, राजन कुमार, केशव पांडेय, विकास सिंह, राजेश सिंह, संजय सिंह सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

पीटीएन न्यूज मीडिया ग्रुप के सीनियर एडिटर मुकेश कुमार सिंह की रिपोर्ट

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