By, Shrikant Pratyush
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तीन तलाक पर CM नीतीश कुमार ने दे दिया है PM मोदी का साथ, क्या है इसका मतलब

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तीन तलाक पर CM नीतीश कुमार ने दे दिया है PM मोदी का साथ, क्या है इसका मतलब

सिटी पोस्ट लाइव : विपक्ष के तमाम विरोध के वावजूद तीन तलाक बिल का पास हो जाना ये साबित करता है कि जेडीयू एक तरफ ये संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह अल्पसंख्यकों के साथ खडी है वहीँ दूसरी तरफ NDA के साथ मजबूती के साथ बने रहने का संदेश भी दे रही है.गौरतलब है कि कांग्रेस समेत बिल का विरोध करने वाले दलों के सदस्यों की संख्या 108 थी. लेकिन इनमें से JDU के 6 सदस्यों समेत कई दलों ने सदन से वॉक आउट कर दिया जिसकी वजह से बिल पास हो गया. बिल के समर्थन में 99 तो विरोध में 84 वोट पड़े. इसके पास होने में कई क्षेत्रीय दलों ने बड़ी भूमिका निभाई है जिसमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) भी शामिल रही है.

JDU के वाकआउट को लेकर ये सवाल उठाना लाजिमी है कि क्या JDU-BJP के बीच अंदरुनी तकरार की खबरें निराधार हैं? दरअसल JDU के राज्यसभा सांसदों के बिल के खिलाफ मतदान से यह बिल पास करने से मुश्किल स्थिति आ सकती थी. लेकिन, CM  नीतीश कुमार के निर्देश पर ही पार्टी के सभी सांसदों ने खिलाफ में वोटिंग न कर सदन का बायकॉट कर दिया. जाहिर है इससे बिल के राज्यसभा में पारित होने का रास्ता भी आसान हो गया.

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गौरतलब है कि राज्यसभा में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के पास करीब 99 सीट है और 99 वोट ही तीन तलाक बिल के पक्ष में डाले गए. वहीं, कांग्रेस समेत बिल का विरोध करने वाले दलों के सदस्यों की संख्या 108 थी. लेकिन इनमें से JDU के 6 सदस्यों समेत कई दलों ने सदन से वॉक आउट कर दिया जिसकी वजह से बिल पास हो गया.आज की राजनीति में बायकॉट का मतलब समर्थन ही होता है. दरअसल पूरी राजनीति अब मैनेजमेंट के सिद्धांतों पर चल पड़ी है और जेडीयू का बायकॉट बीजेपी के उसी प्रबंधन का नतीजा रही है.

दरअसल, जेडीयू अगर विरोध में मत भी डालती तो भी कम अंतर से ही सही, लेकिन बिल पास हो जाता. लेकिन, तब यह लगता कि वाकई नीतीश कुमार मुसलमानों के मसले पर BJP को छोड़ सकते हैं.लेकिन मतदान में भाग नहीं लेकर नीतीश कुमार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वो अपने लिए दो विकल्प खोले रखना चाहते हैं. तीन तलाक मसले पर बायकॉट भी इसी राजनीति का हिस्सा है. तीन तलाक पर वोटिंग का बायकॉट करने से साफ हो गया कि बीजेपी-जेडीयू के बीच का अंदरूनी कलह अभीतक इस स्टेज पर नहीं पहुंचा है कि गठबंधन खतरे में पड़ जाए.

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