By, Shrikant Pratyush
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प्रशांत किशोर जी छोड़िये नीतीश का साथ, शिवानन्द तिवारी ने राजद में आने का दिया ऑफर

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जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने युवाओं को मौक़ा देने और एमपी, विधायक बनाने को लेकर बात क्या कह दी कि बिहार का सियासी पारा बढ़ गया है.

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प्रशांत किशोर जी छोड़िये नीतीश का साथ, शिवानन्द तिवारी ने राजद में आने का दिया ऑफर

सिटी पोस्ट लाइव : जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने युवाओं को मौक़ा देने और एमपी, विधायक बनाने को लेकर बात क्या कह दी कि बिहार का सियासी पारा बढ़ गया है. एक तरफ जहां प्रशांत किशोर अपनी ही पार्टी के निशाने को झेल रहे हैं तो दूसरी तरफ राजद के नेताओं की तरफ से ऑफर की बरसात होने लगी है. पहले भाई बिरेंन्द्र ने इसे लेकर विपक्ष पर हमला बोला तो अब वहीं  राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानन्द तिवारी ने सीएम नीतीश कुमार का साथ छोड़ देने की सलाह दे दिया. आपको बता दें कि प्रशांत किशोर ने युवाओं से कहा था कि जब वे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री बना चुके हैं, तो युवाओं को भी सासंद-विधायक बना सकते हैं.

शिवानंद तिवारी ने अपने फेसबुक पोस्‍ट में नीतीश कुमार पर अहंकारी होने का आरोप लगाया है. उन्होंने काहा कि नीतीश कुमार किसी को अपना स्वतंत्र विचार नही रखने देते हैं. उनके पास कोई भी स्वाभिमानी व्यक्ति नही टिक सकता है. उन्होंने पूछा कि क्या जरूरी है कि उनके हर विचार से प्रशांत किशोर का विचार मेल खाये. प्रशांत किशोर हर मसले पर अपनी स्वतंत्र राय रखते हैं. आगे शिवानन्द तिवारी ने इशारो ही इशारो में प्रशांत किशोर को राजद में आने का न्योता भी दे दिया . उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर का नाम एवं शोहरत दूर -दूर तक फ़ैल चुकी है ,इसलिए उनका कहीं भी स्वागत होगा.

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हाल में दिए गये कई राजनीतिक बयानों को भी देखें तो साफ़ पता चलता है कि जेद्यू और प्रशांत किशोर में सब कुछ ठीक -ठाक नही है. बेगूसराय के शहीद पिंटू सिंह को जब सरकार और पार्टी की ओर से कोई श्रद्धांजलि देने नहीं गया, तब उन्‍होंने बड़ा बयान देते हुए सरकार और जदयू की तरफ से माफी मांगी. बाद में खुद नीतीश कुमार शहीद पिंटू सिंह को श्रद्धांजलि देने बेगूसराय के ध्यानचक्की गांव में गए तो अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर करते हुए लिखा- एंड द फॉलोअप .ट्वीट से साफ है कि प्रशांत यह बता रहे हैं कि उनके बयान के बाद ही नीतीश कुमार शहीद पिंटू सिंह को श्रद्धांजलि देने उनके घर गए.

मामला तब और टूल पकड़ने लगा जब चुनावी रणनीतिकार पी.के ने यह कह दिया कि नीतीश कुमार को महागठबंधन छोड़ने के बाद भाजपा के साथ  नहीं बल्कि लोगों के बीच जाकर फ्रेश मैन्डेट लेना चाहिए था. फिर तो जेडयू के कद्दावर नेता आर सी पी सिंह भी कूद गयें और उन्होंने कहा कि यह उनकी निजी राय है तथा वे उस समय वे पार्टी में नहीं थे. इसलिए उन्हें उस समय के फैसले के बारे में जानकारी नहीं है. जबकि  जेडयू प्रवक्ता नीरज कुमार  ने कहा  कि – जनता एवं पार्टी किसी को सांसद-विधायक बनाती है .किसी को कोई नही बनाता है. उनकी पार्टी के रोल मॉडल नीतीश कुमार हैं .

आपको बता दें कि पटना के गांधी मैदान में बीते तीन मार्च को पटना में हुई पीएम मोदी की रैली में पी.के कहीं नहीं दिखे थे. सूत्रों के अनुसार उन्‍हें जदयू की ओर से रैली के लिए उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई थी. इसे भी उनके खिलाफ पार्टी में गहराते असंतोष के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि उनके खिलाफ पार्टी में असंतोष तब से ही था जब उन्हें नीतीश कुमार ने जेडयू में पार्टी का दूसरा बड़ा पद दे दिया गया था. लेकिन नीतीश कुमार के खिलाफ किसी को बोलने कि हिम्मत नही थीं. लेकिन जब प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार पर सीधा हमला बोला तो विरोधियों को पी.के पर हमले का मौक़ा मिल गया.

खबर यह भी है कि प्रशांत किशोर अगले 10 साल तक कोई चुनाव नहीं लडेंगे.  हालांकि, प्रशांत किशोर की तरफ से इसपर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है. बता दें कि पहले उनके बक्‍सर से जदयू के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चा होती थी. इस सीट पर भाजपा का कब्जा है. वहां से केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे सांसद हैं .

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