By, Shrikant Pratyush
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भूमिहारों की जगहपार्टी में राजपूतों को देने की रणनीति पर काम कर रहे नीतीश कु.

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भूमिहारों की जगहपार्टी में राजपूतों को देने की रणनीति पर काम कर रहे नीतीश कु.

सिटी पोस्ट लाइव : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने शासन काल में सवर्णों में सबसे ज्यादा भूमिहार नेताओं को तरजीह दी. भूमिहार नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेवारी सौंपी .लेकिन जैसे ही उन्होंने BJP का साथ छोड़ा भूमिहारों ने नीतीश कुमार के खिआफ मोर्चा खोल दिया. फिर मोदी मोदी करने लगे. भूमिहारों को इतनी तरजीह दिए जाने के वावजूद BJP का साथ छोड़ने के बाद उनका साथ नहीं मिलने से नाराज मुख्यमंत्री ने अब भूमिहारों से किनारा करना शुरू कर दिया है. उन्हें ये बात समझ में आ गई है कि भूमिहार BJP को छोड़ उनके नहीं होनेवाले.

अब नीतीश कुमार ने भूमिहार की जगह राजपूतों को पार्टी से जोड़ने की रणनीति पर जोरशोर से काम शुरू कर दिया है. गौरतलब है कि भूमिहारों को ज्यादा तरजीह देने की वजह से ही राजपूत नाराज होकर लालू यादव के साथ खड़े हो गए थे. अब भूमिहारों की वजह से नाराज चल रहे राजपूतों को पार्टी से जोड़ने की रणनीति पर नीतीश कुमार ने काम शुरू कर दिया है. दरअसल, नीतीश कुमार को ये बखूबी पता है कि भूमिहार और राजपूत दोनों साथ नहीं रह सकते. इसलिए अब नीतीश कुमार ने  भूमिहार नेताओं की जगह राजपूत नेताओं को ज्यादा भाव देना शुरू कर दिया है.

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अपनी इस रणनीति के तहत ही उन्होंने रविवार को पटना में प्रदेश भर के राजपूत नेताओं के साथ बैठक की. इस बैठक में राजपूत समाज को पार्टी से जोड़ने की रणनीति पर गहन विचार-विमर्श हुआ. आज की तारीख में सवर्ण BJP के साथ ज्यादा जुड़े हुए हैं. अब नीतीश कुमार सवर्णों को पार्टी से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. आज की बैठक में शामिल राजपूत नेताओं के साथ उनके समाज को पार्टी से कैसे जोड़ा जाए, इसको लेकर गहन विचार विमर्श हुआ.सूत्रों के अनुसार इसबार सवर्णों को पार्टी से जोड़ने की रणनीति के तहत JDU चुनाव में सवर्णों को पहले से ज्यादा जगह देने की कोशिश करेगी.

गौरतलब है कि नीतीश कुमार गैर-यादव पिछड़ों और अति-पिछड़ों के सबसे बड़े नेता हैं.अगर वो सवर्ण समाज को भी एक हदतक पार्टी से जोड़ने में कामयाब हो जाते हैं तो आगे चलकर वो सवर्णों की पहली पसंद बन सकते हैं. वैसे भी अब सवर्ण मुख्यमंत्री पद के दावेदार नहीं हैं. उन्हें अपनी आबादी के हिसाब से राजनीति में प्रतिनिधित्व चाहिए. नीतीश कुमार इसी रणनीति के तहत उन्हें पार्टी से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. अब भूमिहारों के दूर होने के बाद राजपूत वैसे भी नीतीश कुमार की पार्टी में ज्यादा तरजीह मिलने की उम्मीद करने लगे हैं.

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