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नीतीश के गेम से सेट हो गए तेजस्वी और चिराग, अब खेला शुरू.

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Chirag Paswan News
सिटी पोस्ट लाइव : बिहार में बड़ा राजनीतिक खेल नीतीश कुमार ने खेला और महागठबंधन की सरकार  बन गई. लेकिन सबसे बड़ा सवाल नीतीश कुमार के इस गेम से सबसे ज्यादा किसको फायदा हुआ? राजनीतिक पंडितों की बात तो दूर आम आदमी के लिए ये समझना मुश्किल नहीं कि नीतीश कुमार के इस गेम से सबसे ज्यादा फायदा उनके कट्टर विरोधी तेजस्वी यादव और चिराग पासवान को हुआ?तेजस्वी यादव को क्या फायदा हुआ समझाने की जरुरत नहीं और चिराग पासवान के बारे में खबर आ रही है कि उन्हें मोदी कैबिनेट में जगह मिल रही है.जाहिर है नीतीश कुमार को सबसे ज्यादा नुकशान पहुँचानेवाले चिराग पासवान नीतीश कुमार के गेम से ही फिर से राजनीति में सेट हो गये.

नीतीश कुमार के NDA छोड़ने के बाद बीजेपी बिहार में 2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए फ्रंटफुट पर आ गई है. बीजेपी नेतृत्व चिराग पासवान को केंद्रीय मंत्रिमंडल में लाना चाहता है. चिराग की पार्टी को लगभग 6% वोट बैंक का अच्छा समर्थन प्राप्त है जो किसी के पक्ष में चुनाव परिणाम को झुकाने के लिए पर्याप्त है. वोट बैंक के लिहाज से 2024 के चुनाव में चिराग अहम भूमिका निभा सकते हैं.मीडिया में चल रही रिपोर्ट के मुताबिक लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान को विधिवत केंद्र के सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल कराने की तैयारी चल रही है. बीजेपी से बिहार के बारे में अपना खाका प्रकट करने के लिए कहने के अलावा, चिराग ने भगवा खेमे से 2025 के विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए के ‘सीएम चेहरे’ को साफ करने के लिए भी कहा है.

फिलहाल केंद्र में चिराग के विपक्षी और चाचा पशुपति कुमार पारस मंत्री हैं. जाहिर तौर पर स्थिति का फायदा उठाकर चिराग ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है.आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि हालांकि चिराग को मोदी कैबिनेट में एक मंत्रालय की पेशकश की गई है लेकिन चिराग अपनी पार्टी के भविष्य और 2025 के विधानसभा चुनावों में एनडीए में अपनी भूमिका के बारे में सुनिश्चित करना चाहते हैं, जो 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद होगा.चिराग के एक करीबी नेता के मुताबिक’बीजेपी जानती है कि बिहार में सभी 40 लोकसभा सीटें अकेले मोदी नहीं जीत सकते हैं. इसके लिए पहले से रणनीति तैयार करनी होगी, सहयोगियों को विश्वास में लेना होगा और मतदाताओं का समर्थन हासिल करने के लिए संयुक्त अभियान शुरू करना होगा.

2019 के लोकसभा चुनावों मेंचिराग की पार्टी को 8.02% वोट मिले थे जबकि 2014 में उसका वोट प्रतिशत 6.50 था. विधानसभा चुनाव में भी उसका वोट प्रतिशत काफी प्रभावशाली रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के 38 में से कम से कम 14 जिलों में पासवान मतदाता प्रभावशाली हैं.विधान सभा चुनाव में अपनी हर के लिए नीतीश कुमार चिराग पासवान को ही जिम्मेवार मानते रहे हैं.उनकी बीजेपी से यहीं शिकायत थी कि उसने चिराग को अलग लड़ने से रोका नहीं ताकि उनका नुकशान हो जाये.

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