By, Shrikant Pratyush
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दिग्गज नेता और सात बार विधायक रहे प्रो. स्टीफन मरांडी को कैबिनेट में नहीं मिली जगह

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को मंत्रिमंडल विस्तार का काम पूरा कर लिया , लेकिन विश्लेषकों के अनुमान को दरकिनार करते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा के दिग्गज नेता और सात बार विधायक रहे प्रो. स्टीफन मरांडी को कैबिनेट में जगह नहीं मिली, वहीं इस बार मथुरा प्रसाद महतो को भी आखिरी वक्त में किनारे कर दिया गया, जबकि सात बार विधायक रहे नलीन सोरेन, चार विधायक रहे लोबिन हेम्ब्रम, तीन बार विधायक निर्वाचित सीता सोरेन और झारखंड आंदोलनकारी रहे दीपक बिरूवा को भी मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिल सका। संताल परगना से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने सिर्फ एक विधायक हाजी हुसैन अंसारी को मंत्री बनाया है।

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दिग्गज नेता और सात बार विधायक रहे प्रो. स्टीफन को कैबिनेट में नहीं मिली जगह

सिटी पोस्ट लाइव, रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को मंत्रिमंडल विस्तार का काम पूरा कर लिया , लेकिन विश्लेषकों के अनुमान को दरकिनार करते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा के दिग्गज नेता और सात बार विधायक रहे प्रो. स्टीफन मरांडी को कैबिनेट में जगह नहीं मिली, वहीं इस बार मथुरा प्रसाद महतो को भी आखिरी वक्त में किनारे कर दिया गया, जबकि सात बार विधायक रहे नलीन सोरेन, चार विधायक रहे लोबिन हेम्ब्रम, तीन बार विधायक निर्वाचित सीता सोरेन और झारखंड आंदोलनकारी रहे दीपक बिरूवा को भी मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिल सका। संताल परगना से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने सिर्फ एक विधायक हाजी हुसैन अंसारी को मंत्री बनाया है।  इससे पहले तय माना जा रहा था कि स्टीफन मरांडी को मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी। सात बार के विधायक स्टीफन मरांडी को पार्टी में सबसे ज्यादा अनुभवी और विधायी कार्यों का जानकार माना जाता रहा है। इससे पहले वे सरकार में वित्त मंत्री का पद संभाल चुके हैं। अंदरखाने इसकी भी चर्चा है कि पार्टी और हेमंत सोरेन चाहते थे कि स्टीफन मरांडी स्पीकर का पद संभालें, लेकिन स्टीफन मरांडी के नहीं चाहने पर ही स्पीकर के पद पर रवींद्र नाथ महतो को का नामांकन कराया गया। जानकार बताते हैं कि स्टीफन मरांडी ने हेमंत सोरेन और शिबू सोरेन दोनों को इसका अहसास कराया था कि गठबंधन की सरकार है, और हेमंत सोरेन पर बड़ी जिम्मेदारी है।  इसलिए सरकार में उनके सहयोगी के तौर पर काम करना चाहूंगा।

गौरतलब है कि 2014 के चुनाव में स्टीफन मरांडी ने दुमका की सीट हेमंत सोरेन के लिए ही छोड़ी थी। इसके बाद वे महेशपुर चले गए।दुमका से स्टीफन छह बार चुनाव जीते हैं और महेशपुर से इस बार उनकी दूसरी पारी है। चर्चा इसकी भी है कि स्टीफन मरांडी और कद्दावर नहीं बन सकें, इसके लिए भी उन्हें किनारे किया गया है। अगर वे सरकार में होते, तो हेमंत के बाद सबसे बड़े कद के मंत्री माने जाते।  झामुमो के एक वरिष्ठ पदाधिकारी नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताते है कि संभवतः नलिन सोरेन, सीता सोरेन, लोबिन हेंब्रम को भी संतुष्ट रखे जाने की जरूरत को देखते हुए फिलहाल स्टीफन मरांडी को भी रोक कर रखा गया हो। पार्टी के अंदर ही इस बात की खुसर-फुसर है कि पहली बार विधायक बने मिथिलेश ठाकुर को जब मंत्रिमंडल में जगह दी गई, तो स्टीफन मरांडी, दीपक बिरूआ जैसे सीनियर लीडर को सरकार में शामिल कराया जा सकता था।  हालांकि अब तक सतह पर बातें उछल कर सामने नहीं आई है, लेकिन अंदर ही अंदर मरमरिंग है। बताया गया है कि परिस्थितियां इस तरह की बनती रही कि आखिरी वक्त मथुरा महतो का नाम किनारे हुआ। मथुरा प्रसाद महतो का कहना है कि मंत्री बनाना मुख्यमंत्री के विशेषाधिकार है. उनका फैसला सर्वमान्य है। उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी वह बखूबी निभाते रहेंगे।

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