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उपेंद्र कुशवाहा जाएंगे राज्यसभा, बन सकते हैं मंत्री.

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सिटी पोस्ट लाइव : उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण बहुत मायने रखता है.उत्तर प्रदेश और बिहार में बदले  जातीय समीकरण का  नतीजा भी दिख चूका है. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की अवध और पूर्वांचल के इलाकों में जीत के पीछे गैर-यादव ओबीसी नेताओं को बड़े पैमाने पर टिकट मिलना एक बड़ा कारण बताया जा रहा है. कुर्मी, कोरी, कुशवाहा समाज के नेताओं को टिकट देकर अखिलेश यादव ने चुनाव का नतीजा बदल दिया.बिहार में भी इसी तरह का प्रयोग तेजस्वी यादव ने करके बीजेपी एनडीए की चुनौती बढ़ा दी थी.अब बीजेपी मंथन कर रही है .सूत्रों के अनुसार उपेन्द्र कुशवाहा को बीजेपी राज्य सभा भेंजकर मंत्री बना सकती है.

 

 उत्तर प्रदेश में मिली करारी हार और बिहार में महागठबंधन से मिली कड़ी चुनौती को लेकर बीजेपी के अंदर मंथन चल रहा है. यूपी और बिहार में कुछ जाती विशेष  के  नेताओं को प्रमोट किया जा सकता है. भाजपा सूत्रों का कहना है कि बिहार में अगले ही साल चुनाव हैं और उससे पहले कुशवाहा समाज को जोड़ने के लिए उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा भेजा जा सकता है. उन्हें काराकाट लोकसभा से हार का सामना करना पड़ा था. वह कुशवाहा बिरादरी के बड़े नेताओं में से हैं. ऐसे में उन्हें राज्यसभा भेजकर भाजपा समाज को यह संदेश देना चाहेगी कि हम आपके साथ हैं.नीतीश कुमार की जदयू भी इसी कोशिश में है. उसने भगवान सिंह कुशवाहा को विधान परिषद भेजने का ऐलान किया है.

 

बिहार में राज्यसभा की दो सीटें खाली हैं और उनमें से एक उपेंद्र कुशवाहा को मिलेगी. पार्टी ने पहले से ही सम्राट चौधरी को डिप्टी के पद पर बिठा रखा है. संतुलन साधने के लिए किसी अगड़ी  जाति खासतौर पर राजपूत नेता को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी दी जा सकती है. राज्य में कुशवाहा बिरादरी की 4.2 फीसदी आबादी है. इस वर्ग पर तेजस्वी यादव की भी नजर है.लोक सभा चुनाव में उन्होंने सात कुशवाहा नेताओं को टिकेट दिया था.तेजस्वी यादव ने  यादव और मुस्लिम की जगह  कुर्मी-कुशवाहा को ज्यादा तरजीह देकर एनडीए की मुश्किल बढ़ा दी थी. नतीजा भी अनुकूल आया. पिछले चुनाव में 1 सीट पर सिमट जानेवाले महागठबंधन के खाते में इसबार 10 सीटें आ गई हैं.

 

 बीते 20 सालों से लव- कुश समीकरण नीतीश कुमार का आधार रहा है, लेकिन आरजेडी ने इस बार सेंध लगाने में कामयाबी पा ली है. ऐसे में जेडीयू  और बीजेपी  दोनों ही इस पर काम कर रहे हैं.बिहार में राजद और यूपी में सपा को लगता है कि इस वोट में सेंध लगाकर भाजपा और जदयू को नुकसान पहुंचाया जा सकता है. बिहार में इंडिया अलायंस ने कुशवाहा समाज के 7 उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 2 ने जीत हासिल की. इसके अलावा 5 ने एनडीए की जीत के अंतर को काफी कम कर दिया. 2019 के मुकाबले यह बड़ा उलटफेर था. इसके अलावा राजद को लगता है कि अब जदयू के रिजर्व वोट में भी वह सेंध लगा सकती है.

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