By, Shrikant Pratyush
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आज हर नागरिक कह सकता है ‘वन नेशन, वन कंस्टीट्यूशन’ : PM मोदी

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‘सबका साथ, सबका विकास’ का मंत्र लेकर हम चले थे लेकिन 5 साल में ही देशवासियों ने ‘सबका विश्वास’ के रंग से पूरे माहौल को रंग दिया. समस्यों का जब समाधान होता है तो स्वावलंबन का भाव पैदा होता है, समाधान से स्वालंबन की ओर गति बढ़ती है. जब स्वावलंबन होता है तो अपने आप स्वाभिमान उजागर होता है और स्वाभिमान का सामर्थ्य बहुत होता है.उन्होंने कहा कि आर्टिकल 370 और आर्टिकल 35ए का हटना, सरदार पटेल के सपनों को साकार करने की दिशा में अहम कदम है.

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आज हर नागरिक कह सकता है ‘वन नेशन, वन कंस्टीट्यूशन’ : PM मोदी

सिटी पोस्ट लाइव, दिल्ली :  लाल क़िले की प्राचीर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 73वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हर बार की तरह इस बार भी तिरंगा फहराया और भाषण दिया.प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के शुरुआत में देश को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं और देश में बाढ़ की स्थिति पर चिंता जताते हुए आज़ादी के लिए बलिदान दिए लोगों को याद किया.प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में सबसे पहले कश्मीर से हटाए गए अनुच्छेद 370 का ज़िक्र किया. इसके बाद उन्होंने शपथ लेने के 10 हफ़्ते के भीतर तीन तलाक़ का क़ानून बनाना, आतंक से जुड़े क़ानूनों में बदलाव कर उसे मजबूत करने का काम, किसानों को 90 हज़ार करोड़ रुपये ट्रांसफर करने का काम, किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए पेंशन, अलग जलशक्ति मंत्रालय, मेडिकल की पढ़ाई से जुड़े क़ानून की बात की.

प्राधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का भारत कैसा हो इसे देखते हुए आने वाले पांच सालों के कार्यकाल का खाका तैयार किया जा रहा है.इस्लामिक देशों ने तीन तलाक़ क़ानूनों को ख़त्म कर दिया था लेकिन यह देश इस पर कदम उठाने से कतराता रहा.दो तिहाई बहुमत से आर्टिकल 370 हटाने का क़ानून पारित कर दिया. इसका मतलब है कि हर किसी के दिल में यह बात थी लेकिन आगे कौन आए. लेकिन सुधार करने का आपका इरादा नहीं था.

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70 साल हर सरकारों ने कुछ न कुछ प्रयास किया लेकिन इच्छित परिणाम नहीं मिले. ऐसे में नए सिरे से सोचने की ज़रूरत होती है. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के नागरिकों का सपना पूरा हो यह हमारी दायित्व है.130 करोड़ की जनता को इस ज़िम्मेदारी को उठाना है. पिछले 70 सालों में वहां आतंकवाद, अलगाववाद, परिवारवाद, भ्रष्टाचार की नींव को मजबूत करने का काम किया गया है.

लाखों लोग विस्थापित हो कर आए उन्हें मानविक अधिकार नहीं मिले. पहाड़ी भाइयों की चिंताएं दूर करने की दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं. भारत की विकास यात्रा में जम्मू-कश्मीर बड़ा योगदान दे सकता है. नई व्यवस्था नागरिकों के हितों के लिए काम करने के लिए सीधे सुविधा प्रदान करेगी.

‘सबका साथ, सबका विकास’ का मंत्र लेकर हम चले थे लेकिन 5 साल में ही देशवासियों ने ‘सबका विश्वास’ के रंग से पूरे माहौल को रंग दिया. समस्यों का जब समाधान होता है तो स्वावलंबन का भाव पैदा होता है, समाधान से स्वालंबन की ओर गति बढ़ती है. जब स्वावलंबन होता है तो अपने आप स्वाभिमान उजागर होता है और स्वाभिमान का सामर्थ्य बहुत होता है.उन्होंने कहा कि आर्टिकल 370 और आर्टिकल 35ए का हटना, सरदार पटेल के सपनों को साकार करने की दिशा में अहम कदम है.

आज देश में आधे से अधिक घर ऐसे हैं जिनमें पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं है. उनके जीवन का बहुत हिस्सा पानी लाने में खप जाता है. इस सरकार ने हर घर में जल, पीने का पानी लाने का संकल्प किया है.आने वाले दिनों में जल जीवन मिशन को लेकर आगे बढ़ेंगे. इसके लिए केंद्र और राज्य मिल कर साथ काम करेंगे. साढ़े तीन लाख करोड़ से भी ज़्यादा इस पर खर्च करने का संकल्प किया है.

वर्षा के पानी को रोकने, समुद्री पानी, माइक्रो इरिगेशन, पानी बचाने का अभियान, सामान्य नागिरक सजग हो, बच्चों को पानी के महत्ता की शिक्षा दी जाए, 70 साल में जो काम हुआ है अगले पांच वर्षों में उससे पांच गुना अधिक काम हो, इसका प्रयास करना है.

भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए हमें ग़रीबी से मुक्त होना ही है और पिछले 5 वर्षों में ग़रीबी कम करने की दिशा में, ग़रीबों को ग़रीबी से बाहर लाने की दिशा में बहुत सफल प्रयास हुए हैं. देश को नई ऊंचाइयों को पार करना है, विश्व में अपना स्थान बनाना है और हमें अपने घर में ही ग़रीबी से मुक्ति पर बल देना है और ये किसी पर उपकार नहीं है.

जैन मुनि महुड़ी ने लिखा है- एक दिन ऐसा आएगा जब पानी किराने की दुकान में बिकता होगा. 100 साल पहले उन्होंन यह लिखा. आज हम किराने की दुकान से पानी लेते हैं. न हमें आगे बढ़ने से हिचकिचाना है. जल संचय का यह अभियान सरकारी नहीं बनना चाहिए, जन सामान्य का अभियान बनना चाहिए.

अब हमारा देश उस दौर में पहुंचा है जिसमें बहुत सी बातों को लेकर अपने को छुपानी की ज़रूरत नहीं है. वैसा ही एक विषय है- हमारे यहां बेतहाशा जनसंख्या विस्फोट हो रहा है, जो आने वाली पीढ़ी के लिए संकट पैदा करता है. हमारे देश में एक जागरूक वर्ग है जो इस बात को भली भांति समझता है. वो अपने घर में शिशु को जन्म देने से पहले सोचता है कि उसकी मानवीय आवश्यकता को पूरा कर पाउंगा या नहीं. वो लेखा जोखा करके एक छोटा वर्ग परिवार को सीमित करके अपने परिवार का भला करता है और देश के लिए योगदान देता है. छोटा परिवार रख कर भी वो देशभक्ति का काम करता है. यह परिवार लगातार आगे प्रगति करता है, उनसे हम सीखें. किसी भी शिशु के आने से पहले यह सोचें की उसे वह कैसी भविष्य देंगे. जनसंख्या विस्फोट की चिंता करनी ही होगी. राज्य, केंद्र सभी को यह दायित्व निभानी होगी.

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने सुबह देशवासियों को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने लिखा, “सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं. जय हिंद.”

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