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जहरीली शराब से मौत के लिए शराबबंदी कानून जिम्मेदार नहीं : मद्य निषेध मंत्री

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सिटी पोस्ट लाइव : पिछले कुछ महीनों में जहरीली शराब से दर्जनों लोगों की मौत हो गई. जिसके बाद विपक्ष इस मौत का कारण बिहार में शराबबंदी कानून को बताने में लगे हैं. विपक्ष का कहना है कि शराबबंदी नहीं होती तो बिहार में लोग जहरीली शराब पीकर मौत के गाल में नहीं जाते. यही नहीं सेहत बिगाड़ने पर वे अस्पताल में जाते, लेकिन शराबबंदी कानून की वजह से वे डर से घर में ही दम तोड़ने को मजबूर हो जाते हैं.

वहीं चर्चा का बाजार गर्म है कि सरकार जल्द ही शराबबंदी कानून में संशोधन कर सकती है. हालांकि पहले किसी भी मंत्री ने इसे लेकर स्वीकार नहीं किया था, लेकिन अब मद्य निषेध मंत्री सुनील कुमार ने संशोधन की बात स्वीकार की है. वहीं सोमवार को पटना में कहा कि जहरीली शराब से हुई मौतों का शराबबंदी कानून से कहीं से कुछ लेना देना नहीं है. मंत्री ने स्पष्ट किया कि 2016 में शराबबंदी कानून लागू होने के पहले भी बिहार समेत दूसरे राज्यों में जहरीली शराब से मौतें होती रही हैं.

मंत्री सुनील कुमार ने उदाहरण देते हुए कहा कि भोजपुर में 2012-13 में 21 लोगों की मौत हुई थी. कैमूर में 2019 में 4 , 1998 में कटिहार में 35 लोगों की मृत्यु हुई थी. मंत्री ने दूसरे राज्यों का भी उदाहरण दिया और कहा कि पंजाब में 2020 में 10 से 12 लोगों की मौत हुई थी. यूपी में 2013 में आजमगढ़ में 40 लोगों की मौत हुई थी. कर्नाटक में 2008 में 345 लोगों की मौत हुई थी. मंत्री ने बताया कि जहरीली शराब से मौत का मुख्य कारण आर्थिक है. मंत्री का दावा है कि चंद धंधेबाज गलत तरीके से शराब बनाते हैं और आर्थिक रूप से कमजोर लोग इसे खरीदते हैं क्योंकि ऐसे शराब की कीमत कम होती है.

वहीं बिहार में शराबबंदी कानून में संशोधन किए जाने की बात को स्वीकार करते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि शराबबंदी कानून को लागू हुए 5 साल से अधिक हो गए हैं, ऐसे में इस सामाजिक कानून को समय के हिसाब से बदलने पर मंथन चल रहा है. सुनील कुमार ने कहा कि इस बारे में अंतिम तौर पर कानून के विशेषज्ञों से बातचीत करके ही फैसला लेना है. जाहिर है बिहार में शराबबंदी कानून पर सीएम नीतीश सख्त हैं. ऐसे में अगर संशोधन भी होता है है. शराब बिहार में बिकने वाली नहीं है. लेकिन लोगों को जेल जाने से जरुर राहत दी जा सकती है.

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