By, Shrikant Pratyush
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उपचुनाव में महागठबंधन के घटक दल ही बने तेजस्वी के लिए चुनौती

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विधानसभा की पांच में से चार सीटें- दरौंदा, सिमरी बख्तियारपुर, बेलहर और नाथनगर से राष्ट्रीय जनता दल ने अपने उम्मीदवारों को उतारने की न सिर्फ घोषणा की, बल्कि लड़ने के लिए पार्टी का सिंबल भी दे दिया. नाराज मांझी और मुकेश सहनी ने एक एक सीट से अपना उम्मीदवार उतार दिया.घटक दल के उम्मीदवार ही उप-चुनाव में बने तेजस्वी यादव के लिए बड़ी चुनौती.

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उपचुनाव में महागठबंधन के घटक दल ही बने तेजस्वी के लिए चुनौती

सिटी पोस्ट लाइव ; बिहार  में पांच विधानसभा सीटों और लोकसभा की एक सीट के लिए हो रहे उपचुनाव में तेजस्वी यादव के लिए महागठबंधन के नेता ही सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) आज से चुनाव प्रचार शुरू कर चुके हैं. महागठबंधन के दलों में आरजेडी चार विधानसभा सीट और कांग्रेस  ने एक लोकसभा और एक असेंबली सीट के लिए अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं. जाहिर है इसमें अलायंस में शामिल अन्य दलों को कोई जगह नहीं मिली है. ऐसे में जीतन राम मांझी और मुकेश सहनी ने दो जगहों से अपना उम्मीदवार उतार कर तेजस्वी यादव की मुश्किल बढ़ा दी है.

इस उपचुनाव में महागठबंधन के दो दल आरजेडी-कांग्रेस ही साथ दिख रहे हैं. लेकिन बाकी घटक दल वीआइपी पार्टी और हम पार्टी ने भी मैदान में अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं.दरअसल इसकी शुरुआत तब हुई जब विधानसभा की पांच में से चार सीटें- दरौंदा, सिमरी बख्तियारपुर, बेलहर और नाथनगर से राष्ट्रीय जनता दल ने अपने उम्मीदवारों को उतारने की न सिर्फ घोषणा की, बल्कि लड़ने के लिए पार्टी का सिंबल भी दे दिया.इससे नाराज मांझी और मुकेश सहनी ने एक एक सीट से अपना उम्मीदवार उतार दिया.

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कांग्रेस पार्टी शुरू में दो सीटों किशनगंज और सिमरी बख्तियारपुर की मांग कर रही थी. वहीं, हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने नाथनगर से अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी थी. मांझी ने तो यह ऐलान आरजेडी की घोषणा से भी पहले कर दिया था, लेकिन आरजेडी ने उनकी बात को दरकिनार कर नाथनगर से भी अपना उम्मीदवार उतार दिया.

 लोकसभा चुनाव में तीन सीटों पर लड़ चुकी सन ऑफ मल्लाह कहे जाने वाले मुकेश सहनी की पार्टी विकासशील इंसाफ पार्टी (VIP) ने भी सिमरी बख्तियारपुर सीट पर लड़ने की घोषणा की थी, लेकिन वहां से भी आरजेडी ने अपना उम्मीदवार उतार दिया.जाहिर है दो सीटों पर तेजस्वी यादव की मुश्किल उनके दो सहयोगी दल ही बढ़ाएगें.

आरजेडी की ओर से चार सीटों पर लड़ने की घोषणा के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) काफी नाराज दिख रही थी और पांचों विधानसभा और एक लोकसभा पर चुनाव लड़ने को तैयार थी. लेकिन, केंद्रीय नेतृत्व के दखल के बाद वो एक विधानसभा और एक लोकसभा सीट पर लड़ने को राजी हो गई.अगर व्यवहारिक रूप में देखा जाए तो उपचुनाव की लड़ाई में आरजेडी और कांग्रेस तो साथ हैं, लेकिन हम, वीआईपी और आरएलएसपी कहीं सीन में भी नजर नहीं आ रहे.

जाहिर है आरजेडी और कांग्रेस के साथ आने और बाकी दलों को अधिक तरजीह नहीं देने फॉर्मूले पर तेजस्वी यादव चल पड़े हैं. इसी बहाने महागठबंधन में शामिल इन दलों को उन्होंने एक मैसेज भी देने की कोशिश की है कि महागठबंधन का स्वरूप वो जैसा चाहेंगे, वैसा ही होगा. बिहार में पांच विधानसभा सीटों और लोकसभा के एकमात्र सीट के लिए उपचुनाव 21 अक्टूबर को होना है. इसी दिन महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा का चुनाव भी है. वोटों की गिनती मतदान के तीन दिन बाद यानी 24 अक्टूबर को होगा. राज्य की जिन पांच विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव होना है उनमें से चार पर बीजेपी का कब्जा था.

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