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नीतीश-तेजस्वी, कौन किसको आगे बढ़ा रहा है?

एक दूसरे को आगे तो बढ़ा नहीं सकते लेकिन एक दुसरे को गिरा जरुर सकते हैं नीतीश-तेजस्वी.

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सिटी पोस्ट लाइव : बीजेपी को छोड़ महागठबंधन की सरकार बनाने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (NITISH KUMAR) ये संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि अब उनकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है.वो देश को मोदी से बचाना चाहते हैं.अब तो नीतीश कुमार ने यहाँ तक कह दिया कि वो नौजवानों को बढ़ाने में लगे हैं. ऐसा कहते हुए उन्होंने अपने बगल में खड़े तेजस्वी यादव की तरफ इशारा भी किया. उन्होंने राजनीति में परम त्याग की इच्छा जताते हुए फूलपुर से चुनाव लड़ने के सवाल पर कहते हैं – मेरा कोई पर्सनल च्वॉयस नहीं है, हम तो सबको एक करना चाहते हैं. हमको अपने लिए कुछ नहीं है, देश के लिए च्वॉयस है. नौजवानों को आगे बढ़ाना है. हम तो सबको एक करने में लगे हैं.

बीजेपी के साथ सरकार चलानेवाले नीतीश कुमार दिल्ली से पटना तक यही दावा करते रहे हैं कि उनकी कोई राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा नहीं है, वो सिर्फ बिहार की सेवा करना चाहते हैं. अब अचानक उन्हें देश की चिंता सताने लगी है. हर मौके पर पूछ रहे हैं– देश कहां जा रहा है? लेकिन वो खुद नहीं बता पा रहे कि कहां जा रहा है? अब नीतीश कुमार को लग रहा है कि बिहार में भले एनडीए की रेलगाड़ी में अगला इंजन वही थे लेकिन पिछला इंजन उन्हें पीछे खिंच रहा था. अब नीतीश कुमार को लग रहा है कि 2024 में वो नरेंद्र मोदी के खिलाफ ऐसी हवा बना देंगे कि बिहार में सिंगल इंजन की समाजवादी सरकार बन जाएगी. राजनीति में कुछ भी कहना मुश्किल है. देश का नेता कैसा हो, नीतीश कुमार जैसा हो वाला नारा तो नौ साल पहले भी गूंजा था. लेकिन तबके नीतीश में कितना अब दम बचा है ये बताने की जरुरत नहीं है.

नीतीश कुमार के राजनीति में त्याग और तेजस्वी यादव जैसे नौजवानों को आगे बढाने के ब्यान के क्या निहितार्थ हैं.क्या नीतीश बिहार की कुर्सी तेजस्वी यादव को सौंपने की तैयारी कर रहे हैं.अगर वो राष्ट्रिय राजनीति करना चाहते हैं तो 2023 में इसका ऐलान करना होगा, उन्हें देश को बचाने की मुहिम तेज करनी होगी. नीतीश को लग रहा होगा कि वो भी आगे बढ़ रहे हैं और भतीजा तेजस्वी भी. पर खेल ये है कि नीतीश कुमार बिहार की पॉलिटिक्स से आउट होने जा रहे हैं. और जिसे वो आगे बढ़ाने का दावा कर रहे हैं, वही ये काम कर रहा है.

2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी के साथ वाले फॉर्मूले पर महागठबंधन में 50-50 जैसी सीट शेयरिंग हो सकती है. कमजोर जेडीयू को ये डील देने में तेजस्वी को कोई हिचक नहीं होगी क्योंकि उनकी नज़र 2025 पर है जब विधानसभा चुनाव होंगे.लेकिन ध्यान देने योग्य बात ये है कि अगर नीतीश कुमार को तेजस्वी छांट दें तो भी आज महागठबंधन का कुनबा ऐसा बनता है- RJD-79 + Congress- 19 + Left-16 + Ham -4 + AIMIM-1 + Indepent-1 =120.बहुमत का आंकड़ा – 122. सबसे बड़ा सवाल-जिसको सिर्फ दो सीटों की जरूरत हो वो नीतीश कुमार को मोल-भाव करने देगा क्या ?

तेजस्वी यादव भले अभी न बोलें लेकिन 79 सीटों वाली पार्टी 45 सीटों वाली पार्टी के नेता को आगे बढ़ाने की क्यों सोंचेगी? आज की राजनीति इसकी इजाजत ही नहीं देती. नीतीश कुमार भी राजनीति के चतुर खिलाड़ी हैं.वो ऐसे नेता हैं जिन्होंने अपनी पार्टी में दूसरी पंक्ति का नेता कभी तैयार ही नहीं होने दिया. सतीश कुमार हों या जेपी मूवमेंट के अगुआ जॉर्ज फर्नांडिस, शरद यादव, पीके, पवन वर्मा, आरसीपी सिंह जो आगे बढ़ा उसे नीतीश ने नाप दिया. इसलिए एक-दूजे के लिए दिख रहे नीतीश और तेजस्वी दरअसल एक दुसरे को आगे नहीं बढ़ा रहे बल्कि अपना अपना खेल खेल रहे हैं.दोनों साथ इसलिए हैं क्योंकि दोनों एक दुसरे को आगे भले न बढ़ा पायें एक दुसरे को गिरा जरुर सकते हैं.

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