By, Shrikant Pratyush
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‘जो मुर्दों को कोसकर वर्तमान से ध्यान हटाते हैं, शहादतों को वे व्यापारी भुनाते हैं’

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शहादत पर सियासत जारी है। हांलाकि यह दावा रहा है कि अगर बात देश की होगी, शहीदों की होगी और आतंकवाद की होगी तो सियासत नहीं होगी लेकिन सियासत में शायद संवेदनाओं की खुमारी ज्यादा देर तक नहीं टिकती इसलिए पुलवामा आतंकी हमले और उसके बाद भारत की ओर से हुए सर्जिकल स्ट्राइक पर लगातार सियासत होती रही है।

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‘जो मुर्दों को कोसकर वर्तमान से ध्यान हटाते हैं, शहादतों को वे व्यापारी भुनाते हैं’

सिटी पोस्ट लाइवः शहादत पर सियासत जारी है। हांलाकि यह दावा रहा है कि अगर बात देश की होगी, शहीदों की होगी और आतंकवाद की होगी तो सियासत नहीं होगी लेकिन सियासत में शायद संवेदनाओं की खुमारी ज्यादा देर तक नहीं टिकती इसलिए पुलवामा आतंकी हमले और उसके बाद भारत की ओर से हुए सर्जिकल स्ट्राइक पर लगातार सियासत होती रही है। कमाल की बात यह कि विपक्ष सत्ताधारी दल पर आरोप लगाता है कि शहादत को सियासत के लिए भुनाया जाता है तो दूसरी तरफ सत्ताधारी पार्टियां विपक्ष पर यह आरोप लगाती रही है कि विपक्ष इस मुद्दे पर राजनीति करता है।

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जाहिर है आरोप-प्रत्यारोप दोनों हीं तरफ से हो रहा है सियासत अपनी गलियों में शहादत को घसीट लायी है । अब राजद ने ट्वीट किया है-‘जो श्मशान, कब्रिस्तान पर खड़े होकर दोनों का अंतर बताते हैं। जो मुर्दों को कोस-कोस कर वर्तमान से ध्यान हटाते हैं। ये वही हैं जो चुनावी मौसम में सरहद पर गिरने वाली हर बेटे की लाश का जमकर चुनावी जश्न मनाते हैं। क्योंकि उन्हीं शहादतों को ते वे ‘व्यापारी’ अपने फायदे के लिए भुनाते हैं’

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