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नीतीश कुमार को टिकैट ने दी आंदोलन की चेतावनी.

किसान नेता टिकैत ने पत्र लिखकर कहा- मंडी व्यवस्था शुरू नहीं हुई तो बिहार में करेंगे बड़ा आंदोलन.

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सिटी पोस्ट लाइव : तेजस्वी यादव की चेतावनी के वावजूद RJD के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बेटे बिहार सरकार के पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह कण्ट्रोल में नहीं आ रहे.सूत्रों के अनुसार सुधाकर सिंह ने किसान नेता चौधरी राकेश टिकैच से संपर्क साधा है.उसके बाद इस चर्चित किसान नेता चौधरी राकेश टिकैच ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर किसान मंडी को लेकर बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी दी है.गौरतलब है कि इससे पहले राजद नेता और तत्कालीन मंत्री सुधाकर सिंह लगातार यह मांग उठाते रहे हैं. उन्होंने इसके लिए अपने विभाग में पीत पत्र भी लिखा था. वे अब मंत्री पद पर नहीं हैं. कृषि से जुड़े मुद्दों को तल्खियत से उठाने और अफसरशाही पर सवाल उठाने पर नीतीश कुमार की नाराजगी बढ़ गई थी. इसके बाद लालू प्रसाद के निर्देश को मानते हुए सुधाकर सिंह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था,

बिहार में नीतीश कुमार जब 2006 में एनडीए के साथ थे, उसी समय एपीएमसी अधिनियम और मंडी व्यवस्था को उन्होंने खत्म कर दिया था. चर्चित किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को 17 अक्टूबर को पत्र लिखा है.मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लिखे पत्र में टिकैट ने कहा है ‘बिहार में पिछले लगभग15 से16 वर्ष से मंडियां बंद हैं जिससे वहां के उन किसानों को ना तो फसल बेचने का कोई प्लेटफार्म मिल पाता है और ना फसल के भाव प्रभावी रूप से मिल पा रहे हैं. बिहार का किसान अपने द्वारा पैदा किए हुए खानदान को दलालों के माध्यम से लागत से भी कम दाम पर बेचने पर मजबूर है. किसानों की आर्थिक स्थिति बिहार में बदहाल हो चुकी है. ना तो उनके पास में खेत में फसल बोने के लिए बीज का पैसा है और ना परिवार का पालन पोषण करने के लिए उपयुक्त धनराशि है.

उन्होंने आगे लिखा है – मुख्यमंत्री जी मंडियां होने के कारण बिहार का किसान दूसरे प्रदेशों में आकर मजदूरी करने पर विवश हो गया है. जो छात्र किसान परिवार से आते हैं परिवार में धन उपलब्ध ना होने के कारण उनकी शिक्षा पर इसका बहुत असर पड़ रहा है. हमारे आग्रह पर बिहार में दोबारा से मंडियां शुरू किए जाने का कार्य किया जाए, जिससे किसान को फसल बेचने का प्लेटफार्म और न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाए. अगर यह कार्य नहीं होता है तो बिहार में एक बड़ा आंदोलन करने पर हम मजबूर होंगे.ऐसा माना जा रहा है कि सुधाकर सिंह ने ही किसान नेता को उकसाया है. ‘

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