By, Shrikant Pratyush
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एक्सक्लूसिव इंटरव्यूः ‘नरेन्द्र मोदी के नाम पर वोट मांग रहे नीतीश, बीजेपी का होना चाहिए मुख्यमंत्री

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चुनाव खत्म होने के बाद भी बिहार की राजनीति की गर्माहट खत्म नहीं हुई है क्योंकि चुनाव खत्म होते हीं बीजेपी एमएलसी विधानपार्षद नित्यानंद राय ने बड़ा बम फोड़ दिया है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा है कि बिहार का मुख्यमंत्री किसी बीजेपी नेता को होना चाहिए।

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एक्सक्लूसिव इंटरव्यूः ‘नरेन्द्र मोदी के नाम पर वोट मांग रहे नीतीश, बीजेपी का होना चाहिए मुख्यमंत्री

सिटी पोस्ट लाइवः चुनाव खत्म होने के बाद भी बिहार की राजनीति की गर्माहट खत्म नहीं हुई है क्योंकि चुनाव खत्म होते हीं बीजेपी एमएलसी विधानपार्षद नित्यानंद राय ने बड़ा बम फोड़ दिया है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा है कि बिहार का मुख्यमंत्री किसी बीजेपी नेता को होना चाहिए। इस बयान पर अब दूसरे राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी आने लगी हैं। सिटी पोस्ट लाइव के एडिटर इन चीफ श्रीकांत प्रत्यूष से बातचीत करते हुए राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने कहा कि सच्चिदानंद राय ने बिल्कुल ठीक कहा है। वे मेरे मित्र हैं, मैं उनको जानता हूं, वे मजबूत आदमी हैं और उनको कोई दबा नहीं सकता।

शिवानंद तिवारी ने कहा कि सच्चिदानंद राय चुनाव लड़ना चाहते थे और टिकट नहीं मिला तो नाराज हो गये थे। उनकी नाराजगी को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने गंभीरता से लिया। उनके लिए हवाई जहाज भेजा और उन्हें जैसे-तैसे बीजेपी ने मनाया। नीतीश कुमार ने अपने चेहरे पर वोट नहीं मांगा है। लोकसभा चुनाव के शुरूआती दो चरणों में वे अपने काम के नाम पर वोट मांगते रहे लेकिन बाकि के पांच चरणों में वे पीएम मोदी के काम के नाम पर वोट मांग रहे थे। जब पीएम मोदी के नाम पर हीं वोट मांगना है तो बिहार का मुख्यमंत्री पीएम मोदी की पार्टी बीजेपी का हीं होना चाहिए। इसलिए सच्चिदानंद राय ने ठीक कहा है।

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एग्जिट पोल पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए शिवानंद तिवारी ने कहा कि एग्जिट पोल नहीं एग्जिजेरेटेड पोल है। एक्जेक्ट पोल 23 मई को पता चलेगे। चुनाव के दौरान कई जगहों से खबरें आ रही थी कि इस बार का चुनाव बीजेपी के लिए आसान नहीं रहा है। लेकिन एग्जिट पोल में कोई चैनल महागठबंधन को 2 हीं सीट बता रहे हैं। बिहार के एग्जिट पोल पर सबको आश्चर्य हो रहा है। एग्जिट पोल हमेशा सही नहीं होता। 2015 के विधानसभा चुनाव में एग्जिट पोल में बीजेपी को 100 सीटें मिलती दिखायी जा रही थी जबकि परिणाम वैसे न हीं आए। मीडिया लोकतंत्र का चौथा खंभा है लेकिन राष्ट्रीय मीडिया की भूमिका सही नहीं रही। 500 घंटे पीएम मोदी को दिखाया गया जबकि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को महज 200 घंटे मिले। ऐसे में वोटर सही निर्णय कैसे करेगा। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। पीएम मोदी का दबाव मीडिया पर है।

उन्होंने चुनाव आयोगी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग की भूमिका भी सही नहीं रही। आचार संहिता का उलंघन प्रधानमंत्री करते रहे। अहमदाबाद में रोड शो करते हुए प्रचार करने गये। केदारनाथ यात्रा की तस्वीर कई अखबारों में आयी। 6-7 शिकायतें थी पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ आचार संहिता की। चुनाव आयोग में आचार संहिता पर सर्वसम्मति से फैसला नहीं हुआ। हम संवैधानिक संस्थानों को मजबूत करना चाहते हैं। बिहार में महागठबंधन की स्थिति ठीक-ठाक है।

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