By, Shrikant Pratyush
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exclusive:‘पासवान’ के ‘चिराग’ से निकला सीटों का जिन्न, बीजेपी बोली-‘हुकुम मेरे आका’

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सीट शेयरिंग को लेकर उपेन्द्र कुशवाहा को भाव नहीं देने वाले बीजेपी को लोक जनशक्ति पार्टी ने बैकफुट पर ला दिया। इस मामले में लोक जनशक्ति पार्टी संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान की रणनीति बेहद कारगर साबित रही है। चिराग पासवान इस बार लोजपा के लिए अलाद्दीन के चिराग साबित हुए हैं

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exclusive:‘पासवान’ के ‘चिराग’ से निकला सीटों का जिन, बीजेपी बोली-‘हुकुम मेरे आका’

सिटी पोस्ट लाइवः सीट शेयरिंग को लेकर उपेन्द्र कुशवाहा को भाव नहीं देने वाले बीजेपी को लोक जनशक्ति पार्टी ने बैकफुट पर ला दिया। इस मामले में लोक जनशक्ति पार्टी संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान की रणनीति बेहद कारगर साबित रही है। चिराग पासवान इस बार लोजपा के लिए अलाद्दीन के चिराग साबित हुए हैं जिसने लोजपा को उसके मनमाफिक सीटें दिलवा दी है। चिराग पासवान सीट शेयरिंग पर बीजेपी को डील करने के मामले में उपेन्द्र कुशवाहा के मुकाबले ज्यादा आक्रामक और चतुर साबित हुए हैं। रालोसपा अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने सीट शेयरिंग पर बातचीत करने के लिए बीजेपी को अल्टीमेटम दिया था। बीजेपी ने उनके अल्टीमेटम को भाव नही दिया और उपेन्द्र कुशवाहा बेआबरू होकर एनडीए से रूखसत हुए। लेकिन जब बारी लोजपा की आयी तो बीजेपी की एक नहीं चली है। चिराग पासवान ने बीजेपी को अल्टीमेटम देने की बजाय सीधी धमकी दी।

पहले चिराग पासवान ने बीजेपी को राम और हनुमान जैसे मुद्दों से दूर रहने को कहा फिर ट्वीट कर चेताया की सीटों पर समय रहते फैसला नहीं हुआ तो एनडीए को नुकसान होगा। बाद में नोटबंदी पर बीजेपी से जवाब भी मांग लिया। साफ है कि चिराग ने बीजेपी को संभलने का मौका दिये बगैर सिलसिलेवार तरीके से कई हमले किये। फर्क यही है कि शुरूआती कुछ वक्त में यह धमकी सलाह और नसीहत की तरह लगी और बाद में सधे शब्दों वाली सांकेतिक धमकी। इससे भी एक कदम आगे बढ़कर पटना में लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस से प्रेस काॅन्फ्रेंस करवाकर यह कहलवा दिया कि बीजेपी सम्मान नहीं दे रही और हमारे पास रास्ते खुले हैं। जाहिर है प्रेस काॅन्फ्रेंस भले पशुपति कुमार पारस की थी लेकिन इसके सूत्रधार चिराग पासवान हीं थे। संकेतों में बातचीत करने की बजाय लोजपा ने सीधे अपना दर्द और गुस्सा बयां किया और कहा कि बीजेपी-जेडीयू ने मिलकर आधी-आधी सीटें बांट ली और लोजपा को पूछा तक नहीं, अगर बीजेपी अपने सहयोगियों को सम्मान नहीं दे सकती तो हम बीजेपी के पीछे-पीछे नहीं घूमेंगे। जाहिर है यह रणनीति कारगर साबित हुई। बीजेपी आनन-फानन में डैमेज कंट्रोल की कोशिशों में जुटी।

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समय मांगने पर भी उपेन्द्र कुशवाहा से नहीं मिलने वाले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह रामविलास पासवान और चिराग पासवान के साथ एक घंटे तक बैठक करते हैं। उन्हें मनाने की दूसरी कोशिश भी होती है। बीजेपी के कद्दावर नेता अरूण जेटली पासवान को मनाने पहुंचते हैं और डील फाइनल हो जाती है। सिटी पोस्ट लाइव के पास जो एक्सक्लूसिव जानकारी है उसके मुताबिक लोजपा बीजेपी से 7 सीटें चाहती थी लेकिन बीजेपी ने इस मांग के बदले बिहार में 5 सीट, यूपी में 1 सीट और राज्यसभा की एक सीट देने पर तैयार हो गयी है।

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