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सम्राट चौधरी बनेगें बिहार के सम्राट, जानिये इनसाइड स्टोरी.

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सिटी पोस्ट लाइव : बीजेपी बिहार में सबसे ज्यादा ध्यान “लव-कुश” समीकरण पर दे रही है.इसी समीकरण की वजह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में पिछले डेढ़ दशक से बैलेंसिंग फैक्टर बने हुए हैं. लव मतलब कुर्मी जिस बिरादरी से नीतीश कुमार आते हैं और कुश का सम्बन्ध कुशवाहा जाति से है.कुर्मी महज दो फिअस हैं लेकिन कुशवाहा मुस्लिम यादव के बाद सबसे ज्यादा संख्या में हैं.इस लव-कुश समीकरण को साध कर ही नीतीश कुमार सत्ता में बने हुए हैं.बीजेपी ने सम्राट चौधरी के हाथ में प्रदेश की पार्टी की कमान इसी मकसद से दिया है.

अभी तो सम्राट को केवल प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी मिली है.लेकिन जिस तरह से उनका सोमवार को पटना में जबरदस्त स्वागत हुआ, उसके मतलब भी खास हैं. जिस तरह से सम्राट चौधरी का स्वागत किया गया वो किसी मुख्यमंत्री उम्मीदवार से कम नेता का नहीं लग रहा था.जिस दिन सम्राट चौधरी ने शपथ ली कि वो अपनी पगड़ी उसी दिन उतारेंगे, जिस दिन राज्य की सत्ता ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उखाड़ फेंकेंगे उसी दिन अमित शाह की नजर में खास बन गये थे. इस बड़ी शपथ ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को अपनी ओर आकर्षित किया और अब सम्राट को एक बड़ी जिम्मेदारी देने की ओर बीजेपी कदम बढ़ा रही है.अगर लोक सभा चुनाव में वो सफल रहे तो विधान सभा चुनाव में वो पार्टी के मुख्यमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार हो जायेगें.

सम्राट चौधरी के स्वागत में दो केंद्रीय मंत्री, कई सांसद,कई पूर्व अध्यक्ष के साथ विधायकों और एमएलसी की फौज लगी थी उससे उनका आभामंडल बड़ा नजर आया. केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, अश्वनी चौबे, पूर्व अध्यक्ष संजय जायसवाल, राधामोहन सिंह, भीखू दलसानिया, रवि शंकर प्रसाद, मंगल पांडे जैसे नेता जिसके स्वागत में हों, उसे निश्चित रूप से बड़ा काम सौंपा गया होगा.राजनीतिक गलियारों की बात करें तो चर्चा यह है कि सम्राट चौधरी के स्वागत को ले कर प्रदेश भाजपा नेताओं के पास अमित शाह का फरमान आया था. यही वजह है कि तमाम आंतरिक मतभेद के बावजूद यह भाजपा का अब तक का सबसे बड़ा शो हुआ, जिसमें लगभग सभी जाति के कद्दावर नेताओं ने शिरकत की। यह संदेश भी सम्राट चौधरी के कद को बड़ा करने का कारण बना.

बिहार पिछड़ी जाति की राजनीति का गढ़ रहा है. पिछड़ी जाति में यादव के बाद कुशवाहा का वोट बैंक सबसे बड़ा है. पहले लव कुश की राजनीति की विरासत जगदेव प्रसाद ,शकुनी चौधरी, तुलसीदास मेहता के हाथों में थी. 2005 के बाद लव कुश की विरासत के ध्वज वाहक नीतीश कुमार बने. भाजपा की उम्मीद है कि सम्राट चौधरी अपने प्रयास से लव कुश की बागडोर संभालें. अब इस मुहिम में अगर वो सफल हों जाते हैं तो विधान सभा चुनाव में पार्टी उनके ऊपर ही डाव खेलेगी.

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