By, Shrikant Pratyush
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प्रशांत किशोर की हुई बिहार वापसी, सियासत की खबर और कैमरों की नजर से क्यों दूर हैं ‘पीके’?

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जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर अचानक अंर्तध्यान हो जाते हैं और अचानक प्रकट हो जाते हैं। उनके बारे में यह बात अब आम हो चुकी है कि ‘पीके’ का यही अंदाज है। बिहार में सत्ताधारी जेडीयू में नंबर दो की हैसियत रखने वाले प्रशांत किशोर चुनाव के दौरान नजर नहीं आ रहे थे।

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प्रशांत किशोर की हुई बिहार वापसी, सियासत की खबर और कैमरों की नजर से क्यों दूर हैं ‘पीके’?

सिटी पोस्ट लाइवः जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर अचानक अंर्तध्यान हो जाते हैं और अचानक प्रकट हो जाते हैं। उनके बारे में यह बात अब आम हो चुकी है कि ‘पीके’ का यही अंदाज है। बिहार में सत्ताधारी जेडीयू में नंबर दो की हैसियत रखने वाले प्रशांत किशोर चुनाव के दौरान नजर नहीं आ रहे थे। वे सियासत की खबर भी गायब थे और कैमरों की नजर से भी। जाहिर है यह सवाल लाजिमी था कि आखिर ‘पीके’ कहां गायब हो गये और जिस पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उस पार्टी के चुनावी कार्यक्रमों की भूमिका से उन्होंने खुद को अलग क्यों रखा है? इस सवाल का जवाब ढूंढने की कोशिश हुई तो यह खबर सामने आयी कि प्रशांत किशोर आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस के लिए रणनीति बना रहे हैं।

लंबे वक्त से वे वाईएसआर कांग्रेस के नेता जगनमोहन रेड्डी की रणनीतिकार की भूमिका में रहे हैं। कहा जा रहा है कि प्रशंात किशोर में अपना काम कर दिया है और सर्वे में यह बात सामने आ रही है कि आंध्र प्रदेश में जगनमोहन रेड्डी एक बड़ी ताकत के रूप में उभर रहे हैं, सीटों के रूप में उन्हें 2019 में बेहिसाब फायदा मिलने जा रहा है। जगनमोहन रेड्डी का काम आसान कर प्रशंात किशोर बिहार लौट गये हैं।

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‘पीके’ की बिहार वापसी को लेकर जो खबर आ रही है उसके मुताबिक वे 4 दिन पहले बिहार लौटे हैं जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर पार्टी में जो उनकी भूमिका है उसे निभा रहे हैं। हांलाकि स्थिति अब भी वही है कि जेडीयू में चुनाव के दौरान प्रत्यक्ष तौर पर उनकी कोई भूमिका नजर नहीं आ रही। वे बिहार लौट तो आए हैं लेकिन अब भी सियासत की खबरों में पीके नहीं है, कैमरे की नजर में भी वे नहीं है लेकिन खबर यह भी है कि वे काम कर रहे हैं इस काम का जेडीयू को क्या फायदा मिलता है यह आगे देखना होगा।

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