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तेजस्वी यादव ने उठाया नीतीश सरकार की उपलब्धियों पर सवाल.

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सिटी पोस्ट लाइव : बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव बजट सत्र के दौरान शुक्रवार को बेहद आक्रामक नजर आये. तेजस्‍वी यादव ने सरकार के विकास के दावे पर बड़ा सवाल खड़ा किया.उन्होंने कहा कि अगर विकास हुआ है तो राज्य की 52 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा के नीचे क्यों है? उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह कर्मियों के लिए फिर से पुरानी पेंशन योजना चालू करे. उद्योग का विकास करे, ताकि बेरोजगारों को काम मिल सके. वे शुक्रवार को विधानसभा में बजट पर जारी बहस में हिस्सा ले रहे थे.

तेजस्‍वी यादव ने दावा किया कि केंद्र के असहयोग के बावजूद राजद शासन काल में राज्य का अधिक विकास हुआ. बजट का आकार बढ़ने के बावजूद गरीबी दूर क्यों नहीं हो रही है? राज्य के 38 में से 32 जिले की 50 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे है. सात जिलों में गरीबी रेखा से नीचे की आबादी 61 प्रतिशत है. विपक्ष के नेता ने कहा कि राज्य का हरेक दूसरा परिवार शिक्षा या रोजगार के लिए पलायन कर रहा है. 90 प्रतिशत स्कूलों में कम्प्यूटर लैब नहीं है. अन्य राज्यों की तुलना में स्कूली शिक्षा पर सबसे कम खर्च हो रहा है. एक करोड़ 29 लाख से अधिक युवा उच्च शिक्षा से वंचित हैं. उन्होंने कहा कि नए उद्यमियों को अवसर देने के लिए शुरू की गई योजना की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि लोग इसका लाभ नहीं ले पाते हैं.

तेजस्वी ने कहा कि यह सरकार की विफलता ही है कि आम जनता के बीच बजट को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं रहती है. उन्होंने कहा कि नीति आयोग और विकास का आकलन करने वाली अन्य एजेंसियां बिहार को सभी मानकों पर पिछड़ा बता रही हैं. राज्य सरकार हर साल बजट का आकार तो बढ़ा देती है, लेकिन बढ़ी हुई राशि खर्च नहीं कर पाती है. सीएजी की रिपोर्ट के हवाले से उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में बजट के 80 हजार करोड़ रुपये खर्च नहीं हुए. राज्य सरकार कह रही है कि प्रति व्यक्ति आय बढ़ी है। राष्ट्रीय औसत आय 86 हजार से अधिक है। बिहार में यह 50 हजार 555 रुपया है. बिहार में प्रति व्यक्ति आय अधिक कैसे है.

ऊर्जा एवं योजना विकास मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने तेजस्वी के भाषण के समय नियम के सवाल पर हस्तक्षेप करते हुए कहा कि तेजस्वी सीएजी की रिपोर्ट के आधार पर चर्चा कर रहे हैं.उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में सरकार 80 हजार करोड़ रुपये खर्च नहीं कर पाई. सच यह है कि सीएजी की टीम बमुश्किल 10 प्रतिशत खर्च को देखती है. उसी आधार पर टिप्पणी करती है. विधानमंडल की लोकलेखा समिति इस रिपोर्ट की समीक्षा कर रही है. इस अवधि में सदन के भीतर इस पर चर्चा नहीं की जा सकती है.

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