By, Shrikant Pratyush
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चुनाव को लेकर सियासी दलों ने जीत का फॉर्मूला सेट करने पर काम शुरू कर दिया है

गिरिडीहः भाजपा में टिकट के दावेदारों की भरमार

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विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी दलों ने जीत का फॉर्मूला सेट करने पर काम शुरू कर दिया है। जहां एक ओर लोकसभा चुनाव के परिणाम से विपक्ष अभी भी पूरी तरह उबर नहीं पाया है, कांग्रेस के भीतर अभी भी उहापोह की स्थिति बनी हुई है।

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चुनाव को लेकर सियासी दलों ने जीत का फॉर्मूला सेट करने पर काम शुरू कर दिया है

सिटी पोस्ट लाइव, गिरिडीह: विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी दलों ने जीत का फॉर्मूला सेट करने पर काम शुरू कर दिया है। जहां एक ओर लोकसभा चुनाव के परिणाम से विपक्ष अभी भी पूरी तरह उबर नहीं पाया है, कांग्रेस के भीतर अभी भी उहापोह की स्थिति बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर पिछले पांच साल में भाजपा एक नये रूप में उभरकर सामने आई है, जिस पर जनता का भरोसा बढ़ा है। जिसके कारण पार्टी में हर विधानसभा सीट पर टिकट के लिए एक अनार सौ बीमार वाली स्थिति बन गई है। गिरिडीह जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर भी फिलहाल ऐसी ही स्थिति दिखाई पड़ रही है। भाजपा से टिकट के दावेदारों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। इनमें पार्टी के नये-पुराने कैडर, संघ के स्वयंसेवकों के अलावा डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, शिक्षक, व्यवसायी, पत्रकार एवं छात्र-मजदूर संगठनों के नेता शामिल हैं। इनमें कुछ कई ऐसे भी शामिल हैं, जिन्हें टिकट पा जाने का पूरा भरोसा है। टिकट के दावेदारों में कुछ ऐसे लोग भी हैं। जिनका राजनीतिक इतिहास दल-बदल का रहा है। जिन्हें एक समय भगवा रंग से एलर्जी हुआ करती थी पर अब भगवा कुर्ते-जैकेट से परहेज नहीं है। गिरिडीह जिले में छह विधानसभा सीटें हैं। 2014 के चुनाव में छह में से चार सीटें गिरिडीह, गाण्डेय, बगोदर और जमुआ (स़ुरक्षित) पंर कमल खिला था। इसबार इनमें से दो सीटों पर प्रत्याशी बदलने की चर्चा है। जबकि दो अन्य सीटें डुमरी और धनवार में 2019 के चुनाव में कमल खिलाने को लेकर भाजपा प्रदेश आलाकमान गंभीरता से काम कर रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक डुमरी और धनवार में पार्टी वैसे नेताओं को प्रत्याशी बनाने की पक्षधर है, जिसका क्षेत्र में सामाजिक और जातीय जनाधार हो, साफ-सुथरी छवि हो एवं चुनावी प्रबंधन में माहिर हो। 2014 के विधानसभा चुनाव में गिरिडीह में निर्भय शाहाबादी ने जीत दर्ज की थी, इसबार प्रमुख दावेदारों में दिनेश कुमार यादव, पूनम प्रकाश, ई. विनय सिंह, विनोद कुमार व कई अन्य हैं। गाण्डेय सीट से पिछली बार प्रोफेसर जयप्रकाश वर्मा जीते थे। इसबार प्रमुख दावेदार पूर्व विधायक लक्ष्मण स्वर्णकार, प्रणव वर्मा व अन्य शामिल हैं। बगोदर विधानसभा सीट पर विगत चुनाव में नगेन्द्र महतो जीते थे। इसबार प्रमुख दावेदार प्रदीप मंडल व प्रमेश्वर मोदी व अन्य हैं। जमुआ (स़ुरक्षित) सीट पर 2014 में कद्दावर भाजपा नेता केदार हाजरा जीते थे। इसबार टिकट की दौड़ में कामेश्वर पासवान एवं दारा हाजरा के नामों की चर्चा है। डुमरी सीट पर विगत चुनाव में मोदी लहर के बावजूद भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े लालचन्द महतो को भारी मतों के अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा था। इसबार भाजपा के पूर्व जिला प्रमुख प्रशान्त जयसवाल और निर्मल महतो के नामों की चर्चा है। राजधनवार सीट पर भी विगत चुनाव में भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मण प्रसाद सिंह को मोदी की सुनामी के बावजूद करारी हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा की खास सीटों में शुमार धनवार में 2014 में भाजपा को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा था। इसबार धनवार सीट पर टिकट की दौड़ में पूर्व सांसद रविन्द्र राय, लक्ष्मण सिंह, पार्टी के जिला प्रमुख सुनील अग्रवाल एवं पत्रकार शाद्वल कुमार के नामों की चर्चा है।

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