By, Shrikant Pratyush
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लोकसभा में जोरदार हंगामें के बीच पेश हुआ ट्रिपल तलाक बिल,कांग्रेस ने किया विरोध

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ट्रिपल तलाक विधेयक पर जैसी की आशंका जाहिर की जा रही थी वैसा ही हुआ।आखिरकार तीन तलाक बिल को लोकसभा में पेश करते ही हंगामा शुरू हो गया। हालांकि तीन तलाक बिल को रविशंकर प्रसाद ने हंगामें के बीच लोकसभा में पेश कर दिया।कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इस बिल का विराध किया और कहा कि कांग्रेस बिल के डाफ्ट का विरोध करती है।इससे पहले बिहार में चमकी बुखार से मरनेवाले मासूम बच्चों के बिंदूओं पर भी चर्चा हुई।

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लोकसभा में जोरदार हंगामें के बीच पेश हुआ ट्रिपल तलाक बिल,कांग्रेस ने किया विरोध

सिटी पोस्ट लाइव- ट्रिपल तलाक विधेयक पर जैसी की आशंका जाहिर की जा रही थी वैसा ही हुआ।आखिरकार तीन तलाक बिल को लोकसभा में पेश करते ही हंगामा शुरू हो गया। हालांकि तीन तलाक बिल को रविशंकर प्रसाद ने हंगामें के बीच लोकसभा में पेश कर दिया।कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इस बिल का विराध किया और कहा कि कांग्रेस बिल के डाफ्ट का विरोध करती है।इससे पहले बिहार में चमकी बुखार से मरनेवाले मासूम बच्चों के बिंदूओं पर भी चर्चा हुई।जबकि इस मुद्ये पर राज्यसभा में मौन रखा गया। बता दें कि सरकार ने इस बिल को नये स्वरूप में पेश किया है। इस बिल के प्रावधान के अनुसार कोई भी शिकायत तभी दर्ज की जाएगी जब खुद पीड़ीता या उसका कोई रिश्तेदार आकर शिकायत दर्ज कराएगी।

तीन तलाक बिल आज यानी शुक्रवार को लोकसभा में पेश किया गया।बता दें कि यह बिल मुस्लिम समाज की महिलाओं से जुड़ी है। यह बिल वैसी मुस्लिम महिलाओंके लिये राहत देगी जो किसी कारण से पुरूषेा के द्धारा प्रताड़ना के शिकार होते है। यह मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक -2019, 16 वीं लोकसभा के दौरान ही लोकसभा में पारित किया गया था लेकिन यह विध्ेायक राज्य सभा में लंबित था । परंतु नियमानुसार किसी विधेयक के लंबित रहने की स्थिति में अगर निचली सदन भंग हो जाता है तो वैसी स्थिति में वह विधेयक अपने आप ही निष्प्रभावी हो जाता है।

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सरकार ने सितंबर और फरवरी में दो बार तीन तलाक पर अध्यादेश जारी किया था। लेकिन यह विवादास्पद विधेयक लोकसभा के बाद राज्यसभा में लंबित था।वैसे बता दें कि इस विधेयक के प्रावधानों के अनुसार अगर कोई पुरूष मुस्लिम महिला को तीन तलाक देता है तो उसे तीन साल की कैद हो सकती है। क्योंकि इस विधेयक के तहत यह तलाक अवैध, अमान्य है। कई मुस्लिम संगठनों ने इस बिल का स्वागत किया है।
     जे.पी चन्द्रा की रिपोर्ट

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