By, Shrikant Pratyush
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रामविलास की लोक सभा सीट हाजीपुर से उनकी पत्नी रीना पासवान लड़ेंगी चुनाव

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रामविलास की लोक सभा सीट हाजीपुर से उनकी पत्नी रीना पासवान लड़ेंगी चुनाव

सिटी पोस्ट लाइव : इसबार एलजेपी सुप्रीमो रामविलास पासवान लोक सभा चुनाव नहीं लड़ेगें. सिटी पोस्ट लाइव आपको पहले ही बता चूका है कि इसबार वो राज्य सभा जेडीयू के कोटे से जायेगें. उनकी जगह उनकी पत्नी रीना पासवान हाजीपुर से चुनाव लड़ेगी. हमेशा घर-परिवार संभालने वाली अपने पति की सेवा में लगी रहने वाली व्यवहार कुशल रीना पासवान केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के चुनावी विरासत को संभालेगीं . 2019 में होनेवाले लोकसभा चुनाव में बिहार के हाजीपुर सीट से रीना शर्मा उम्मीदवार होंगी.

रामविलास पासवान की शादी रीना शर्मा से 1983 में हुई थी. उस समय रीना एयर हॉस्टेस थीं. कहा जाता है कि हवाई यात्रा के दौरान ही रामविलास पासवान की रीना शर्मा से दोस्ती हुई थी. यह दोस्ती रिश्तेदारी में बदल गई. जमुई के लोजपा सांसद चिराग पासवान इन्हीं दोनों के बेटे हैं. गौरतलब है कि रामविलास पासवान की पहली पत्नी राजकुमारी देवी हैं. उनसे रामविलास ने 1981 में तलाक ले लिया था, जबकि शादी 1960 में हुई थी. पहली पत्नी से पासवान को दो बेटियां हैं.

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चुनावी मामला तब शुरू हुआ, जब यह बात सामने आ गयी कि रामविलास पासवान अब लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे. वे काफी बीमार चल रहे हैं. चुनाव नहीं लड़ने के पीछे बीमारी मुख्य वजह है. ऐसे में सवाल उठने लगा कि हाजीपुर से कौन लड़ेगा. चिराग पासवान जमुई छोड़ने को तैयार नहीं हैं. फिर पशुपति कुमार पारस का नाम आया. लेकिन वो भी लोक सभा चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हुए. पारस अभी नीतीश सरकार में मंत्री हैं.

 

 

रामविलास हमेशा हाजीपुर से चुनाव लड़ते रहे हैं.वो चाहते थे कि  हाजीपुर सीट पर परिवार का ही कोई व्यक्ति खड़ा हो. अब तय हो गया है कि रीना पासवान ही हाजीपुर क्षेत्र से पासवान की राजनीतिक विरासत सम्भालेगीं. पासवान की पार्टी से जुड़े लोगों का कहना है कि भले रीना ने कभी राजनीति में रूचि नहीं दिखाई. लेकिन पासवान के पुरे परिवार से लेकर उनकी पार्टी से जुड़े लोगों का पूरा ध्यान रखती थीं. पार्टी का एक एक कार्यकर्त्ता उनके व्यवहार का मुरीद है. वो पासवान से भी ज्यादा व्यवहार कुशल हैं.

बहरहाल, एलजेपी को एनडीए में कितनी सीटें मिलेगीं, अभीतक तय नहीं है. लेकिन अगर उपेन्द्र कुशवाहा एनडीए से बाहर गए तो उन्हें कम से कम 6 सीटें जरुर मिलेगीं. अगर वो एनडीए के साथ रहे तो सीटों की संख्या 4 हो सकती है. पासवान जेडीयू के कोटे से राज्य सभा जा सकते हैं. वैसे भी पासवान और नीतीश के बीच रिश्ते बहुत बेहतर हो गए हैं. उपेन्द्र कुशवाहा प्रकरण में तो चिराग पासवान ने खुलकर नीतीश कुमार का साथ दिया है.

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