By, Shrikant Pratyush
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रघुवंश प्रसाद ने जगदानंद सिंह को फिर सुनाया-‘मिलिट्री शासन नहीं चलेगा, बयान पड़ सकता है भारी’

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आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह अपनी हीं पार्टी की कार्यशैली से नाराज हैं और खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर भी कर रहे हैं। पहले उन्होंने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को चिट्ठी लिखी जिसमें राजद की कमेटियों के गठन नहीं होने पर सवाल उठाये। इसके बाद उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह पर हमला किया और कहा कि जगदानंद सिंह उनके मालिक नहीं है।

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रघुवंश प्रसाद ने जगदानंद सिंह को फिर सुनाया-‘मिलिट्री शासन नहीं चलेगा, बयान पड़ सकता है भारी’

सिटी पोस्ट लाइवः आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह अपनी हीं पार्टी की कार्यशैली से नाराज हैं और खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर भी कर रहे हैं। पहले उन्होंने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को चिट्ठी लिखी जिसमें राजद की कमेटियों के गठन नहीं होने पर सवाल उठाये। इसके बाद उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह पर हमला किया और कहा कि जगदानंद सिंह उनके मालिक नहीं है। रघुवंश प्रसाद सिंह के तेवर अब भी नरम नहीं है। उन्होंने एक बार फिर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह को खूब सुनाया है। सिटी पोस्ट लाइव से बातचीत करते हुए रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि देर हो रही है। पार्टी की कमेटियां गठित हो जानी चाहिए थी लेकिन अब तक नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि राजनीति में आत्मानुशासन चलता है मिलिट्री शासन नहीं चलता। पार्टी में लोग रहेंगे तभी अनुशासन रहेगा यह गरीबों की पार्टी है। रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि पार्टी में किसी बात को लेकर कोई चर्चा नहीं हो रही है। कोई विमर्श नहीं हो रहा है ऐसे में मीडिया के सामने हीं अपनी बात रखने का रास्ता बच जाता है। ऐसे सवालों पर मैं बोलता रहा हूं और बोलता रहूंगा। मैं वाजिब चीजों पर अपनी बात रखता हूं कोई राजनीतिक बयान नहीं देता।

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रघुवंश प्रसाद सिंह ने जगदानंद सिंह को यह नसीहत भी दी है महागठबंधन के सहयोगियों को झिड़क देना सही नहीं है उनसे बैठकर बातचीत की जानी चाहिए। जिसको रहना है रहे जिसको जाना है जाय वाला बयान पार्टी को भारी पड़ सकता है। रघुवंश प्रसाद सिंह ने यह भी स्वीकार किया कि पार्टी में बड़े नेताओं की उपेक्षा हो रही है और उनसे कोई राय नहीं ली जा रही है। उन्होेेने कहा कि ट्वीट करने से बहुत फायदा नहीं है लोगों से बातचीत होनी चाहिए। सबकी सुनी जानी चाहिए तब फैसला लिया जाना चाहिए।

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