By, Shrikant Pratyush
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रामा सिंह ने खोला ‘पासवान’ के खिलाफ मोर्चा, कहा-‘करारी हार दिलाएंगे’

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दोस्त जब दुश्मन बनते हैं तो और खतरनाक हो जाते हैं। कम से कम सियासत में यह बात प्रासंगिक है क्योंकि अक्सर सियासी दोस्ती जब दुश्मनी में बदल जाती है राजनी तिक लड़ाई और भीषण हो जाती है। 2014 में लोजपा के टिकट पर वैशाली से चुनाव जीतने वाले रामा सिंह वैसे हीं सियासी किरदारों में से एक हैं जिन्होंने अपनी पुरानी दोस्ती से तौबा की है और दुश्मनी निभाने पर उतारू हैं।

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रामा सिंह ने खोला ‘पासवान’ के खिलाफ मोर्चा, कहा-‘करारी हार दिलाएंगे’

सिटी पोस्ट लाइवः दोस्त जब दुश्मन बनते हैं तो और खतरनाक हो जाते हैं। कम से कम सियासत में यह बात प्रासंगिक है क्योंकि अक्सर सियासी दोस्ती जब दुश्मनी में बदल जाती है राजनी तिक लड़ाई और भीषण हो जाती है। 2014 में लोजपा के टिकट पर वैशाली से चुनाव जीतने वाले रामा सिंह वैसे हीं सियासी किरदारों में से एक हैं जिन्होंने अपनी पुरानी दोस्ती से तौबा की है और दुश्मनी निभाने पर उतारू हैं। दरअसल रामा सिंह लोजपा का टिकट चाहते थे नहीं मिला तो बागी हो गये। उम्मीद थी कि राजद शिवहर से टिकट दे देगी वहां से भी निराशा हाथ लगी। अब रामा सिंह ने हाजीपुर से लोजपा उम्मीदवार पशुपति कुमार पारस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रामा सिंह ने कहा कि पशुपति पारस की हाजीपुर में हार ऐतिहासिक होगी. बता दें कि पशुपति कुमार पारस, रामविलास पासवान के भाई और बिहार सरकार में मंत्री हैं.

मुकाबला राजद के शिवचंद्र राम से है.एक जन सभा को संबोधित करते हुए रामा सिंह ने कहा कि हाजीपुर से पशुपति कुमार पारस कन्फर्म हार रहे हैं. लेकिन, उनकी हार को ऐतिहासिक बनाना है. बता दें कि रामा सिंह पहले रामविलास पासवान के बहुत करीब थे. लेकिन 2014 में चुनाव जीतने के बाद रिश्ते में खटास आ गई. 2019 में चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. जिस वजह से रामा सिंह नाराज चल रहे हैं.

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रामा सिंह की जगह लोजपा ने वैशाली में जदयू के विधान पार्षद दिनेश सिंह की पत्नी वीणा देवी को उम्मीदवार बनाया है. गौर करने की बात ये है कि रामा सिंह अपने संबोधन में पशुपति पारस की हाजीपुर में हार को ऐतिहासिक बनाने की बात जरुर कर रहे हैं, लेकिन किसे जिताना है, नहीं बोले हैं. हाजीपुर रिजर्व सीट है, जिस पर पहले रामविलास पासवान लड़ते रहे हैं.

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