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क्राउड फंडिंग से राजनीति करेंगे प्रशांत किशोर.

बोले- 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मदद से चल रहा जनसुराज अभियान, भ्रष्टाचार के पैसे से नहीं.

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सिटी पोस्ट लाइव : देश के जानेमाने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत ने अपने जन सुराज यात्रा पर खर्च हो रहे पैसे को लेकर उठाये जा रहे सवाल का जबाब दे दिया है.उन्होंने कहा है कि जन सुराज अभियान का खर्च देश के छह मुख्यमंत्री उठा रहे हैं.उन्होंने कहा कि इस अभियान को राजनीतिक रूप देना है, उसके लिए क्राउड फंडिंग का एक बड़ा प्लेटफार्म तैयार करेंगे. प्रशांत किशोर ने कहा कि वो पारदर्शी तरीके से लोगों से पैसे लेंगे और उसके उन पैसों से पार्टी स्थापित करके बिहार की राजनीति में बदलाव लाएंगे.

इस दौरान प्रशांत किशोर ने RJD, JDU और BJP पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पिछले 10 सालों में जिन नेताओं और दलों के लिए काम किया है, उनसे एक रुपए भी नहीं लिए। उनमें से 6 अभी मुख्यमंत्री हैं. वे लोग ही जन सुराज अभियान के लिए शुरुआती मदद कर रहे हैं. आगे कुछ दिनों में क्राउड फंडिंग का एक बड़ा प्लेटफॉर्म तैयार कर रहे हैं. बिहार के लोग अपनी ओर से छोटा योगदान देकर भी इस पूरे प्रक्रिया में अपना योगदान दे पाएंगे. बिहार की जनसंख्या 13 करोड़ है. अगर बिहार के 2 करोड़ लोग भी 100-100 रुपए देंगे तो 200 करोड़ रुपए हो जाएगा और जनता के पैसों से ही जन सुराज का अभियान आगे चलेगा.

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कहा कि जिस तरह से वह जन सुराज अभियान चला रहे हैं उसे चलाने के लिए पैसे भी लगेंगे. उन्होंने ने कहा कि हमने देश में 11 चुनाव लड़वाए हैं जिनमें से 10 जीते भी हैं. 6 राज्यों के मुख्यमंत्री हमारी इस अभियान में मदद कर रहे हैं.प्रशांत किशोर ने आगे बताया कि कि मैं इस जन सुराज अभियान में बहुत ज्यादा पैसे खर्च नहीं कर रहा हूं. RJD, JDU और BJP की तरह लोगो को भीड़ जुटाने के लिए, हेलिकॉप्टर से उड़ने के लिए, बड़ी गाड़ियों से चलने के लिए और बड़ी सभा करने में पैसे खर्च होते है. जो मैं नही कर रहा है. मैं पैदल चलता हूं, सड़क किनारे छोटी सभाएं करता हूं, और लोगों कभी गाड़ी भर-भर के नही बुलाता हूं. पीके ने बताया कि मैं RJD, JDU और BJP की तरह भ्रष्टाचार करके पार्टी के लिए पैसे की व्यवस्था नहीं करूंगा. मैं क्राउड फंडिंग के जरिए लोगों से पैसे लूंगा और पारदर्शी तरीके से पार्टी चलाने में बिहार के लोगों की मदद लूंगा.

आज जब प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति में फिर अपना मुकाम देखने लगे हैं तो उनके साथ युवाओं की फौज भी नेता बनने के सपने देखने लगी है. रिटायर्ड अफसर-कर्मचारी, वकील, समाज सेवियों में भी नेता बनने की उम्मीद जगी है. राजनीति से जुड़े लोग, जिन्हें कभी चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला या फिर RJD, JDU और बीजेपी जैसी पार्टियों में हाशिए पर हैं, उन्हें भी अवसर दिखने लगा है.पीके बिहार में 3500 किलोमीटर की यात्रा करेंगे। दावा है कि हर पंचायत, कस्बा और शहर में जाकर लोगों से मिलेंगे। यात्रा सवा साल से लेकर डेढ़ साल तक चल सकती है.

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