By, Shrikant Pratyush
News 24X7 Hour

सांसद निधि: विकास कार्यों का लेखाजोखा सार्वजानिक करने का निर्देश

सांसद कोटे से हुए कामकाज की पूरी प्रोग्रेस रिपोर्ट को आंकड़ों में बांट देते हैं जिला प्राधिकरण  

- sponsored -

0

जिला प्राधिकरण  सांसद कोटे से हुए कामकाज की पूरी प्रोग्रेस रिपोर्ट को आंकड़ों में बांट देते हैं , जिससे जानकारी मांगने वाले को पता नहीं चल पाता कि किस काम को किस हद तक पूरा किया गया. कब तक पूरा होगा और उसकी देरी की वजह क्या है ? ये रिपोर्ट जानकारी देने के बजाए सच पर डालती है पर्दा

Below Featured Image

-sponsored-

सिटी पोस्ट लाईव ; अब सांसद कोटे से होनेवाले कार्यों में धांधली को छुपाना आसान नहीं होगा .दरअसल अभीतक जिला प्राधिकरण  सांसद कोटे से हुए कामकाज की पूरी प्रोग्रेस रिपोर्ट को आंकड़ों में बांट देते हैं , जिससे जानकारी मांगने वाले को पता नहीं चल पाता कि किस काम को किस हद तक पूरा किया गया था. वह काम कितना बचा है , कब तक पूरा होगा और उसकी देरी की वजह क्या है ? ये रिपोर्ट जानकारी देने के बजाए उससे कहीं ज्यादा छिपाती है. उन्होंने कहा कि जिला प्राधिकरण आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ कर जानकारी को छिपाते है और कार्य का चरण, उसका लाभ और लाभार्थियों के बारे में भी कोई बात नहीं करते. इससे सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी को देने में बाधा आती है. सांसद निधि के तहत किए गए विकास कार्यों की जानकारी उपलब्ध कराना जिला प्राधिकरण की जिम्मेदारी है. उन्होंने जिला प्रशासन को विकास कार्यों की प्रगति के बारे में लगातार वेबसाइट पर जानकारी सार्वजनिक करने के निर्देश दिए हैं.

केंद्रीय सूचना आयोग ने सरकार को सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडीएस-सांसद निधि) के तहत किए गए कामों की जानकारी को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है. ये निर्देश ऐसे समय में आए हैं जब सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने सीआईसी को बताया कि वे एमपीएलएडीएस को फंड जारी करता है, लेकिन आंकड़ों के अलावा उसका रिकॉर्ड नहीं रखता.सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने कहा, “मंत्रालय को उपयोग प्रमाणपत्र जिला प्राधिकरण द्वारा भेजा गया है, लेकिन उसकी जानकारी वेबसाइट पर अपलोड नहीं की गई. अभी इस बात का भी पता नहीं है कि इन प्रमाणपत्रों में वास्तविक कामों की जानकारी है या नहीं.” एमपीएलएडीएस के तहत हर सांसद को उनके संसदीय क्षेत्र में विकास कार्य करने के लिए 5 करोड़ रुपए दिए जाते हैं.

गौरतलब है कि एक शख्स प्रशांत जैन ने ग्वालियर लोकसभा क्षेत्र में किए गए कामों को लेकर मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से जानकारी मांगी थी. जैन ने जानना चाहा था कि जनवरी 2015 से अगस्त 2017 के बीच सांसद ने अपने लोकसभा क्षेत्र में कितना फंड किस संस्थान या फिर व्यक्ति को दिया. अपीलकर्ता ने आयोग को बताया कि उसे सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय और जिला प्रशासन से इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई. देश का नागरिक होने के नाते उसे और जनता को सरकारी पैसे के इस्तेमाल के बारे में जानने का पूरा हक है.

-sponsered-

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

-sponsored-

Leave A Reply

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More